इस मौसम में आपको जूनोटिक रोगों से भी रहना चाहिए सावधान, यहां हैं इनसे बचने के उपाय

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 61 फीसदी बीमारियां मनुष्यों में जानवरों से फैलती हैं। इसलिए जरूरी है कि आप अपनी और अपने पेट्स की हाइजीन का खास ख्याल रखें।
बजानवरों पर मौजूद बैक्टीरिया, फंगस और पैरासाइट के कारण होते हैं जूनोटिक डिजीज। चित्र: शटरस्टॉक
Dr. Avi Kumar Published on: 8 July 2022, 14:02 pm IST
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बरसात का मौसम (Rainy season) बहुत सारी बीमारियों का भी मौसम होता है। वातावरण में मौजूद नमी बैक्टीरिया को फैलने में मदद करती है। अगर आपके घर में पालतू जानवर हैं या आप मांसाहार करते हैं तो आपको इस मौसम में और भी सावधान रहने की जरूरत है। कुछ ऐसी बीमारियां हैं जिनका संक्रमण पशुओं द्वारा मनुष्यों में फैलता है। इन्हें जूनोटिक डिजीज की श्रेणी में रखा जाता है। इनसे बचने का सबसे पहला उपाय है इनके बारे में सही जानकारी होना। आइए जानते हैं वे उपाय (How to avoid zoonotic disease) जो आपको जूनोटिक बीमारियों से बचा सकते हैं।

जैसा कि कहावत है कि ‘इलाज से बेहतर बचाव है’, यह वास्‍तव में, हमें कई रोगों से बचाता है। लेकिन किसी बीमारी को फैलने से रोकने के लिए जरूरी है कि उसके सामान्‍य लक्षणों और अन्‍य पहलुओं को समझा जाए, और उसकी पैथोलॉजी तथा यह जानना सबसे महत्‍वपूर्ण है कि कोई रोग कैसे और क्‍यों फैलता है।

क्‍या होते हैं जूनोटिक रोग 

जूनोटिक रोग (या जूनोज) उन रोगों को कहते हैं जो ऐसे रोगाणुओं की वजह से होते हैं जो कि जानवरों और लोगों के बीच फैलते हैं। विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (WHO) के मताबिक, ऐसा कोई भी रोग या संक्रमण जो वर्टिब्रेट जानवरों से मनुष्‍यों में या मनुष्‍यों से जानवरों में फैलता हो, जुनोसिस (Zoonoses) कहलाता है। मनुष्‍यों को संक्रमित करने वाले रोगाणुओं में करीब 61% जुनोटिक  (Zoonotic) होते हैं।

61% फीसदी बीमारियां मनुष्यों में जानवरों से फैलती हैं। चित्र: शटरस्टॉक

जानिए कुछ जूनोटिक रोगों के बारे में 

ये रोग कई किस्‍म के हानिकारक रोगाणुओं जैसे वायरस, बैक्‍टीरिया, परजीवियों और कवक आदि के कारण फैलता है। ये रोगाणु मनुष्‍यों एवं जानवरों में अलग-अलग प्रकार के रोगों को फैलाते हैं। जिनमें हल्‍की किस्‍म की बीमारियों से लेकर कई बार घातक रोग भी शामिल होते हैं। ध्‍यान देने की बात है कि कई बार दिखने में स्‍वस्‍थ जानवर भी ऐसे हानिकारक रोगाणुओं को फैला सकते हैं, जिनसे मनुष्‍य बीमार पड़ सकते हैं, और यह जूनोटिक रोगों पर निर्भर करता है।

कुछ सामान्‍य जुनोटिक रोगों में प्‍लेग, रेबीज़, एंथ्रैक्‍स, मलेरिया, डेंगू, एच1एन1, इंफ्लुएंज़ा और हाल में नियो कोरोना वायरस द्वारा फैलाया जाने वाला कोविड-19 शामिल है।

ये रोगाणु जानवरों से मनुष्‍यों में किस प्रकार फैलते हैं?

मनुष्‍य और जानवर आदिकाल से एक-दूसरे के साथ रहते आए हैं, जब मनुष्‍यों ने पशुओं को पालतू बनाना शुरू किया था। हाल में यह नजदीकी कई गुना बढ़ चुकी है। ऐसा बड़े पैमाने पर जंगलों के कटाव और अंधाधुंध शहरीकरण की वजह से हुआ है, जो कि आधुनिक युग की देन है।

इसलिए, इन रोगाणुओं के प्रसार के सामान्‍य कारणों और तौर-तरीकों के बारे में जागरूक होना जरूरी है। सीडीसी के मुताबिक, ऐसा इन कारणों के चलते हो सकता है:

1. प्रत्‍यक्ष संपर्क:

किसी संक्रमित जानवर को दुलारते वक्‍त या उनके संपर्क में आने पर लार, रक्‍त, पेशाब, म्‍युकस, मल तथा शरीर के अन्‍य तरल पदार्थ के जरिए, जानवरों के काटने या खरोंचने अथवा कच्‍चा या बिना पका भोजन करने पर।

2. परोक्ष संपर्क:

ऐसी जगहों पर जाने से बचें जहां जानवर रहते या घूमते हों, या फिर ऐसी वस्‍तुओं, सतहों आदि के संपर्क में न आएं जो रोगाणुओं द्वारा दूषित हों। जैसे कि पालते जानवरों के घरों, मुर्गियों के बाड़ों, पेड़-पौधों, मिट्टी और जंगली जानवरों के ठिकानों से दूर रहें।

3. वैक्‍टर-जनित:

किसी टिक, या मच्‍छर और फ्ली आदि के काटने के कारण।

4. भोजन-जनित:

असुरक्षित भोज्‍य पदार्थ या पेय पदार्थों का सेवन करने से बचें। दूषित भोजन से पालतू पशुओं समेत जानवरों और मनुष्‍यों को बीमारी होने का खतरा रहता है।

5. जल-जनित:

दूषित जल पीने या संपर्क में आने पर।

दूषित पानी के माध्यम से भी जूनोटिक बीमारियां फैल सकती हैं। चित्र: शटरस्टॉक

इन लोगों को रहना चाहिए ज्यादा सावधान 

असल में, हर किसी को रोगों का खतरा है लेकिन कुछ लोग दूसरों की तुलना में अधिक जोखिमग्रस्‍त होते हैं और उनका बचाव करना चाहिए तथा उनके आसपास सावधानी बरती जानी चाहिए। इनमें शामिल हैं:

5 साल से कम उम्र के बच्‍चे
65 साल से अधिक उम्र के वृद्धजन
कमजोर इम्‍यून सिस्‍टम और कोमॉरबिडिटीज़ वाले लोग
गर्भवती महिलाएं

ये 10 टिप्स हो सकते हैं जूनोटिक रोगों से बचाव में मददगार 

हम अपने आपको और अपने परिजनों को जूनोटिक रोगों से कई तरीकों से बचा सकते हैं। सीडीसी का सुझाव है –

  1. अपने हाथों को धोएं और स्‍वस्‍थ रहें। यह रोगों से बचने और दूसरों तक रोगाणुओं को फैलाने से रोकने का सबसे महत्‍वपूर्ण उपाय है।
  2. जानवरों के आसपास होने के बाद हमेशा अपने हाथों को धोएं, भले ही आपने जानवर को स्‍पर्श किया हो या नहीं।
  3. साबुन और साफ, बहते पानी से कम से कम 20 सेकंड तक हाथ धोएं। यदि साबुन और पानी उपलब्‍ध नहीं हो तो अल्‍कोहल युक्‍त हैंड सैनीटाइज़र का प्रयोग करें, जिसमें कम से कम 60% अल्‍कोहल हो। लेकिन पूरी तरह से सैनीटाइज़र पर निर्भर नहीं रहें।
  4. अपने पालतू जानवरों के आसपास सुरक्षित रहें। उन्‍हें चाटने से बचें और उनके बहुत नज़दीक नहीं जाएं, खासतौर से छोटे बच्‍चों को उनसे दूर रखें।
  5. मच्‍छरों के काटने से बचें, रेपलैंट्स और नैट्स का इस्‍तेमाल करें। घरों में पेस्‍ट कंट्रोल भी कराएं।
  6. अपने जानवरों को साफ-सुथरा और सुरक्षित रखें तथा टिक्‍स और फ्लीज़ से उन्‍हें बचाएं। अपने, अपने परिवार के, अपने पालतू जानवरों के तथा अन्‍य जिन जानवरों को आप भोजन कराते हैं, उनके भोजन को सुरक्षित तरीके से हैंडल करें।
  7. ऐसे फूड स्‍टॉल्‍स से खाने-पीने से बचें, जिनमें सफाई न हो। कच्‍चे या बिना पके हुए भोजन से बचें तथा बासी और ठंडा खाना न खाएं।
    घरों में जूनोटिक रोगों के बारे में जानकारी और जागरूकता रखें। इसी तरह, घरों से बाहर जैसे कि
  8. बच्‍चों के पार्कों, स्‍कूलों और किसी नई जगह जाएं, तो वहां भी जूनोटिक रोगों के बारे में जानकारी लेना न भूलें।
  9. इस बात का ध्‍यान रखें कि आपके जानवर आपको काटे या खरोंचे नहीं। जंगलों में, खुद को पूरी तरह से ढककर रखें और उस जगह के अनुकूल वस्‍त्र पहनें तथा जानवरों के घरों/बिलों/गुफाओं आदि के आसपास सतर्क रहें।
  10. यदि जानवर काट ले तो जख्‍म को साबुन और बहते पानी से अच्‍छी तरह से धोएं और डॉक्‍टर की सलाह से दवा आदि का सेवन करें। किसी रोगग्रस्‍त इलाके में जाएं, तो वैक्‍सीनेशन करवाने के बाद ही जाएं।
पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाली बीमारियों को जूनोटिक रोग कहा जाता है। चित्र: शटरस्टॉक

जिम्‍मेदार नागरिक बनें

वनों एवं जानवरों के प्राकृतिक पर्यावासों के संरक्षण में सहयोग करें।
शहरों के आसपास अंधाधुंध तरीके से पेड़ों के कटाव से बचें।
पृथ्‍वी के बचाव के लिए कार्यरत पर्यावरणविदों को सपोर्ट करें।

यह भी पढ़ें – World Zoonoses Day : सार्स और मंकी पॉक्स ही नहीं, यहां जानिए कई और जूनोटिक रोगों के बारे में

लेखक के बारे में
Dr. Avi Kumar

Dr. Avi Kumar is Consultant, Pulmonology, Fortis Escorts Heart Institute

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