हाथ-पैरों में दर्द और थकावट की वजह कहीं ब्लड सर्कुलेशन में बाधा तो नहीं? एक्सपर्ट बता रहे हैं इसे दुरुस्त करने के उपाय

कभी भी शरीर के किसी भी अंग में अचानक होने वाले दर्द और थकावट की वजह ब्लड सर्कुलेशन में बाधा हो सकती है। सिर्फ इतना ही नहीं यह आपकी हार्ट हेल्थ को भी प्रभावित कर सकता है।
शरीर में ब्लड सर्कुलेशन का सही रहना आपको बहुत सारी समस्याओं से बचा सकता है। चित्र: शटरस्टॉक
Dr Himanshu Verma Published on: 11 October 2021, 19:45 pm IST
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रक्त परिसंचरण हमारे पूरे शरीर की जान है। कोई भी वह अंग बेकार हो सकता है, जहां रक्त प्रवाह में बाधा उत्पन्न हो जाए। हालांकि यह एकदम से नहीं होता। शरीर के किसी भी हिस्से में रक्त प्रवाह में रुकावट थकावट और दर्द के रूप में संकेत देती है। इसलिए जरूरी है कि आप इन छोटे-छोटे संकेतों को पहचानें और शरीर में रक्त प्रवाह को सुचारू बनाए रखने में मदद करें। एक्सपर्ट बता रहे हैं प्राकृतिक तरीकों से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन दुरूस्त करने के उपाय।

रक्त परिसंचरण और आपका शरीर 

हमारे शरीर में रक्त परिसंचरण में तीन अलग-अलग अंग महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। इनमें पहला है हृदय, जो शरीर के विभिन्न भागों में ऑक्सीजन युक्त रक्त पंप करता है। दूसरा, धमनियां, जो हृदय से विभिन्न अंगों में रक्त पहुंचाती हैं, और तीसरा अंग है शिरा, जो विभिन्न अंगों से ऑक्सीजन रहित रक्त एकत्र करती हैं और इसे वापस हृदय की ओर भेजती हैं।

आपके शरीर में रक्त प्रवाह को दुरुस्त बनाए रखने के लिए इन तीनों ही अंगों का सही तरीके से काम करते रहना जरूरी है।

यदि इनमें से एक भी अंग बीमार हुआ तो शरीर में रक्त परिसंचरण में बाधा पहुंचती है। जिससे आपको कई तरह के स्वास्थ्य जोखिम उठाने पड़ सकते हैं। तो आइए जानते हैं उन उपायों के बारे में जो शरीर में बेहतर रक्त परिसंचरण (Blood Circulation) सुनिश्चित कर सकते हैं।

यहां हैं शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाए रखने के उपाय 

1 वजन पर नियंत्रण 

मोटापा हृदय, धमनियों और नसों (शिरा) को बुरी तरह प्रभावित करता है। स्वस्थ बीएमआई दायरे में वजन बनाए रखने से रक्त परिसंचरण को ठीक रखने में मदद मिलती है। यह अन्य सभी कारकों को सुधारने में भी मदद करता है, जो सामान्य रूप से आपके स्वास्थ्य को लाभ पहुंचाते हैं।

तनाव और ज्यादा वजन ब्लड सर्कुलेशन में बाधा उत्पन्न कर सकता है। चित्र: शटरस्टॉक

2 तनाव कम करना 

तनाव नए तरह का धूम्रपान है। लगातार काम के दबाव के साथ तनावपूर्ण जीवनशैली, वर्षों से देर तक स्क्रीन देखने और रिलेशनशिप-पारिवारिक दबाव तनाव के कारक हो सकते हैं। ये रक्त वाहिकाओं में रुकावट के विकास के लिए उत्प्रेरक के रूप में कार्य करते हैं।

अपने लिए नियमित तौर पर समय निकालने से आपको इस समस्या से निपटने में मदद मिल सकती है। यदि आवश्यक हो, तो किसी मनोवैज्ञानिक या मनोविश्लेषक की सहायता ली जा सकती है।

3 नशा-मुक्ति 

व्यक्ति जिसका आदी है, उस पदार्थ के प्रत्यक्ष नुकसान (उदाहरण के लिए धूम्रपान रक्त वाहिका अवरोध और कैंसर का कारण बनता है; शराब लिवर की क्षति का कारण बनता है) के अलावा किसी भी पदार्थ की आदत या लत से शरीर में वास्तविक हार्मोनल परिवर्तन होते हैं। जो हृदय और रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करता है।

यह विभिन्न लक्षणों की धारणा को भी नाटकीय रूप से बदल सकता है, क्योंकि यह व्यक्ति के मनोवैज्ञानिक व्यवहार को प्रभावित करता है। अपने परिवेश, परिवार, दोस्तों और प्रकृति के लिए प्रतिदिन कुछ समय निकालना व्यसन से दूर रहने का सबसे आसान तरीका है।

4 सक्रिय रहें 

नियमित व्यायाम हृदय और रक्त वाहिकाओं को स्वस्थ रखता है। यह जानना दिलचस्प होगा कि न केवल निवारक के रूप में, बल्कि ब्लॉकेज के बाद भी – निगरानी में व्यायाम करना कार्डियोवैस्कुलर स्वास्थ्य के उपचार के मुख्य आधार में से एक है।

5 स्वस्थ खाएं 

लोगों को प्रोटीन, वसा और कार्ब्स युक्त संतुलित आहार लेना चाहिए। जब स्वस्थ भोजन की बात आती है तो प्रोटीन की मात्रा सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। अगर कम खाया जाए, यहां तक कि पिज्जा भी, तो अच्छा है। मगर अधिक मात्रा में खाया जाए – तो साधारण रोटी भी हानिकारक हो सकती है।

याद रखने वाली महत्वपूर्ण बात यह है कि कोई “वंडर फ़ूड” या “वंडर पिल” नहीं है, जो आपके स्वास्थ्य को बेहतर बना सके। भोजन के रूप में कुल कैलोरी की संतुलित मात्रा लेने और व्यायाम के रूप में कैलोरी बर्न करना आपको स्वस्थ रखेगा।

हार्ट हेल्थ चैकअप करवाते रहना भी जरूरी है। चित्र: शटरस्टॉक

6 कार्डियोवैस्कुलर रोगों की जांच 

तमाम प्रयासों के बावजूद कुछ कारक हैं जो अपरिहार्य तौर पर वैस्कुलर हेल्थ पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। उम्र बढ़ने और लंबे समय से चली आ रही मधुमेह उनमें से एक है। 55 से ऊपर के किसी भी व्यक्ति को हृदय रोग विशेषज्ञ द्वारा अपने रक्‍त संचरण की जांच करानी चाहिए।

मूल्यांकन करवाना चाहिए। मधुमेह रोगियों को भी हृदय और रक्त वाहिकाओं की नियमित जांच करवानी चाहिए। इससे ब्लॉकेज का जल्द पता लगाया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर समय पर उचित इलाज भी शुरू किया जा सकता है।

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लेखक के बारे में
Dr Himanshu Verma

Dr Himanshu Verma is Senior Consultant, Vascular and Endo Vascular Surgery, Fortis Memorial Research Institute, Gurugram

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