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मानसिक स्वास्थ्य विकार आपके व्यक्तित्व और संबंधों को भी करते हैं प्रभावित, शोध बता रहे हैं कैसे

सामाजिक अस्वीकार, ट्रॉमा, बॉर्डर लाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर जैसी मानसिक स्वास्थ्य स्थितियां न केवल किसी व्यक्ति की प्रोडक्टिविटी को प्रभावित करती हैं, बल्कि इनका असर उस व्यक्ति के संबंधों और व्यक्तित्व पर भी पड़ता है।
Updated On: 23 Oct 2023, 09:32 am IST
कार्बोहाइड्रेट और लिपिड मेटाबोलिज्म सामान्य मेंटल डिसऑर्डर के विकास में शामिल हो सकते हैं। चित्र : अडोबी स्टॉक

कुछ स्वास्थ्य समस्याएं हमारे व्यक्तित्व को प्रभावित करती हैं। ये समस्या मानसिक और शारीरिक भी हो सकती है। इसके कारण पर्सनेलिटी में परिवर्तन हो जाता है। यह परिवर्तन बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर के लिए भी जिम्मेदार है। हालिया शोध बताते हैं की इस डिसऑर्डर के कारण ब्रेन एक्टिविटी अनुपस्थित (Mental Disorder affect Brain Activity) होने लगती है।

क्या है शोध (Research on Brain Activity)

सिटी कॉलेज ऑफ न्यूयॉर्क, कोलंबिया यूनिवर्सिटी और न्यूयॉर्क स्टेट साइकियाट्रिक इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने ब्रेन एक्टिविटी पर रिसर्च किया। शोधकर्ताओं ने एक मस्तिष्क क्षेत्र, रोस्ट्रो-मेडियल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स की पहचान की है। रोस्ट्रो-मेडियल प्रीफ्रंटल विशेष रूप से तब अधिक सक्रिय हो जाता है, जब लोगों को दूसरों द्वारा बहुत अधिक अस्वीकार कर दिया जाता है।

सामाजिक अस्वीकृति का नकारात्मक प्रभाव 

यह बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर (Borderline Personality Disorder) वाले व्यक्तियों में सामाजिक अस्वीकृति पर अलग तरह से प्रतिक्रिया करता है। यह क्षेत्र आम तौर पर अस्वीकृति के एपिसोड के दौरान अधिक सक्रिय होता है। बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर यानी बीपीडी वाले व्यक्तियों में यह निष्क्रिय रहता है। यह अस्वीकृति और भावनात्मक अस्थिरता के प्रति बहुत अधिक संवेदनशीलता को दर्शाता है।

क्या है बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर (Borderline Personality Disorder)

किसी भी व्यक्ति का सामाजिक बहिष्कार होता है, यानी उसे अस्वीकृत किया जाता है, तो बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर विकसित होने की आशंका हो जाती है। इसका प्रभाव तंत्रिका तंत्र (Nervous System) पर अधिक पड़ता है। इससे फंक्शन अस्पष्ट हो जाता है। इस शोध में पीटीएसडी (Post-traumatic stress disorder), अवसाद (Depression) और सोशल एंग्जाइटी (Social Anxiety) जैसे विभिन्न मानसिक स्वास्थ्य विकारों में सामाजिक अस्वीकृति की भूमिका की खोज करनी थी।

मेंटलाइजेशन नेटवर्क के एक प्रमुख नोड रोस्ट्रोमेडियल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स की गतिविधि को बनाए रखने या अपग्रेड करने में विफलता से बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर उत्पन्न हो सकता है। इसमें अस्वीकृत होने का प्रभाव मस्तिष्क गतिविधि पर पड़ता है। इसके कारण अस्वीकृति का संकट बढ़ जाता है।

शोध के निष्कर्ष (Conclusion of Research)

सामाजिक तौर पर अस्वीकृत बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर वाली 23 महिलाओं और 22 स्वस्थ प्रतिभागियों पर साइबरबॉल फंक्शनल मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग मोडिफिकेशन का परीक्षण किया गया। शोधकर्ताओं ने पूरे मस्तिष्क की प्रतिक्रिया में समूह अंतर का परीक्षण किया। उन्होंने पाया कि बीपीडी का सामना कर रही महिलाओं की ब्रेन एक्टिविटी प्रभावित देखी गयी। यह बीपीडी वाले व्यक्तियों में निष्क्रिय रहता है। यह निष्क्रियता बीपीडी वाले लोगों की अस्वीकृति के प्रति अधिक संवेदनशीलता दिखाती है।

बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर का सामना कर रही महिलाओं की ब्रेन एक्टिविटी प्रभावित देखी गयी। चित्र : अडोबी स्टॉक

अधिक संवेदनशील होने का कारण (Cause of More Emotions)

अस्वीकृति के दौरान रोस्ट्रो-मेडियल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स में निष्क्रियता विशेष संकेत दे सकती है। इससे यह पता चल सकेगा कि बीपीडी वाले लोग अस्वीकृति के कारण अधिक संवेदनशील और अधिक व्यथित या दुखी क्यों होते हैं। इस दुर्बल और उच्च जोखिम विकार वाले व्यक्तियों को अस्वीकृति के कारण भावनात्मक परेशानी का अनुभव क्यों होता है, यह पता चलने पर बीपीडी वाले लोगों के उपचार में मदद मिलेगी

उपचार में मिलेगी मदद (Borderline Personality Disorder Treatment)

शोध के निष्कर्ष मानसिक स्वास्थ्य विकारों खासकर बीपीडी (Borderline Personality Disorder) के लिए भविष्य में निदान और उपचार (Mental Disorder affect Brain Activity) को बढ़ा सकते हैं। साथ ही अन्य मानसिक स्वास्थ्य विकारों में सामाजिक अस्वीकृति की भूमिका पर भी जांच (Mental Disorder affect Brain Activity) की जा सकती है। अस्वीकार किए जाने पर ब्रेन का प्रमुख भाग रोस्ट्रो-मेडियल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स गतिविधि प्रदर्शित नहीं करते हैं

मानसिक स्वास्थ्य विकारों में सामाजिक अस्वीकृति की भूमिका पर भी जांच की जा सकती है। चित्र : अडोबी स्टॉक

मानसिक और भावनात्मक स्थिति पर प्रभाव 

रोस्ट्रो-मेडियल प्रीफ्रंटल गतिविधि यह इंगित करता है कि वातावरण में कुछ गलत है। यह मस्तिष्क गतिविधि जीवित रहने और फलने-फूलने के लिए घनिष्ठ सामाजिक संबंधों को बहाल करने और बनाए रखने के प्रयास को सक्रिय कर सकती है। मस्तिष्क का यह क्षेत्र तब भी सक्रिय होता है, जब मनुष्य दूसरे लोगों के व्यवहार को समझने की कोशिश करता है। यह दूसरे व्यक्ति की मानसिक और भावनात्मक स्थिति के आधार पर समझता है।

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लेखक के बारे में
स्मिता सिंह

स्वास्थ्य, सौंदर्य, रिलेशनशिप, साहित्य और अध्यात्म संबंधी मुद्दों पर शोध परक पत्रकारिता का अनुभव। महिलाओं और बच्चों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करना और नए नजरिए से उन पर काम करना, यही लक्ष्य है।

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