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आपका तनाव आपकी वेजाइनल हेल्थ को भी कर सकता है खराब, जानिए क्या है मेंटल और सेक्सुअल हेल्थ का कनैक्शन

तनाव में होने वाले हार्मोनल बदलाव की वजह से वेजाइना से जुडी परेशानियां आती है। समझे आखिर तनाव किस तरह वेजाइना को प्रभावित कर सकता है।
प्रेगनेंसी में वेजाइना को सफर करना पड़ सकता है. चित्र : एडॉबीस्टॉक
अंजलि कुमारी Updated: 18 Oct 2023, 10:15 am IST
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आपको ऐसा लग सकता है कि ब्रेन, इमोशन्स और वेजाइना एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। पर वास्तव में ऐसा है नहीं। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि तनाव की स्थिति आपकी वेजाइनल हेल्थ को प्रभावित कर सकती है। तनाव एक मानसिक स्थिति है, जिसकी वजह से समग्र शरीर पर नकारात्मक असर पड़ता है। ऐसी स्थिति तनाव में होने वाले हार्मोनल बदलाव की वजह से आती है। तो सोचा क्यों न इस विषय पर अधिक जानकारी प्राप्त की जाए, साथ ही जाना जाए की आखिर सेक्स किस तरह योनि स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।

हेल्थ शॉट्स ने इस विषय पर फॉर्टिस हॉस्पिटल शालीमार बाग के सीनियर कंसल्टेंट, गाइनेकोलॉजी और आब्सटेट्रिक्स डॉक्टर उमा विद्यानथन से बात की। उन्होंने वेजाइनल हेल्थ पर तनाव के प्रभाव के बारे में कुछ जरूरी बातें बताई हैं, तो चलिए जानते हैं इस विषय पर थोड़ा विस्तार से।

यीस्ट की एक सीमित मात्रा प्राकृतिक रूप से वेजाइना में मौजूद होती है। चित्र- अडोबी स्टॉक

लगातार तनाव में रहने पर वेजाइना को करना पड़ सकता है इन 5 समस्याओं का सामना

1. यीस्ट इंफेक्शन

यीस्ट की एक सीमित मात्रा प्राकृतिक रूप से वेजाइना में मौजूद होती है, परंतु कई ऐसे कंडीशन ऐसे भी होते हैं जिनमें यह असामान्य रूप से ग्रो करना शुरू हो जाती हैं। वहीं कुछ खास प्रकार की यीस्ट के ग्रो होने से इंफेक्शन होता है। हालांकि, स्ट्रेस सीधे यीस्ट इन्फेक्शन का कारण नहीं बनता, परंतु यह इंफेक्शन ग्रो होने की संभावनाओं को बढ़ा देता है।

स्ट्रेस इम्यूनिटी को कमजोर करता है, जिसकी वजह से आपका शरीर आसानी से इंफेक्शन का शिकार हो सकता है। स्ट्रेस, एंग्जाइटी और डिप्रेशन जैसी मानसिक स्थितियां वेजाइनल यीस्ट इनफेक्शन के खतरे को बढ़ा देती हैं।

2. वेजाइनल ड्राईनेस

वेजाइनल ड्राइनेस की स्थिति आमतौर पर मेनोपॉज के पहले देखने को मिलती है। परंतु स्ट्रेस और एंजायटी ब्लड फ्लो को प्रभावित करते हैं, जिससे कि वेजाइना तक पर्याप्त ब्लड नहीं पहुंच पाता और यह प्राकृतिक लुब्रिकेशन को बाधित करता है। जिसकी वजह से वेजाइनल ड्राइनेस की समस्या हो सकती है। ऐसे में सेक्स के दौरान अधिक दर्द और खून आने की संभावना होती है।

3. बढ़ जाता है एसटीडी और एसटीआई का खतरा

स्ट्रेस महिलाओं में एसटीआई के खतरे को बढ़ा देता है। एक्सपर्ट के अनुसार स्ट्रेस की वजह से वजाइना की स्थिति पूरी तरह से बदल जाती है ऐसे में यह खुद को प्रोटेक्ट करने के लिए किसी प्रकार का पॉजिटिव रिस्पांस नहीं दे पाती और इंफेक्शन फैलाने वाले जर्म्स और बैक्टीरिया आपके वेजाइना एवं जेनाइटल ट्रैक को आसानी से अपना शिकार बना लेते हैं।

तनाव हार्मोनल संतुलन को बाधित करके बीवी (बैक्टीरियल वेजिनोसिस) का कारण बन सकता है।

4. अधिक होता है वेजाइनल डिस्चार्ज

शरीर में बढ़ते स्ट्रेस हार्मोन की वजह से वेजाइनल डिसचार्ज की मात्रा भी बढ़ जाती है। वहीं इस दौरान डिस्चार्ज से अधिक बदबू आ रही है, तो इसका मतलब आप इंफेक्शन की शिकार हो चुकी हैं, या होने वाली है। इन स्थितियों को कभी भी नजरअंदाज न करें।

5. बैक्टीरियल वेजिनोसिस

तनाव हार्मोनल संतुलन को बाधित करके बीवी (बैक्टीरियल वेजिनोसिस) का कारण बन सकता है। तनाव से बढ़ा हुआ कोर्टिसोल वेजाइना लाइनिंग और ग्लाइकोजन की माध्यम से एस्ट्रोजन को प्रभावित करता है जिससे योनि में सुरक्षात्मक लैक्टोबैसिली बैक्टीरिया कम हो जाते हैं और बीवी का कारण बनने वाले बैक्टीरिया के विकास को बढ़ावा मिलती है।

जानिए इस स्थिति से कैसे निपटना है

स्ट्रेस की स्थिति में सबसे जरुरी है दिमाग को शांत कर तनाव को कम करने वाली गतिविधियों पर ध्यान देना। इसके साथ ही आपको अपनी इंटिमेट हाइजीन पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है, क्युकी इस दौरान संक्रमण का अधिक खतरा होता है ऐसे में बचाव के लिए अधिक सक्रीय रहें। उचित मात्रा में पानी पिए और खुदको हाइड्रेटेड रखें।

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अंजलि कुमारी

इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म ग्रेजुएट अंजलि फूड, ब्यूटी, हेल्थ और वेलनेस पर लगातार लिख रहीं हैं। ...और पढ़ें

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