क्या आपके फेवरिट राजमा-छोले आपके लिए बढ़ा देते हैं फार्टिंग की समस्या, तो जानिए इसका कारण और बचाव का तरीका

राजमा ज्यादातर लोगों के पसंदीदा व्यंजनों में से एक हैं। पर कुछ लोगों को राजमा और कुछ अन्य दालें खाने के बाद पेट में गैस, अपच और फार्टिंग की समस्या हो जाती है। चलिए जानते हैं इस समस्या के बारे में सब कुछ।
rajma khane se kyun banti hai gas
मसूर दाल में जटिल कार्बोहाइड्रेट होते हैं, जिन्हें पचाना मुश्किल हो सकता है। चित्र- अडोबी स्टॉक
संध्या सिंह Published: 8 Jul 2023, 09:30 am IST
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कई बार आपको लोगों को बालते हुए सुना होगा या खुद भी महसूस किया होगा कि राजमा खाने से गैस बनती है या चने खाने से फार्ट होती है। कई बार आप ऑफिस में राजमा लेकर जाते है और खाने के बाद आपको फार्ट की समस्या हो जाती है। यह किसी के लिए भी शर्मिंदगी भरा पल हो सकता है। कुछ दालें ऐसे होती है जो गैस बनती है और उसे खाने के बाद आपको काफी तकलीफ महसूस होती है। चलिए जानते है कुछ दालो से फार्ट की समस्या क्यों होती है और ये कौन सी दाल होती है।

क्यों हो जाती हैं इन्हें खाने के बाद गैस

इस बारे में ज्यादा जानने के लिए हमने बात की न्यूट्रिशनिस्ट और वेट लॉस एक्सपर्ट शिखा कुमारी से। शिखा कुमारी बताती है कि कुछ दालें अपने उच्च फाइबर और जटिल कार्बोहाइड्रेट सामग्री के कारण सूजन और गैस का कारण बन सकती हैं। दालों में जटिल कार्बोहाइड्रेट होते हैं जिन्हें ऑलिगोसैकेराइड्स कहा जाता है, जैसे रैफिनोज़ और स्टैच्योज़।

ये कार्बोहाइड्रेट मानव पाचन तंत्र द्वारा आसानी से नहीं टूटते हैं क्योंकि हमारे पास उन्हें पूरी तरह से पचाने के लिए आवश्यक एंजाइमों की कमी होती है। परिणामस्वरूप, जब ये ऑलिगोसेकेराइड बड़ी आंत में पहुंचते हैं, तो आंत के बैक्टीरिया उन्हें किण्वित करते हैं, जिससे गैस उत्पन्न होती है। इससे सूजन और पेट फूलने की समस्या हो सकती है।

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दालों को रात भर या पकाने से पहले कई घंटों तक भिगोने से गैस कम बनती है।

अत्यधिक पेट फूलना विभिन्न कारकों के कारण हो सकता है, जिसमें हमारे द्वारा खाए जाने वाले खाद्य पदार्थों के प्रकार भी शामिल हैं। जबकि हर किसी का पाचन तंत्र अलग होता है और कुछ खाद्य पदार्थों पर अलग-अलग प्रतिक्रिया हो सकती है, यहां पांच दालें हैं जो कुछ व्यक्तियों में गैस पैदा करने के लिए जानी जाती हैं।

मसूर दाल– मसूर दाल में जटिल कार्बोहाइड्रेट होते हैं, जिन्हें पचाना मुश्किल हो सकता है। जिससे गैस का उत्पादन बढ़ जाता है।

चना दाल– चने में फाइबर की मात्रा अधिक होती है और यह गैस और सूजन का कारण बन सकता है। खासकर अगर इसे ठीक से भिगोया और पकाया न गया हो।

राजमा– राजमा जटिल कार्बोहाइड्रेट और फाइबर से भरपूर होता है, जिससे पेट फूलने की समस्या हो सकती है।

उड़द दाल- उच्च फाइबर सामग्री के कारण काले चने को कुछ व्यक्तियों में गैस का कारण माना जाता है।

तूर दाल– अन्य फलियों के समान, तूर दाल में जटिल कार्बोहाइड्रेट होते हैं जिन्हें पचाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। जिसके परिणामस्वरूप गैस और सूजन हो सकती है।

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यहां जाने वो तरीके जिससे आप गैस बनने को कम कर सकते है। चित्र : शटरस्टॉक

क्या है फार्टिंग से बचाव के उपाय

इन दालों में अचछी मात्रा में काफी पोषक तत्व होते है इसलिए इन दालों का सेवन पूरी तरह से बंद करना कहीं से भी सही नहीं है। इसलिए अगर आपको भी इन दालों से सेवन से दिक्कत का सामना करना पड़ता है, तो इन दालों को खाने से पहले आपको ये उपाय जरूर अपनाने चाहिए।

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1 दालों को भिगोएं– दालों को रात भर या पकाने से पहले कई घंटों तक भिगोने से गैस पैदा करने वाले यौगिकों को कम करने में मदद मिल सकती है और उन्हें पचाना आसान हो जाता है।

2 अच्छी तरह धोएं और फिर पकाएं– पकाने से पहले दालों को अच्छी तरह धो लें और पाचनशक्ति बढ़ाने के लिए उन्हें अच्छी तरह पकाएं। यदि आप या आपका बच्चा दाल खाने के आदी नहीं हैं, तो पाचन तंत्र को अनुकूल बनाने के लिए उन्हें धीरे-धीरे आहार में शामिल करना फायदेमंद हो सकता है।

3 हिस्से के आकार का ध्यान रखें– एक बार में बड़ी मात्रा में दालों को खाने से गैस का अनुभव होने की संभावना बढ़ सकती है। छोटे भागों से शुरू करें और समय के साथ धीरे-धीरे उन्हें बढ़ाएं।

4 देर रात खाने से परहेज करें– रात में देर से खाना खाने से खाने को पचने में दिक्कत होती है और वो ठिक से पच नही पाता है जिसके कारण भी गैस होती है। अगर आप रात में राजमा या कोई गैस बनाने वाली दाल खाते है तो ये सुनिश्चित करें कि रात में जल्दी खाना खा लें।

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लेखक के बारे में

दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म ग्रेजुएट संध्या सिंह महिलाओं की सेहत, फिटनेस, ब्यूटी और जीवनशैली मुद्दों की अध्येता हैं। विभिन्न विशेषज्ञों और शोध संस्थानों से संपर्क कर वे  शोधपूर्ण-तथ्यात्मक सामग्री पाठकों के लिए मुहैया करवा रहीं हैं। संध्या बॉडी पॉजिटिविटी और महिला अधिकारों की समर्थक हैं। ...और पढ़ें

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