क्‍या योग और व्‍यायाम से आंखों की रोशनी बेहतर होती है? एक्सपर्ट दे रही हैं सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले इस सवाल का जवाब

योग एवं व्यायाम पूरे शरीर के ब्लड सर्कुलेशन में सुधार करता है। जिसका असर आपकी आंखों के स्वास्थ्य पर भी महसूस किया जा सकता है।
योग आपके समग्र स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। चित्र: शटरस्टॉक
योगिता यादव Published on: 24 April 2022, 18:00 pm IST
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योग स्वस्थ दिनचर्या का हिस्सा है। यह आपको तन और मन दोनों से स्वस्थ रहने में मदद करता है।यह माइंड, बॉडी और थॉट्स को एक साथ लाने का वैज्ञानिक तरीका है। इसमें सिर्फ मुद्राएं (Yoga poses) ही नहीं है, बल्कि इसमें प्राणायाम (Pranayama yoga) के माध्यम से श्वास तकनीक (Breathing techniques) को भी समायाेजित किया गया है। ताकि आप मेंटली रिलैक्स हो सकें। क्योंकि मस्तिष्क ही आपकी बॉडी का ओवरऑल हेड है। यही से शरीर का सारा तंत्र संचालित होता है। यकीनन आंखों का भी। तब क्या आंखों की रोशनी बढ़ाने में भी योग और प्राणायाम (Yoga for eyesight) मददगार साबित हो सकते हैं? इसे जानने के लिए हमने एक नेत्र रोग विशेषज्ञ से संपर्क किया। जानते हैं वे इस बारे में क्या सुझाव दे रहीं हैं।

बढ़े हुए स्क्रीन टाइम से कमजोर हुई है नज़र 

रसोई का सामान खरीदने से लेकर बच्चों की क्लास और हमारी नौकरी तक सब एक ही स्क्रीन पर केंद्रित हो गया है। महामारी और लॉकडाउन में हमने सबसे ज्यादा समय अपने गैजेट्स की स्क्रीन पर बिताया। अब जब हम फिर से पुराने रुटीन में लौट रहे हैं, तब हम महसूस करने लगे हैं कि हमारे चश्मों के नंबर बढ़ गए हैं। इसके अलावा आंखों में जलन, सूखापन, बेवजह पानी आना और जल्दी थक जाना जैसी समस्याएं भी महसूस होने लगी हैं। जो दो साल पहले तक इतनी ज्यादा नहीं होती थीं।

लॉकडाउन में स्क्रीन टाइम बढ़ने से आंखें कमजोर हुई हैं। चित्र : शटरस्टॉक

यकीनन आंखों में होनी वाली किसी भी समस्या में घरेलू उपचार की बजाए डॉक्टर से मदद लेना ज्यादा बेहतर होगा। इसलिए हमने आंखों के स्वास्थ्य पर योग और व्यायाम के प्रभाव के बारे में जानने के लिए फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम में नेत्र विज्ञान विभाग की निदेशक डॉ अनीता सेठी से बात की। वे आंखों के स्वास्थ्य (Eye health) और आंखों की रोशनी के लिए योग (Yoga for eyesight) के बारे में महत्वपूर्ण सुझाव दे रहीं हैं।

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इन दोनों का कोई सीधा कनैक्शन नहीं है 

डॉ अनीता सेठी कहती हैं, “योग और व्‍यायाम का नेत्र ज्‍योति में सुधार से कोई सीधा संबंध नहीं है। लेकिन यह भी सच है कि योग तथा व्‍यायाम से आंखों और नेत्र ज्‍योति पर लाभकारी प्रभाव पड़ता है। व्‍यायाम से शरीर में रक्‍त प्रवाह में सुधार होता है और इससे आंखों को रक्‍त प्रवाह बेहतर होता है।”

इसी तरह, योग से, खासतौर से प्राणायाम से ऑक्‍सीजन सप्‍लाई में सुधार होता है। इसके परिणामस्‍वरूप आंखों पर दबाव घटता है और शुष्‍कता में भी कमी आती है। सैर करने, दौड़ने, साइकिल चलाने जैसी निय‍मित शारीरिक गतिविधियां अब कोविड काल में पहले से भी ज्‍यदा महत्‍वपूर्ण हो गई हैं। वर्क फ्रॉम होम तथा ऑनलाइन क्‍लासेज़ के चलते लोगों की दैनिक गतिविधियों में कमी आयी है, स्‍क्रीन टाइम बढ़ गया है जिससे डिजिटल स्‍ट्रेन ज्‍यादा होने लगा है।”

ब्लिंकिंग एक्सरसाइज हो सकती है एजिंग पेरेंट्स के लिए फायदेमंद 

वे सुझाव देती हैं, “आंखों का व्‍यायाम तभी लाभकारी होता है, जब आप कन्‍वर्जेंस इनसफिशियेंसी से पीड़‍ित होते हैं। ऐेसे मामलों में कन्‍वर्जेंस एक्‍सरसाइज़ से लाभ मिलता है। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि बुजुर्गों की पलकों के टिश्‍यूज़ में कमजोरी की वजह से उनकी आंखों से पानी बहने लगता है और उन्‍हें ब्लिंकिंग एक्‍सरसाइज़ से फायदा होता है, जिससे पलकों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं।”

बच्चों की आंखों की रोशनी तेज़ करने में मदद करेंगे ये उपाय 

शरीर को चुस्‍त-दुरुस्‍त रखने के लिए नियमित व्‍यायाम करना महत्‍वपूर्ण होता है, और खासतौर से बढ़ती उम्र के बच्‍चों के लिए यह खासतौर से उपयोगी होता है। आंखों पर दबाव और थकान बढ़ने से, पहले से कमजोर बच्‍चों में बार-बार चश्‍मे का नंबर बढ़ने की शिकायत देखी गई है। इसलिए, विशेषकर बच्‍चों के लिए इन निर्देशों का पालन करना जरूरी है ताकि आंखों पर दबाव कम पड़े, ये हैं –

ध्यान रखें कि बच्चा नेचुरल लाइट में ज्यादा समय बिताए। चित्र : शटरस्टॉक
  1. सही नंबर वाला चश्‍मा पहनें
  2. स्‍क्रीन टाइम को सीमित करें।
  3. पढ़ते हुए तथा डिजिटल डिवाइसों का इस्‍तेमाल करते समय अपने बैठने की मुद्रा और रोशनी का ध्‍यान रखें।
  4. संत‍ुलित एवं पोषक खुराक का सेवन करें।
  5. कृत्रिम लाइट की तुलना में प्राकृतिक रोशनी में ज्यादा रहने का प्रयास करें।
  6. आंखों पर किसी तरह के केमिकल के इस्तेमाल से बचें।
  7. बच्चों को अपनी आंखों की हाइजीन का ख्याल रखना सिखाएं। ये ओरल हाइजीन की तरह ही डेली रुटीन का हिस्सा होना चाहिए।

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लेखक के बारे में
योगिता यादव

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