असंतुलित गट माइक्रोबायोम बढ़ा सकते हैं आपके लिए लॉन्ग कोविड का जोखिम

Published on: 28 January 2022, 14:57 pm IST

26 जनवरी को गट जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया है कि पेट या आंत की गड़बड़ी आपको लॉन्ग कोविड झेलने के लिए जिम्मेदार हो सकती है।

kya hai long covid
जानिए क्या है लॉन्ग कोविड। चित्र : शटरस्टॉक

क्या आपको गट माइक्रोबायोम के बारे में जानकारी है? आपकी सेहत के लिए यह कितने जरूरी है! और इससे लॉन्ग कोविड का क्या संबंध है? हाल ही में एक अध्ययन से जानकारी सामने आई कि हमारी आंत (Gut) में मौजूद माइक्रोबायोम की संरचना लॉन्ग कोविड लक्षणों से जुड़ी है। एक व्यक्ति अपने माइक्रोबायोम संतुलन से प्रारंभिक संक्रमण से ठीक हो सकता है।

शोधकर्ताओं द्वारा अध्ययन में लिखा गया कि, “ह्यूमन गट माइक्रोबायोम” लंबे COVID के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। जिसे SARS-CoV-2 संक्रमण, या PASC के पोस्ट-एक्यूट सीक्वेल के रूप में भी जाना जाता है। 

चलिए पहले जानते हैं क्या है गट माइक्रोबायोम

यह बात सभी जानते हैं कि हमारे शरीर में खरबों बैक्टीरिया होते हैं। कुछ हमारे शरीर के लिए बहुत ज्यादा जरूरी होते हैं वहीं कुछ बीमारियों से जुड़े हुए होते हैं। इसमें बैक्टीरिया समेत फंगस और वायरस भी शामिल हैं। 

इन सभी के समूह को माइक्रोबायोम के नाम से जाना जाता है। कुछ बैक्टीरिया रोग से जुड़े होते हैं, जबकि अन्य आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली, हृदय, वजन और स्वास्थ्य के कई अन्य पहलुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं।

अब जानिए क्या है लॉन्ग वोविड?

सेंटर ऑफ डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार लॉन्ग कोविड (Long Covid) एक ऐसी स्थिति है, जिसमें कोरोना के प्रारंभिक संक्रमण के बाद हफ्तों तक या महीनों तक लगातार लक्षण बने रहते हैं। इन लक्षणों के साथ कोविड-19 का खतरा और बढ़ जाता है। थकान, सांस की तकलीफ, सीने में दर्द, गंध की कमी और “ब्रेन फॉग” कुछ सबसे आम लक्षण हैं।

कई महीनों तक रहते हैं इसके लक्षण। चित्र : शटरस्टॉक

लॉन्ग कोविड काफी खतरनाक है, क्योंकि यह स्थिति मात्र उन लोगों तक सीमित नहीं है जिन्हें गंभीर कोरोना हुआ है। यह उन लोगों को भी हो सकता है, जिनमें कोरोना के हल्के लक्षण थे। इसमें बच्चे और किशोर भी शामिल हैं। लॉन्ग कोविड का मुख्य कारण क्या है इसके बारे में अभी कोई भी जानकारी सामने नहीं आई है।

गट माइक्रोबायोम बता सकता है लॉन्ग कोविड के विकास का खतरा

गट जनरल में 26 जनवरी को प्रकाशित इस अध्ययन के शोधकर्ताओं द्वारा बताया गया है कि किसी व्यक्ति की आंतों में मौजूद बैक्टीरिया, कवक और अन्य रोगाणुओं का विश्लेषण करना जिन्हें माइक्रोबायोम प्रोफाइलिंग के तौर पर जाना जाता है, यह  निर्धारित करने में मदद कर सकता है कि किन लोगों को इस स्थिति के विकसित होने का अधिक खतरा है। 

शोध के बारे में जानिए कुछ अन्य जानकारियां 

शोधकर्ताओं द्वारा किसी भी प्रारंभिक वायरस लोड के बीच कोई भी संबंध नहीं पाया गया। उन्होंने पाया कि आंत माइक्रोबायोम और किसी व्यक्ति की बीमारी की गंभीरता के बीच में कोई भी संबंध नहीं है। हालांकि यह जरूर पाया गया कि लॉन्ग कोविड वाले लोगों में पेट के माइक्रोबायोम में उन लोगों की तुलना में “विशिष्ट” अंतर थे, जिन्हें कोरोनावायरस संक्रमण नहीं था।

लॉन्ग-कोविड रोगियों में गैर-कोविड ​​​​रोगियों की तुलना में कम विविध आंत माइक्रोबायोम थे। इस अध्ययन में शामिल शोधकर्ता घनौम (Ghannoum) ने कहा, “यदि आपके पास एक माइक्रोबायोम है जो संतुलित नहीं है – जिसे हम डिस्बिओसिस कहते हैं, तो आपको लॉन्ग कोविड लक्षणों के होने की संभावना बहुत अधिक होगी।”

जानिए क्या है लॉन्ग कोविड के 4 रिस्क फैक्टर 

Corona se thik hone kebaad bhi aaram karne ki jaroorat hai
कोरोना से ठीक होने के बाद भी आपको आराम करने की जरूरत है। चित्र : शटरस्टॉक

मेडिकल जर्नल सेल में प्रकाशित एक नए अध्ययन के अनुसार लॉन्ग कोविड के रिस्क फैक्टर में शामिल है : 

  1. खून में वायरल लोड।
  2. कुछ ऑटोएंटीबॉडी की उपस्थिति
  3. एपस्टीन-बार वायरस (Epstein-Barr virus) का रिएक्टिवेशन, जो कम उम्र में लोगों को संक्रमित करने के लिए जाना जाता है।
  4. रोगी को टाइप 2 मधुमेह हो सकता है।

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अक्षांश कुलश्रेष्ठ अक्षांश कुलश्रेष्ठ

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