क्या आप इस कदर इमोशनल हैं कि किसी भी छोटी बात पर रोने लगती हैं। अगर ऐसा हैं, तो कभी न कभी आपके मन में ये सवाल ज़रूर उठा होगा कि हर छोटी से छोटी चीज़ दुख का कारण कैसे बन जाती है। ऐसे में कुछ लोग जहां आपको सेंसिटिव तो कुछ ड्रामा क्वीन कहकर भी पुकारते होंगे। भले ही यह स्थिति अजीब हो, लेकिन कुछ लोग इस पर कंट्रोल नहीं कर पाते। मगर आपको जानना चाहिए कि ज्यादा रोना आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए जरूरी है कि आप इस स्थिति से उबरने (How to stop crying) के बारे में जान लें।
दरअसल, भावनाएं ऐसी चीज़ है, जो हर बार किसी वजह के कारण ही व्यक्त नहीं की जाती हैं। जहां कुछ बुरी यादें रूला जाती हैं, तो कुछ अच्छी बातें भी खुशी के आंसू ले आती हैं। हमें इस बात को स्वीकार करना होगा कि रोना किसी भी सूरत में गलत नहीं है। ये भावनाओं को व्यक्त करने का आसान तरीका है। कई बार रोना चिंता का कारण भी साबित होता है। जानते हैं वो कौन
से तरीके हैं, जिनकी मदद से बिन बुलाए आंसूओं को आसानी से रोका जा सकता है।
बहुत बार ऐसा होता है, जब आप खुद को पहले से कहीं ज्यादा रोते हुए देखते हैं। अगर रोना आपकर आदत बन चुकी हैं, तो इस आदत को सुधारना बेहद ज़रूरी है। मनोवैज्ञानिक हेमाश्री अलासे के अनुसार, अत्यधिक रोना बर्नआउट का संकेत देता है। बर्नआउट, जो अक्सर क्रानिक तनाव से जुड़ा होता है। इससे व्यक्ति के मन में इमोशनल सेंसिटिविटी बढ़ने लगती है। इससे किसी बात पर होने वाले तनाव के कारण बार बार व्यक्ति रोने लगता है।
एक्सपर्ट का कहना है कि इस समस्या से निपटने के लिए ट्रिगर्स को पहचानें। इससे अत्यधिक रोने की समस्या को हल करने के लिए ये पहला कदम है। ट्रिगर्स को पहचानने से आपको अपनी भावनाओं को समझने और स्वीकार करने में मदद मिलती है। इससे आप खुद को बड़ी से बड़ी समस्या से बाहर निकाल पाते हैं।
वे लोग जो हर छोटी बात पर रोने लगते हैं। उन्हें डीप ब्रीदिंग की मदद लेनी चाहिए। जब आपको लगे कि आंसू छलकने लगे हैं, तो कुछ देर डीप ब्रीदिंग करें। इससे मन में उठने वाले विचार अपने आप शांत होने लगते हैं और शरीर एनर्जी से भर जाता है। इसके लिए गहरी सांस लें और उसे कुछ देर होल्ड करके रखें। फिर मुंह के ज़रिए बाहर निकालें।
खुद को हेल्दी रखने और रोने की समस्या से राहत पाने के लिए माइंडफुलनेस का अभ्यास करें। अपनी सांस पर ध्यान केंद्रित करें और अपने विचारों को इवेल्यूएट करना सीखें। इससे आप आसानी से अपनी समस्याओं का आंकलन कर पाएंगे। अलासे का कहना है कि माइंडफुलनेस इमोशंस से राहत दिलाकर मानसिक शांति प्रदान करता है।
मन में उठने वाले नकारात्मक विचारों को काबू करने के लिए पॉजिटिव थॉटस बढ़ाएं। अपनी एनर्जी और क्षमताओं की पहचानें और किसी भी व्यक्ति की कही बात को खुद पर हावी न होने दें। यही विचार आपकी मानसिकता को बदलने में मददगार साबित हो जाएंगे।
अपने व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में सीमाएं बनाकर चलें। अलासे कहते हैं, दूसरों को अपने जीवन में घुसकर फैसले लेने की अनुमति न दें। अपनी बाउंड्रीज़ को सेट करके चलें। अगर आपकी किसी भी चीज़ या व्यक्ति से परेशानी है, तो उसे न कहने की हिम्मत रखें। ये चीजें तनाव को कम करमी है और इमोशनल ओवरलोड को रोकती भी हैं।
अपने विचारों और भावनाओं को व्यक्त करने के लिए अखबार और पत्रिकाओं का सहारा लें। अपनी भावनाओं को लिखना और चुनौतियों को एक्सेप्ट करना मेंटल हेल्थ को मज़बूत बनाता है। रोजमर्रा के जीवन में कुछ वक्त पढ़ने और लिखने के लिए निकालें।
अपनी फिटनेस के लिए दिनभर में कुछ वक्त ज़रूर निकालें। इससे शारीरिक अंगों में होने वाली ऐंठन से मुक्ति मिलती है। साथ ही मन में उठने वाले नकारात्मक विचार आसानी से रिलीज़ हो जाते हैं। तन और मन को शांति की प्राप्ति होती है। मेडिटेशन और योग मन को हेल्दी रखने का बेहतरीन विकल्प है।
अनियमित खानपान हार्मोनल असंतुलन का कारण बनते हैं। इससे मूड स्विंग की समस्या से दो चार होना पड़ता है। ऐसे में हेल्दी डाईट लें औी मील को स्किप करने से बचें। खुद को एक्टिव बनाए रखने के लिए बैलेंसड डाइट को फॉलो करें।
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