ज्यादा नींद आना भी है चिंता का विषय, जानें इसे भगाने के कुछ सुपर इफेक्टिव तरीके

जब आप जरूरत से ज्यादा सोती हैं, तो इससे न केवल आपका डेली रुटीन प्रभावित होता है, बल्कि और भी कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए इसे कंट्रोल करना जरूरी है।

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जब आप ठीक से सो नहीं पातीं, तब उसका असर आपकी आंखों पर भी पड़ता है। चित्र: शटरस्टॉक
निशा कपूर Published on: 20 August 2022, 21:00 pm IST
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अच्छी सेहत के लिए पर्याप्त मात्रा में नींद लेना बेहद जरूरी होती है, लेकिन जब यही नींद अत्यधिक मात्रा में व्यक्ति लेने लगे तो यह बीमारी की वजह बन सकती है। स्वस्थ शरीर और दिमाग के लिए हर दिन 7 से 8 घंटे की नींद लेना पर्याप्त माना जाता है। वहीं, कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्हें हर समय नींद आती रहती है। इससे न सिर्फ उनके अगले दिन की कार्यप्रणाली बुरी तरह से प्रभावित होती है, बल्कि स्वास्थ्य पर भी इसका काफी बुरा प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए जरूरी है कि इसे समय रहते कंट्रोल किया जाए। यहां जानिए ज्यादा नींद को कंट्रोल करने के कुछ सुपरइ फेक्टिव (how to stop oversleeping) टिप्स।

स्वस्थ शरीर को कितनी नींद की जरूरत होती है?

कई रिसर्च में इस बात का जिक्र पाया जाता है कि उम्र के मुताबिक हर किसी की नींद की जरूरत अलग होती है। नेशनल स्लीप फाउंडेशन के अनुसार, किस उम्र के हिसाब से किसे कितनी नींद की आवश्यकता होती है।

उम्र आवश्यक नींद

0-3 महीने                     14 से17 घंटे
4-11 महीने                    12 से 15 घंटे
1-2 साल                        11 से 14 घंटे
3-5 साल                        10 से 13 घंटे
6-13 साल                       9 से 11 घंटे
14-17 साल                     8 से 10 घंटे
18-64 साल                     7 से 9 घंटे
65 साल से अधिक            7 से 8 घंटे

क्या हो सकती हैं अधिक नींद आने की वजह

रात के वक़्त पर्याप्त नींद न लेना: नाइट शिफ्ट में काम करना, देर रात तक टीवी देखना या पढ़ना आदि की वजह से हाइपरसोमनिया यानी अधिक नींद की परेशानी हो सकती है।

मौसम की वजह से: सर्दी के मौसम में ठंड लगने की वजह से रात को नींद बार-बार टूट सकती है। इसी तरह गर्मी के मौसम में भी हो सकता है। रात को सोते वक़्त गहरी नींद न आने की वजह से दिन में नींद आने की परेशानी हो सकती है।

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जरूरत से ज्यादा नींद आना भी है एक बीमारी। चित्र : शटरस्टॉक

चिंता या तनाव: कुछ लोगों को तनाव की वजह से रात को ठीक से नींद नहीं आती है। इस कारण से दिन के वक़्त अधिक नींद आने की परेशानी हो सकती है। बता दें कि स्वस्थ नींद के लिए रात की नींद बेहद आवश्यक है।

दवाओं का सेवन: एलर्जी व नींद की दवा लेने से स्लीप पैटर्न प्रभावित हो सकता है। दवाओं का सेवन भी नींद अधिक आने की एक वजह हो सकती है।

अल्कोहल का सेवन: अधिक नींद आने की एक वजह शराब का सेवन भी हो सकता है।

कैफीन युक्त ड्रिंक्स: जो लोग चाय या कॉफी का सेवन करते हैं उनकी स्लीप साइकिल प्रभावित हो सकती है। इससे भी अधिक नींद आने की परेशानी हो सकती है।

किसी गंभीर बीमारी का होना: नॉकटर्नल अस्थमा, हाइपोथायराइड, एसोफेगल रिफ्लक्स आदि हाइपरसोमनिया की वजह हो सकते हैं।

स्लीप डिसऑर्डर: रेस्टलेस लेग सिंड्रोम, स्लीप एपनिया, नींद में चलना, तनाव आदि नींद को खराब करने के साथ इस स्थिति की वजह बन सकते हैं।

अधिक नींद आने के भी हैं कुछ अलग प्रकार

1. नैरोकोलेप्सी टाइप-1: नार्कोलेप्सी टाइप-1 एक प्रकार का स्लीप डिसऑर्डर हैं, जो नींद के पैटर्न को प्रभावित करता है। इससे पीड़ित व्यक्ति को पूरी रात पर्याप्त नींद लेने के बाद भी दिन में अत्यधिक नींद आने की परेशानी हो सकती है। यह समस्या मस्तिष्क में मौजूद हाइपोथैलेमिक हाइपोकैट्रिन न्यूरॉन्स के कम होने की वजह से और कैटाप्लेक्सी के कारण हो सकती है।

2. नैरोकोलेप्सी टाइप-2: यह भी हाइपरसोमनिया का ही एक प्रकार है, जो आमतौर पर किशोरों में देखने को मिलता है। नैरोकोलेप्सी टाइप-1 की तरह इसमें भी व्यक्ति हर वक़्त नींद आने की शिकायत से ग्रस्त हो सकता है। बस इसमें कैटाप्लैक्सी की परेशानी नहीं होती है। इसी वजह से इसे नैरोकोलेप्सी टाइप-1 का पहला चरण भी माना जा सकता है। इससे ग्रसित लोग दिन के वक़्त में कुछ देर की नींद लेकर खुद को तरो ताजा महसूस कर सकते हैं।

3. आइडियोपैथिक हाइपरसोमनिया: आइडियोपैथिक हाइपरसोमनिया से ग्रसित लोगों को भी रात में पर्याप्त नींद लेने के बावजूद दिन भर नींद आती है। इसमें व्यक्ति का अपनी स्लीप साइकिल पर बिलकुल भी कंट्रोल नहीं रहता है। नैरोकोलेप्सी से ग्रसित लोगों की तुलना में इससे पीड़ित व्यक्ति दिन में सोने के बावजूद भी तरोताजा महसूस नहीं कर पाते हैं।

4. क्लेन-लेविन सिंड्रोम: यह भी हाइपरसोमनिया का एक प्रकार है, जो दुर्लभ है। मुख्य रूप से यह रोग किशोर पुरुषों को प्रभावित कर सकता है। इससे पीड़ित व्यक्ति लगातार 20 घंटों तक भी सो सकते हैं, जो सिर्फ भोजन करने के लिए जागते हैं और फिर से सो जाते हैं। यह स्थिति कुछ हफ्तों या महीनों तक परेशान कर सकती है। इसके पीछे संज्ञानात्मक, व्यवहारिक और मानसिक स्थितियों से जुड़ी गड़बड़ी को मुख्य वजह माना जा सकता है।

ज्यादा नींद को भगाने के कुछ सुपर इफेक्टिव तरीके

1. कॉफी: नींद भगाने के लिए कॉफी एक बेहतर विकल्प हो सकता है। NCBI (National Center for Biotechnology Information) की वेबसाइट पर मौजूद एक रिसर्च के अनुसार, कॉफी में कैफीन की मात्रा पाई जाती है। कैफीन का सेवन सीधे मस्तिष्क प्रणाली पर प्रभाव डालता है। यह दिमाग और तंत्रिका प्रणाली की एक्टिविटी बढ़ाने के लिए जाना जाता है। यह रिफ्रेश करने के साथ नींद को दूर करने में मदद कर सकता है।

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नींद गायब करने में भी कारगर है कॉफी। चित्र : शटरस्टॉक

2. पानी: रिसर्च के अनुसार, पानी कम पीने से शरीर में थकान और किसी काम में ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होने के साथ हर वक़्त नींद आने की परेशानी हो सकती है। ऐसे में दिनभर में पर्याप्त पानी पीना लाभकारी साबित हो सकता है।

3. एक्सरसाइज: हाइपरसोमनिया की एक वजह मोटापा है। ऐसे में हाइपरसोमनिया से पीड़ित व्यक्ति प्रतिदिन आधे से एक घंटे तक किसी भी प्रकार की एक्सरसाइज कर सकते हैं। इससे वजन को नियंत्रित रखने के साथ व्यक्ति तरोताजा भी महसूस कर सकता है।

4. शॉवर: जब शरीर में थकान महसूस होती है, तो नींद आने लगती है। ऐसे में शॉवर लेना फायदेमंद हो सकता है। नहाने से मूड रिफ्रेश होता है, जो नींद को भगाने में मददगार हो सकता है। इस प्रकार शॉवर लेने से बहुत अधिक नींद आने के कारण होने वाली थकान से कुछ हद तक राहत मिल सकती है।

5. झपकी लेना: नींद आने पर एक छोटी सी झपकी लेना भी नींद से दूर रखने में सहायक हो सकता है। असल में, एक छोटी झपकी सुस्ती और उनींदापन को दूर करने के साथ नींद को दूर करने में मददगार हो सकती है। रिसर्च की माने तो एक छोटी झपकी मेमोरी को तेज करने के साथ बेहतर कार्य क्षमता जैसे फायदे प्रदान कर सकती है।

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लेखक के बारे में
निशा कपूर निशा कपूर

देसी फूड, देसी स्टाइल, प्रोग्रेसिव सोच, खूब घूमना और सफर में कुछ अच्छी किताबें पढ़ना, यही है निशा का स्वैग।

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