Lunar eclipse 2022 : क्या महिलाओं की सेहत को प्रभावित कर सकता है चंद्र ग्रहण? आइए पता करते हैं 

8 नवम्बर को साल का अंतिम चंद्रग्रहण लगेगा। क्या यह महिलाओं की सेहत को प्रभावित कर सकता है, आइये जानते हैं।
एफएम दिनों में गैर-प्रभावी मनोविकृति वाले रोगियों की संख्या में अधिकता दर्ज की गई और महत्वपूर्ण प्रवृत्ति की ओर झुकाव भी देखा गया, लेकिन उन्माद या अवसाद के लिए कोई पैटर्न नहीं देखा शटरस्टॉक
स्मिता सिंह Published on: 7 November 2022, 21:00 pm IST
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साल का अंतिम चंद्रग्रहण 8 नवम्बर (Lunar eclipse date) को लगेगा। भारत में शाम 04 बजकर 23 मिनट (Lunar eclipse time in India) से यह शुरू होगा और 06 बजकर 19 मिनट पर यह समाप्त हो जाएगा। पूर्ण ग्रहण भारत के केवल पूर्वी भागों में दिखाई देगा। जबकि आंशिक ग्रहण भारत के अधिकांश हिस्सों में दिखाई देगा।  गुवाहाटी, सिलीगुड़ी, ईटानगर, पटना, रांची, कोलकाता में पूर्ण चन्द्रग्रहण दिखाई देगा। ऐसा माना जाता है कि चंद्रग्रहण के कारण मानसिक विकारों से ग्रस्त लोगों में ये लक्षण और अधिक बढ़ (lunar eclipse effect on  mental health) जाते हैं। क्या है सच आइये जानते हैं स्टडी से।

फुल मून और नो मून का कितना प्रभाव इमोशनल हेल्थ पर  (effect of full moon and no moon on emotional health)

वर्ष 1999 में इंडियन जर्नल ऑफ़ साइकाइट्री में प्रकाशित शोध आलेख में गोवा में  मानसिक बीमारी से ग्रस्त लोगों पर चंद्र ग्रान के प्रभाव को प्रस्तुत किया गया। आर परमेश्वरण, वी पटेल और जे. एम. फ़र्नांडेस ने इस शोध को अंजाम दिया। इस शोध आलेख को पबमेड सेंट्रल में भी दिया गया। इसके अनुसार पहले भी मेंटल हेल्थ पर लूनर एक्लिप्स चक्र के प्रभाव पर काफी शोध किया गया है। इससे परस्पर विरोधी निष्कर्ष भी प्राप्त हुए।

उपरोक्त अध्ययन का उद्देश्य पूर्णिमा (Full moon), अमावस्या (No moon), और अन्य चंद्रमा (other moon) दिनों का अध्ययन करना और इन सभी के बीच के बीच संबंध स्थापित करना है। इसके लिए  गोवा के एक मनोरोग अस्पताल में देखे गए रोगियों में विशिष्ट मनोरोग विकारों की फ्रीक्वेंसी को निर्धारित करना और इनकी जांच करना भी था।

बढ़ सकते हैं एंग्जाइटी के लक्षण (Anxiety can increase) 

इन निष्कर्षों को ग्रहण के साथ संबंध देखना था। दो कैलेंडर वर्षों (1997 और 1993) में सभी नए रोगियों का विश्लेषण किया गया। इनमें चन्द्रमा की स्थिति का प्रभाव देखा गया। उनमें नॉन इमोशनल मनोविकार, डिप्रेशन और एंग्जायटी के लक्षण देखे गये। इसके आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि इंस्टीट्यूट ऑफ साइकियाट्री एंड ह्यूमन बिहेवियर, गोवा की ओपीडी में फुल मून के दौरान नये मनोरोगियों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई। ग्रहण के दिनों (चंद्र/सौर) पर इन निदान वाले रोगियों की संख्या की भी जांच की गई।

स्टडी कहती है कि चंद्रग्रहण के दिन मनोविकार के प्रभाव बढ़ सकते हैं । चित्र : शटरस्टॉक

एफएम दिनों में गैर-प्रभावी मनोविकृति वाले रोगियों की संख्या में अधिकता दर्ज की गई और महत्वपूर्ण प्रवृत्ति की ओर झुकाव भी देखा गया, लेकिन उन्माद या अवसाद के लिए कोई पैटर्न नहीं देखा गया। दृश्यमान चंद्र ग्रहण के दिनों में गैर-प्रभावी मनोविकारों की अधिकता अधिक चिह्नित की गई।

यानी चंद्रग्रहण के दिन न सिर्फ मनोविकार से ग्रस्त लोगों की संख्या बढ़ी, बल्कि अवसाद और एंग्जायटी के लक्षण भी अधिक देखे गये। हालांकि शोधकर्ता इस ओर और अधिक् शोध किये जाने पर बल जताया।

आंखें नहीं होती हैं प्रभावित

अब तक की कोई भी रिसर्च यह स्पष्ट रूप से नहीं कहती कि मानव स्वास्थ्य पर चंद्र ग्रहण का बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है। वैज्ञानिक और चंद्र ग्रहण विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि मनुष्यों और जानवरों पर चंद्र चक्र के प्रभावों पर बहुत कम स्टडी और रिसर्च किए गए हैं। और उनके रिजल्ट से पूरी तरह संतुष्टि जताई गई है।

चंद्र ग्रहण आपकी आंखों की रोशनी को प्रभावित नहीं कर सकता है। चित्र-शटरस्टॉक.

हालांकि चिकित्सा जगत सूर्य ग्रहण को नंगी आंखों से देखने की चेतावनी जरूर देता है, लेकिन चंद्र ग्रहण के बारे में कुछ नहीं कहता है। सूर्य ग्रहण को नंगी आंखों से देखने पर रेटिना का डैमेज हो सकता है, लेकिन चन्द्रग्रहण को नंगी आंखों से देखने पर किसी भी प्रकार के आई डैमेज से इन्कार किया जाता है।

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लेखक के बारे में
स्मिता सिंह

स्वास्थ्य, सौंदर्य, रिलेशनशिप, साहित्य और अध्यात्म संबंधी मुद्दों पर शोध परक पत्रकारिता का अनुभव। महिलाओं और बच्चों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करना और नए नजरिए से उन पर काम करना, यही लक्ष्य है।

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