खुद ही बनी खुद की हिम्मत, ये है ब्रेस्ट कैंसर विजेता अमृता बेरा की कहानी

एक अच्छा रुटीन, सही खानपान और व्यायाम तो जरूरी है ही। पर कैंसर से जूझते हुए सबसे ज्यादा काम आती है अपनी इच्छा शक्ति। जिसके बल पर अमृता ने स्तन कैंसर से मुकाबला किया।
कैंसर सर्वाइवर अमृता बेरा की कहानी। चित्र : Amrita Bera
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जब आप सोचते हैं, जिंदगी अपने ढर्रे पर चल रही है… और मन ही मन ये मानने लगते हैं कि मेरी लाइफ स्टेबल है, तभी आपके साथ कुछ ऐसा घटित होता है कि आप सोचने पर मजबूर हो जाएं कि मेरे साथ ही ऐसा क्यूं हुआ? मैंने क्या किया था? और तब लगता है कि वाकई जिंदगी का दूसरा नाम संघर्ष है।

कुछ ऐसा ही मोड़ जिंदगी ने अमृता बेरा के साथ भी लिया। जब उन्हें लगा सब परफेक्ट है, तभी जिंदगी ने उन्हें ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) नाम का झटका दिया। यह पीड़ा वही जान सकता है, जो इस व्यथा से गुजरा हो। जहां जिंदगी आपकी हर कदम पर शारीरिक और मानसिक रूप से परीक्षा लेती है। और हर चुभती हुई सुई के साथ आपको ये लगता है कि आप मौत के और करीब जा रहे हैं।

पर जिंदगी अगर संघर्ष का दूसरा नाम है, तो इसमें जीत हौंसलों की ही होती है। आइए जानते हैं हौंसले की ऐसी ही एक कहानी अमृता बेरा की जुबानी।

योगाभ्यास का वह दिन

अभिरुचि और पेशे से साहित्यकार, मधुर गायिका अमृता बेरा अपनी छोटी सी दुनिया में बहुत खुश थीं। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक, नियमित योगाभ्यास करने वाली और खानपान के प्रति बेहद सावधान रहने वाली अमृता अपनी जिन्दगी आराम से जी रहीं थीं, कि एक दिन उन्हें योगाभ्यास करते समय ब्रेस्ट में दर्द का आभास हुआ।

ऐसा दो तीन दिन लगातार होने से उन्होंने तुरन्त अपनी गायनेकोलॉजिस्ट को दिखाया। शुरूआती टेस्ट में कुछ निकला नहीं, पर क्यूंकि उन्हें तकलीफ थी, इसलिए उनकी डॉक्टर नें उन्हें एम.आर .आई (MRI) कराने की सलाह दी, जिसमें एक छोटी गांठ का पता चला।

अमृता बताती हैं, ”जिस समय ये सब हुआ, मेरे पति किसी शादी में बाहर थे। मैंने उन्हें बताना उचित नहीं समझा और अकेले ही सारे टेस्ट करवाए। ऑन्कोलॉजिस्ट (Oncologist) के पास केस रेफर होने के बाद अब यह पुख्ता हो गया था कि उन्हें ब्रेस्ट कैंसर है। मगर यह काफी अर्ली स्टेज (Early Stage) पर था।”

वे बताती हैं कि ”मुझे पहले सी ही ब्रेस्ट कैंसर और इससे जुड़ी सेल्फ टेस्टिंग के बारे में ज्ञान था। मैं हर साल अपने रेगुलर चेकअप में मेमोग्राफी (Mammography) भी करवाती थी। मगर इतनी स्वस्थ जीवनशैली होने की वजह से मुझे नहीं लगा कि मुझे भी कैंसर हो सकता है।”

झड़ते बालों को बनाया स्टाइल स्टेटमेंट. चित्र : Amrita Bera

कुछ इस तरह शुरू हुई कैंसर से जंग की प्रक्रिया

उन्होनें बताया कि ”मैंने अपने पति को इसकी जानकारी तभी दी जब ऑपरेशन का समय था। क्योंकि मैं चाहती थी कि मेरे पति की काउंसलिंग (Counselling) खुद डॉक्टर करें। इसलिए जब शादी समारोह के बाद वे लौटे तो मैंने उन्हें कहा कि बस थोड़ी तबियत ठीक नहीं लग रही है, टेस्ट रिपोर्ट सही नहीं आईं हैं इसलिए हॉस्पिटल चलना है। जब वहां उन्हें पता चला तो वे सुनकर काफी परेशान हो गए, पर उन्होंने मेरा पूरा साथ दिया। इसके बाद मेरा उपचार शुरू हुआ।”

अपने कैंसर के ट्रीटमेंट के शुरुआती दौर के बारे में बात करते हुए अमृता बताती हैं कि ”मेरा कैंसर काफी अर्ली स्टेज पर था, इसलिए मुझे ब्रेस्ट रिमूवल (Breast Removal) के लिए नहीं जाना पड़ा। ऐसे में एक ऑपरेशन किया गया जिसमें स्तन की अंदर की गांठ को निकाल दिया गया और इसके बाद कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी की प्रक्रिया शुरू हुई।”

झड़ते बालों को बनाया स्टाइल स्टेटमेंट

इससे पहले कि उनके बाल झड़ते और धीरे-धीरे वे उन्हें गिरता हुआ देखतीं, उन्होंने खुद ही अपने बाल मुंडवा दिए और उसके बाद वे तरह-तरह के बंडाना पहना करती थी। बालों को झड़ता हुआ देखना काफी मुश्किल होता है। इसलिए उन्होंने इसे अपना एक स्टाइल स्टेटमेंट (Style Statement) बना दिया।

अमृता बताती हैं कि ”इस तरह मैं खुद को मोटिवेट रखती थी। उनका कहना है कि आपको खुद को ही मोटिवेट रखना पर पड़ेगा, क्योंकि परिवार वाले आपका साथ दे सकते हैं। मगर आपके दर्द को नहीं झेल सकते और आपकी तकलीफ को नहीं समझ सकते है। इसलिए आप ही खुद को मोटिवेट कर सकती हैं।”

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उपचार के दौरान खानपान पर देना चाहिए बहुत ध्यान

अपने खान-पान और रूटीन के बारे में बात करते हुए अमृता बताती है कि क्योंकि मेरी इम्युनिटी अच्छी थी इसलिए मैं सारी प्रक्रिया सहन कर पाई। यदि खानपान की बात करें, तो मैं हल्का खाना खाती थी क्योंकि कीमोथेरेपी की वजह से घबराहट और उल्टी आने लगती है। कुछ खाया पिया नहीं जाता, पर मुझे याद है कि मैं फ्रूट जूस और फ्रेश फ्रूट (Fresh Fruits) खाया करती थी और ताजा खाना खाती थी।

ब्रेस्ट कैंसर विजेता अमृता बेरा की कहानी. चित्र : amrita bera

वे बताती हैं कि ”कीमोथेरेपी के बाद आपका हीमोग्लोबिन (Hemoglobin) तेजी से गिरता है। आप उस दौरान अत्यधिक पीड़ा से गुजरते हैं, लेकिन मैंने अपनी फाइटर स्पिरिट को नहीं छोड़ा और खुद अपनी सेहत का ध्यान रखा।”

ब्रेस्ट कैंसर से जंग के बाद आज कैसा है उनका जीवन

वे बताती हैं कि ”आज कैंसर को मेरे शरीर से निकले कुल 5 साल हो चुके हैं अभी भी मेरा रेगुलर चेकअप होता रहता है। आज भी मैं हेल्दी खाती हूं और योग करती हूं और खुद के प्रति सजग रहती हूं। कई लोग खुद के स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर देते हैं और कैंसर जैसी बड़ी बीमारी का पता लगने के बावजूद सही समय पर इलाज नहीं कराते हैं।

जिसकी वजह से उनका कैंसर ज्यादा घातक स्टेट तक पहुंच सकता है और ब्रेस्ट रिप्लेसमेंट (Breast Replacement) या ब्रेस्ट रिमूवल (Breast Removal) सर्जरी की भी नौबत आ सकती है। यह बहुत ही कष्टदायक होता है। इसलिए मैं लोगों से यही कहती हूं कि अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज ना करें और कोई समस्या छोटी नहीं होती है।”

चलते – चलते

अमृता कहती हैं कि हर महिला को अपना ध्यान रखना चाहिए। शुरू से अच्छी डाईट लें और ड्राई फ्रूट्स को अपने दैनिक आहार में शामिल करें। अपनी इम्यूनिटी को स्ट्रॉन्ग रखें, तभी आप किसी बीमारी पर काबू पा सकती हैं।

”बस अपने शरीर के प्रति अवेयर रहें। मैं लकी थी कि, मेरी कैन्सर की स्टेज अर्ली थी। इसलिए मैंने हिम्मत से इस सफर को पूरा किया।”

जब ये पूछा गया कि आपको किसने मोटिवेट किया, तो उन्होंने हंस कर कहा मैंने खुद को मोटिवेट किया!

अमृता जी कहती हैं, “अक्सर लोग ये सोच कर दुखी रहते हैं, कि मेरे साथ ही ये क्यों हुआ, मेरा मानना है कि, यह एक नकारात्मक सोच है। आपको यह सोचना चाहिए, मैं भी इसी समाज से हूं, मेरे साथ भी यह सब हो सकता है। हम महानगरों के प्रदूषित वातावरण में जी रहे हैं। हमारा भोजन भी मिलावटी है, इसलिए ये क्यों हुआ, ये न सोचकर, हमें इससे कैसे बाहर निकलना है, इस पर विचार करना चाहिए।’’

”ये एक फेज़ ,है जो गुजर जायेगा। बस आपको हर दिन खुद को यह बात याद दिलानी है, तभी आप इस जंग को जीत सकते हैं।”

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लेखक के बारे में
ऐश्‍वर्या कुलश्रेष्‍ठ

प्रकृति में गंभीर और ख्‍यालों में आज़ाद। किताबें पढ़ने और कविता लिखने की शौकीन हूं और जीवन के प्रति सकारात्‍मक दृष्टिकोण रखती हूं।

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