जीवनशैली में ये छोटे-छोटे 7 बदलाव कम कर सकते हैं बुढ़ापे में डिमेंशिया का जोखिम

यह बुजुर्गों को पूरी तरह दूसरों पर निर्भर बना देता है। वे न केवल अपनी पुरानी स्मृतियां खोने लगते हैं, बल्कि अपने डेली रुटीन के काम भी भूल जाते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि हम सभी इसे संभालने का तरीका जानते हों।

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डिमेंशिया दुर्बल करने वाली न्यूरो-डीजेनेरेटिव बीमारी है। चित्र शटरस्टॉक
टीम हेल्‍थ शॉट्स Published on: 12 September 2022, 19:24 pm IST
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डिमेंशिया एक जटिल और दुर्बल करने वाली न्यूरो-डीजेनेरेटिव बीमारी है। यह एक ऐसी स्थिति है जो किसी व्यक्ति की सोच, व्यवहार और स्मृति को प्रभावित करती है। दुर्भाग्य से, यह रोग समय के साथ बिगड़ता जाता है और याददाश्त को नष्ट कर सकता है। पिछले वर्ष सितंबर में, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने डिमेंशिया के प्रति सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रतिक्रिया पर एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें इस तथ्य की तरफ ध्यान आकर्षित किया गया था कि दुनिया भर में 55 मिलियन से ज्यादा लोग डिमेंशिया से ग्रस्त हैं। हर 3 सेकंड में एक नया मामला विकसित हो रहा है। वास्तव में, WHO का कहना है कि यह मृत्यु का सातवां प्रमुख कारण है और बुजुर्गों में निर्भरता का एक प्रमुख कारण। इसके बावजूद बहुत सारे लोग नहीं जानते कि डिमेंशिया को कैसे मैनेज किया जाना चाहिए। यहां ऐसे ही जरूरी 7 टिप्स दिए जा करे हैं, जो डिमेंशिया (How to manage dementia) के रिस्क को कम करने में आपकी मदद कर सकते हैं।

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बढ़ती उम्र के साथ डिमेंशिया को बढ़ने न दें। चित्र शटरस्टॉक।

डिमेंशिया का मैनजमेंट कैसे करें?

हालांकि उम्र बढ़ना डिमेंशिया के लिए सबसे बड़ा जोखिम कारक है। तथ्य बताते हैं कि कुछ चीजें हैं, जो किसी के लिए भी डिमेंशिया का जोखिम कम करने में मदद कर सकते हैं। इनमें जीवनशैली में कुछ बदलाव शामिल हैं।

इसलिए आपको यह समझने में मदद करने के लिए कि जीवनशैली में कौन से बदलाव डिमेंशिया या अल्जाइमर के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं, हेल्थ शॉट्स ने डॉ प्रदीप महाजन रीजेनरेटिव मेडिसिन रिसर्चर, स्टेमआरएक्स बायोसाइंस सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, नवी मुंबई से बात की।

यहां जीवनशैली के वे 7 बदलाव हैं, जो डिमेंशिया को मैनेज करने में आपकी मदद कर सकते हैं

1 वजन पर कंट्रोल करें

अधिक वजन या मोटा होना किसी के ब्लड प्रेशर और टाइप 2 डायबिटीज की संभावना को बढ़ा सकता है, दोनों ही डिमेंशिया से संबंधित हैं। इसके लिए एक संतुलित आहार लेना अनिवार्य है, जिसमें ताजे फल, सब्जियां, मेवा, बीज, दालें और साबुत अनाज शामिल हों। जंक, प्रोसेस्ड और डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों से बचने की कोशिश करें।

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सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है देर रात एक्सरसाइज करना। चित्र : शटरस्टॉक

2 रोज़ कसरत करें

आप यह जानकर चौंक जाएंगे कि शारीरिक गतिविधि की कमी से हृदय रोग होने, अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त होने और टाइप 2 डायबिटीज होने की संभावना बढ़ सकती है। ये सभी डिमेंशिया से जुड़े हैं। वृद्ध वयस्क जो नियमित रूप से व्यायाम नहीं कर पाते उन्हें बाद में जीवन में याद्दाश्त संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

इसलिए नियमित रूप से शारीरिक रूप से सक्रिय रहें। ब्रिस्क वॉकिंग, साइकलिंग या डांसिंग जैसी गतिविधियां करने की कोशिश करें। मजबूत करने वाले व्यायाम या योग करें।

3 शराब का सेवन न करें

बहुत अधिक शराब पीने से स्ट्रोक, हृदय रोग और कैंसर हो सकता है, जो तंत्रिका तंत्र और मस्तिष्क को प्रभावित करता है। व्यक्ति बाद के जीवन में डिमेंशिया से पीड़ित हो सकता है। शराब का सेवन सीमित करें, और स्वस्थ रहें।

4 धूम्रपान न करें

क्या आप जानते हैं कि धूम्रपान रक्त वाहिकाओं को संकुचित करता है, ब्लड प्रेशर बढ़ाता है और आपको हृदय रोग के उच्च जोखिम में डालता है। धूम्रपान डिमेंशिया के लिए एक जोखिम कारक है क्योंकि इससे संज्ञानात्मक हानि होती है।

5 तनावमुक्त रहें

डिप्रेशन से डिमेंशिया होने का खतरा बढ़ जाता है। ध्यान जैसी विश्राम तकनीकों को करने का प्रयास करें।

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लगातार अकेलापन या क्षणिक अकेलेपन से अल्ज़ाइमर्स हो सकता है। चित्र: शटरस्टॉक

6 अपने स्वास्थ्य पर नियंत्रण रखें

जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती है, अनुपचारित हाई ब्लड प्रेशर, उच्च कोलेस्ट्रॉल और टाइप 2 डायबिटीज जैसी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। ये स्थितियां डिमेंशिया के विकास के बढ़ते जोखिम से जुड़ी हैं। इसलिए यह वास्तव में महत्वपूर्ण है कि आप अपने आप पर नज़र रखें और स्वस्थ दिनचर्या का पालन करें ताकि आप सुरक्षित और स्वस्थ रहें।

7 स्वस्थ आहार लें

बढ़ती उम्र के साथ स्वस्थ आहार लेना और भी जरूरी होता जाता है। एक स्वस्थ और संतुलित आहार आपके शरीर को आवश्यक सभी पोषक तत्व प्रदान करेगा और डिमेंशिया सहित अन्य बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।

इसलिए, चावल और पास्ता, फल और हरी सब्जियां, रेड मीट, मछली जैसे साबुत अनाज खाएं और पौधों के तेल का उपयोग करें। आपको शर्करा युक्त खाद्य पदार्थ, शराब और नमक का सेवन सीमित करने की आवश्यकता है।

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