क्या मेनोपॉज के बाद बढ़ जाता है महिलाओं का कोलेस्ट्रॉल लेवल? जानिए इसे कैसे कंट्राेल करना है

क्या मेनोपॉज और कोलेस्ट्रॉल लेवल एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। एक्सपर्ट बता रहे हैं, किस तरह मेनोपॉज बन सकता है आपके बैड कोलेस्ट्रॉल लेवल के बढ़ने का कारण।

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जानिए कैसे कम किया जाए कोलेस्ट्रॉल, चित्र: शटरस्टॉक
टीम हेल्‍थ शॉट्स Published on: 17 August 2022, 21:09 pm IST
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मेनोपॉज के बाद हृदय रोग (CVD) महिलाओं में मृत्यु का एक प्रमुख कारण बनता जा रहा है। वहीं ब्रेस्ट कैंसर सहित अन्य कारणों की तुलना में हृदय रोग और स्ट्रोक से अधिक महिलाओं की मृत्यु देखने को मिली। वहीं इस समस्या को गंभीरता से लेने की जगह, इसे अक्सर कम करके आंका जाता है। साथ ही पुरुषों की तुलना में महिलाओं को किसी भी हस्तक्षेप की संभावना कम होती है।

कार्डियो वैस्कुलर डिजीज को परंपरागत रूप से मध्यम आयु वर्ग के पुरुषों के लिए एक बड़ी समस्या के रूप में जाना जाता है। वास्तव में, यह पुरुषों के साथ महिलाओं को भी उतना ही प्रभावित करता है। इसपर समय रहते ध्यान देना बहुत जरूरी है, क्योंकि इस देरी को मेनोपॉज से पहले के वर्षों में एस्ट्रोजन के सुरक्षात्मक प्रभावों के लिए जरूरी माना जाता है। आइए, हम समझते हैं कि मेनोपॉज और कोलेस्ट्रॉल के स्तर के बीच क्या संबंध है।

पहले जानें मेनोपॉज के बारे में

मेनोपॉज लाइफ का एक पार्ट है जहां पर मेंस्ट्रूअल पीरियड की समाप्ति होती है। जैसे-जैसे एस्ट्रोजन लेवल गिरता जाता है, वैसे ही प्रोटेक्टिंग इफेक्ट भी कम होते जाते हैं। जिसके कारण हार्ट से जुड़ी समस्याएं उत्पन्न होने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है।

अब जानते हैं कोलेस्ट्रॉल के बारे में

कोलेस्ट्रॉल वैक्स जैसे दिखने वाला फैट है, जिसका उत्पादन हमारी बॉडी करती है। इसे दो हिस्सों में बांटा गया है –

लो डेंसिटी लिपॉप्रोटीन (LDL) कोलेस्ट्रॉल : एलडीएल को खराब कोलेस्ट्रॉल के रूप में संदर्भित किया जाता है। यह ब्लड वेसल्स के वाल्स में बनते हैं, वहीं इनके संकीर्ण होने पर चेस्ट पेन जैसी गंभीर समस्या देखने को मिल सकती है।

हाई डेंसिटी लिपॉप्रोटीन (HDL) कोलेस्ट्रॉल : एचडीएल को गुड कोलेस्ट्रॉल की तौर पर माना जाता है। यह सेहत के लिए जरूरी होते हैं और इससे हार्ट डिजीज होने और स्ट्रोक आने की संभावना भी बहुत कम होती है।

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कोलेस्‍ट्रॉल लेवल को कंट्राेल करना है जरुरी। चित्र: शटरस्‍टॉक

यहां जानें मेनोपॉज और कोलेस्ट्रॉल के बीच का संबंध

मेनोपॉज कभी न कभी सभी महिलाओं को प्रभावित करती है। इसका समय महिलाओं के जेनेटिक्स, उम्र, न्यूट्रीशन और स्मोकिंग पर निर्भर करता है।

मेंनोपॉज के कई साल पहले से ही एस्ट्रोजन के स्तर में गिरावट होने लगता है। एस्ट्रोजन की कमी स्वास्थ्य से जुड़ी कई सारी समस्याओं का कारण बन सकती है। इसके साथ ही मेनोपॉज के लक्षण जैसे कि हॉट फल्स को लेकर जानकारी होना जरूरी है। हालांकि, कार्डियो वैस्कुलर सिस्टम पर मेनोपॉज का प्रभाव बहुत लंबे समय के लिए नहीं रहता।

असल में मेनोपॉज के दौरान हार्मोन के स्तर में बदलाव आने से शरीर में कई तरह के बदलाव देखने को मिल सकती हैं। एलडीएल कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ते ही एस्ट्रोजन हार्मोन में गिरावट देखने को मिलती है।

स्टडीज के माने तो सेक्स हार्मोन जैसे कि एस्ट्रोजन मेनोपॉज के पहले हार्ट डिजीज के प्रभाव को कम करते हैं।

स्टडी के अनुसार अन्य महिलाओं की तुलना में मेनोपॉज के प्रारंभिक अवस्था में कुल कोलेस्ट्रॉल, एलडीएल कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर लोगों में बहुत अधिक पाया गया।

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मेनोपॉज को संभालना है जरुरी। चित्र: शटरस्‍टॉक

जानिए आप कैसे मेनोपॉज के बाद भी अपने कोलेस्ट्रॉल लेवल को कंट्रोल रख सकती हैं

मेनोपॉज के दौरान, इससे पहले और जीवन में किसी भी समय कोलेस्ट्रॉल लेवल को नियंत्रित किया जा सकता है।

कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने के लिए उचित दवाइयां लेने के अलावा, एक स्वस्थ जीवन शैली भी काफी ज्यादा महत्व रखती है। कोलेस्ट्रॉल लेवल को संतुलित रखना बहुत जरूरी है, यह हृदय से जुड़ी समस्याओं का एक प्रमुख कारण बन सकता है।

1. डाइट

कुछ खाद्य पदार्थ कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं। कुछ खाद्य पदार्थ जैसे कि पादप खाद्य पदार्थों में मौजूद पादप स्टेरोल शरीर में कोलेस्ट्रॉल को अवशोषित होने से रोकते हैं। वहीं शेलफिश, लीन रेड मीट, सार्डिनेस, फिश और अन्य ओमेगा 3 फैटी एसिड से भरपूर खाद्य पदार्थ हेल्दी कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ावा देते हैं।

इस समस्या से बचने के लिए सभी व्यक्ति को अपने आहार में पर्याप्त मात्रा में ओमेगा 3 फैटी एसिड लेनी चाहिए। ट्रांस फैट और सैचुरेटेड फैट से युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन एलडीएल कोलेस्ट्रॉल लेवल को बढ़ाता है। सभी को इन फैट्स के सेवन से जितना हो सके उतना परहेज करना चाहिए, खासकर यदि वह मेंनोपॉज की स्थिति में हैं।

2. जीवन शैली

एक स्वस्थ जीवन शैली नियमित व्यायाम के बिना अधूरी है। शारीरिक रूप से सक्रिय रहना भी कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करता है। विशेषज्ञ की माने तो हर हफ्ते कम से कम 150 मिनट की मध्यम-तीव्रता वाली एरोबिक गतिविधि कोलेस्ट्रॉल लेवल को संतुलित रख सकती है। वहीं धूम्रपान करने वालों को कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए स्मोकिंग कम करने पर ध्यान देना काफी जरूरी है।

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हेल्दी कोलेस्ट्रॉल लेवल को बनाये रखने के लिए स्वस्थ वजन बनाए रखना बहुत जरूरी है।चित्र:शटरस्टॉक

3. वजन

हेल्दी कोलेस्ट्रॉल लेवल को बनाये रखने के लिए स्वस्थ वजन बनाए रखना बहुत जरूरी है। अधिक वजन या मोटापा शरीर में एलडीएल कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाता है।

यह भी ध्यान रखें

मेनोपॉज और मेनोपॉज के बाद महिलाओं के शरीर में एलडीएल कोलेस्ट्रॉल कस्टर्ड बढ़ने लगता है। वहीं मेनोपॉज के दौरान बॉडी में घटते एस्ट्रोजन हार्मोन भी इसका एक कारण हो सकते हैं।

एस्ट्रोजन हार्मोन लीवर से कोलेस्ट्रॉल लेवल को रेगुलेट करने में मदद करते हैं। कोलेस्ट्रोल का बढ़ता स्तर किसी तरह के दिखाई देने वाले लक्षण के साथ सामने नहीं आता, परंतु यह कई तरह की गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं जैसे हार्ट डिजीज और हार्ट अटैक का कारण बन सकता है।

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