Stuttering Awareness Day : शब्दों का ज़रा सा अटकना भला सफलता कैसे रोक सकता है, जानिए हकलाने की स्थिति से कैसे डील करना है

हम सब अलग-अलग तरीके से बाेलते हैं। जबकि हमारे साथ के ही कुछ लोग कुछ शब्दों को बोलते हुए थोड़ा अटक जाते हैं और उन्हें स्पीच के लिए थोड़ी ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। पर यह जरा सा अटकना, न राह रोक सकता है और न ही कामयाबी।
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इंटरनेशनल स्टटरिंग अवेयरनेस डे ख़ास तरह के कम्युनिकेशन डिसऑर्डर के साथ रहने वाले दुनिया भर के लाखों लोगों के बारे में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास करता है। चित्र : अडोबी स्टॉक
स्मिता सिंह Updated: 29 Oct 2023, 08:32 pm IST
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हम सब कद, काठी, नैन नक्श में एक-दूसरे से अलग दिखते हैं। यही विविधता इस दुनिया को और सुंदर बनाती है। भाषा, बोली और बोलने के तरीके में भी हर व्यक्ति दूसरे से अलग है। कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो बात करते हुए हकलाते हैं। जिसकी वजह से वे सोशली मिक्स अप होने में और अपने आप को एक्सप्रेस करने में झिझकने लगते हैं। जिसका असर उनके व्यक्तित्व और मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ने लगता है। हेल्थ शॉट्स हमेशा से बॉडी पॉजीटिविटी और सेल्फ लव का समर्थन करता है। यानी हम जैसे हैं, उसी तरह अपने आप को प्यार करें और दूसरे हमें वैसा ही स्वीकार करें। जानते हैं कि इसे कैसे डील (How to deal with stuttering) किया जा सकता है।

पर्सनेलिटी डेवलपमेंट हो सकता है प्रभावित

कुछ लोग जन्म के साथ ही विकार के साथ पैदा होते हैं। ये विकार गंभीर हो सकते हैं और मामूली भी। ऐसा ही एक विकार है हकलाना या हकलाहट। हकलाने के विकार के कारण लोग दूसरे से मिलने से कतराने लगते हैं। इसके कारण उनका पर्सनेलिटी डेवलपमेंट भी सही तरीके से नहीं हो पाता है। सबसे बड़ी बात कि दूसरे लोग हकलाने वाले लोगों का मजाक उड़ाने लगते हैं। इसके कारण पीड़ित तनाव और अवसाद से भी ग्रस्त हो जाता है। हकलाहट किसी व्यक्ति का दोष नहीं बल्कि एक विकार (Health Disorder) है। जानते हैं यह रोग किस तरह होता है और इसका इलाज क्या है?

इंटरनेशनल स्टटरिंग अवेयरनेस डे (International Stuttering Awareness Day 2023-22 October)

इंटरनेशनल स्टटरिंग अवेयरनेस डे ख़ास तरह के कम्युनिकेशन डिसऑर्डर के साथ रहने वाले दुनिया भर के लाखों लोगों के बारे में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास करता है। हकलाहट के प्रति जागरूक करने के लिए 22 अक्टूबर को इंटरनेशनल स्टटरिंग अवेयरनेस डे (International Stuttering Awareness Day) मनाया जाता है।  दुनिया के लगभग एक प्रतिशत लोग इस विकार से पीड़ित हैं। इंटरनेशनल स्टटरिंग अवेयरनेस डे 2023 (The theme for International Stuttering Awareness Day 2023) की थीम है-एक साइज़ सभी के साथ फिट नहीं हो सकता (One Size Does NOT Fit All) है। इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए ही नीला या बैंगनी रिबन (Stuttering Awareness Ribbon) पहना जाता है। यह रिबन इस बात का सन्देश देता है कि इस स्टिग्मा को झेलने वाले लोग अपने अनुभव और कहानियां साझा करें, ताकि दूसरे लोग प्रेरणा ले सकें।

क्या है हकलाना (What is stuttering)

मनोचिकित्सक डॉ. ईशा सिंह बताती हैं, ‘हकलाना व्यक्ति की सहजता से बोलने की क्षमता को प्रभावित करती है। इसके कारण वे शब्दों, वाक्यों के कुछ हिस्सों या ध्वनियों को दोहरा देते हैं। जो व्यक्ति हकलाता है वह किसी एक शब्द या ध्वनि के उच्चारण को लंबा खींच देता है। बोलने में कठिनाई होने पर उनके चेहरे की मांसपेशियां तनावग्रस्त हो सकती हैं। हकलाना या स्टटरिंग वास्तव में एक नयूरोलोजिक्ल डिसऑर्डर है। इसलिए यह जरूरी है कि हम इसके बारे में और जानें। ताकि उन लोगों के साथ सौम्य हो सकें, जो इस डिसऑर्डर के शिकार हैं।

हकलाने के ज्यादातर मामले तब शुरू होते हैं जब बच्चे 2 से 6 साल के बीच के होते हैं। इस समय वे अपनी शब्दावली विकसित कर रहे होते हैं। लड़कियों की तुलना में लड़कों में हकलाने की संभावना अधिक होती है। आमतौर पर जब बच्चे स्कूल में प्रवेश करते हैं तब तक हकलाना बंद हो जाता है, लेकिन वयस्क भी हकला सकते हैं। वयस्कों में 1% से भी कम मामले पाए जा सकते हैं।’

हकलाने का क्या कारण है? (Cause of Stuttering)

हकलाने का अभी तक ठोस कारण पता नहीं चल पाया है। हकलाने का न्यूरोलॉजिकल आधार होता है, जो ब्रेन के उन क्षेत्रों को प्रभावित करता है जो स्पीच और लैंग्वेज को नियंत्रित करते हैं। डीएनए म्युटेशन भी हकलाने की वजह बन सकते हैं। यदि हकलाने की फैमिली हिस्ट्री है, इंटेलेक्चुअल डिसेबिलिटी है, स्पीच मोटर कंट्रोल में समस्याएं हैं, तो व्यक्ति हकला सकता है। मस्तिष्क की चोट या अन्य गंभीर चिकित्सीय स्थितियां, भावनात्मक और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं भी इसका कारण हो सकती हैं।

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हकलाने का न्यूरोलॉजिकल आधार होता है, जो ब्रेन के उन क्षेत्रों को प्रभावित करता है जो स्पीच और लैंग्वेज को नियंत्रित करते हैं। चित्र : अडोबी स्टॉक

क्या हकलाहट से बचाव किया जा सकता है? (Prevention from stuttering)

कोई नहीं जानता कि हकलाना क्यों होता है। इसलिए इसे रोकने या इससे बचने का कोई उपाय नहीं है। एक बार जब पता चले कि हकलाना बच्चे के लिए एक समस्या हो सकती है, तो इसे नज़रअंदाज़ न करें। जल्दी इंटरवेंशन से मदद मिल सकती है।

क्या इसका कोई उपचार है (Stuttering Treatment)?

डॉ. ईशा सिंह के अनुसार, यदि बच्चा हकलाता है, भले ही वह छोटा हो, तो तुरंत डॉक्टर से बात करें। जल्दी उपचार से हकलाने को जीवन भर की समस्या बनने से रोका जा सकता है। उपचार हकलाने की गंभीरता और फ्रीक्वेंसी पर निर्भर करती है। इलाज के लिए स्पीच थेरेपिस्ट के पास जाया जा सकता है। स्पीच थेरेपिस्ट के ट्रीटमेंट प्लान का पालन करना जरूरी है।

यहां जानिए इस स्थिति से कैसे डील करना है (How to deal with Stuttering)

1 स्टटरिंग एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है। इसलिए इससे ग्रसित लोग तब और ज्यादा हकलाने लगते हैं, जब वे दबाव में या तनाव में होते हैं। इसलिए अगर आप या आपके आसपास कोई व्यक्ति हकलाता है, तो सबसे ज्यादा जरूरी है कि माहौल को तनावमुक्त रखें।
2 अमूमन हकलाने का शिकार होने पर व्यक्ति बाहर निकलने में या सार्वजनिक संवाद में घबराने लगता है। जिससे वे एक तरह के सोशल फोबिया के शिकार हो जाते हैं। इससे बचना जरूरी है। अगर आपके परिवार में कोई बच्चा या वयस्क हकलाता है तो उसे सार्वजनिक संवाद के लिए प्रेरित करें।
3 घर और कार्यस्थल का वातावरण आरामदायक और तनावमुक्त बनाए रखना बहुत जरूरी है

बच्चे को बोलने के अवसर देना चाहिए

4 बच्चे को बोलने के कई अवसर देना चाहिए। हकलाने वाले बच्चे से हमेशा धीरे और आराम से बात करें। ताकि बच्चे को जल्दी बात करने का दबाव महसूस न हो।
5 अगर व्यक्ति हकलाता है तो उसकी बात पूरी होने की प्रतीक्षा करें, बोलते हुए बीच में न रोकें या समाप्त न करें

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हकलाने वाले बच्चे से हमेशा धीरे और आराम से बात करें। चित्र : अडोबी स्टाॅक

6 कभी भी बच्चे का मजाक नहीं उड़ायें। इससे उनका आत्मविश्वास हिल सकता है। उनके कहने का इंतज़ार करें कि वे क्या कहना चाहते हैं।
7 हकलाना सिर्फ एक स्पीच प्रोब्लम है, इसे किसी के व्यक्तित्व का हिस्सा न बनाएं और न ही बनने दें। व्यक्ति के अन्य गुणों पर ध्यान देकर उसे प्रेरित करें।

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स्वास्थ्य, सौंदर्य, रिलेशनशिप, साहित्य और अध्यात्म संबंधी मुद्दों पर शोध परक पत्रकारिता का अनुभव। महिलाओं और बच्चों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करना और नए नजरिए से उन पर काम करना, यही लक्ष्य है। ...और पढ़ें

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