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Janmashtami Special : श्री कृष्ण से सीखें हमेशा खुश और संतुलित बने रहने के ये 5 गुण

Published on:19 August 2022, 03:31pm IST

इस युग में लगभग सभी लोग भागदौड़ और परेशानियों के कारण मानसिक रूप से अस्वस्थ होते जा रहे हैं। हालांकि, भगवान श्री कृष्ण का जीवन को जीने का तरीका, उनकी सादगी और उनकी खुशमिजाजी आपके जीवन के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद रहेगा।

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1 जीवन को भरपूर जिएं - भगवान श्री कृष्ण बच्चों के देवता के रूप में जाने जाते हैं। जैसे कि बच्चे नादान मासूम और उल्लास से भरे होते हैं, ठीक उसी प्रकार श्री कृष्ण भी बच्चों की तरह नटखट और उत्तेजित हुआ करते थें। आज भी मां अपने बच्चों को भगवान कृष्ण बचपन से जुड़ी कहानियां सुनाया करती हैं। वहीं उनका खुशमिजाज सुभाव और रंग-बिरंगा हाव भाव, हमें जीवन के अलग-अलग पड़ाव को मुस्कुराहट के साथ पार करना सिखाता है। श्री कृष्ण का जीवन प्रतिकूलताओं से भरा रहा है, परंतु वह कभी भी अपने जीवन से निराश नहीं हुए। उन्होंने हमेशा इसे एक उत्सव की तरह जीने की कोशिश की है। उनका यह स्वभाव हम सभी के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है।

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2. एक अच्छे दोस्त बनें - कृष्ण और सुदामा की मित्रता को आखिर कौन भूल सकता है। कृष्णा अपने बचपन से ही सुदामा से एक अटूट प्रेम करते थे। उन्होंने अपना बचपन पूरी तरह सुदामा के साथ ही बिताया है, हालांकि, कुछ वर्षों बाद उन्हें नियति ने ही अलग होने पर मजबूर कर दिया। वहीं जब कई वर्षों बाद कृष्ण सुदामा से मिले तो सुदामा की पत्नी ने उन्हें तो फिर के रूप में चिवड़ा यानी कि पीटा हुआ चावल दिया। कृष्णा के लिए यह किसी कीमती तौफे से कहीं ज्यादा बढ़कर था। इसके साथ ही कृष्णा द्रोपदी के एक सच्चे मित्र थे। उन्होंने द्रौपदी के एक पुकार पर प्रकट होकर कौरवों से उनकी गरिमा को बचाया था। आधुनिक दुनिया में रिश्तों ने अपनी गहराई अर्थ और पकड़ को कहीं न कहीं खो दिया है। यदि हम सभी मे कृष्ण के कुछ गुण भी आ जाते हैं, तो हम सार्थक संबंध बनाने के योग्य हो जाएंगे, और बिना किसी शर्त के लोगों की मदद और उनसे प्यार कर सकेंगे।

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3. विकसित करें लीडरशिप क्वालिटी - भगवत गीता में इस बात का वर्णन किया गया है कि भगवान श्री कृष्ण ने किस प्रकार पांडवों के योद्धाओं एवं सैनिकों को संभाला था। धर्म संकट के उस परिस्थिति में भगवान कृष्ण एक महान और प्रभावशाली नेता के रूप में उभरकर सामने आए थें। उन्होंने अपने कुशल दिमाग और रणनीति के साथ सभी के दुविधा को दूर कर दिया। इसलिए हम सभी को इससे सीख लेते हुए कृष्ण की तरह शांत और एकाग्र रहकर कठिनाइयों का सामना करना सीखना चाहिए।

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4. नादानियां भी हैं जरूरी - भगवान श्री कृष्ण की शैतानियों एवं नादानी के किस्से कभी खत्म नहीं हो सकते। कृष्णा को छोटी उम्र में " माखन चोर" के नाम से जाना जाता था। भगवान श्री कृष्ण को मक्खन इतना पसंद था कि वह अपनी मां के नजरों के नीचे से मक्खन चुरा कर खा लेते थें। इसके साथ ही उनकी शरारतो में नदी में स्नान कर रही गोपियों के कपड़े छिपाने तक की करतूतें शामिल हैं। इन्होंने अपने अंदर के बच्चे को जीवित रखने की प्रेरणा दी है। वहीं अपने प्रियजनों को हंसाने एवं खुश रखने के लिए नादानियां एवं बदमाशी करने की कोई उम्र नही होती।

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5. प्रेम करें सादगी से - भगवान श्री कृष्ण ने एक साधारण सादा जीवन व्यक्त किया है। उन्होंने वृंदावन जाने से पहले अपनी आधी से ज्यादा जिंदगी गोकुल के गांव में गायों के बीच गुजारी है। भगवान श्रीकृष्ण को विष्णु का अवतार कहा जाता है, परंतु उन्होंने अपने जीवन को एक सामान्य व्यक्ति के बराबर ही समझा है। इसके साथ ही उनके सभी मित्र भी गोकुल गांव के साधारण व्यक्ति हुआ करते थें। सुदामा के प्रति कृष्ण का अटूट प्रेम उनके व्यवहार को दर्शाता है। वहीं आजकल की चमक धमक से भरी भरी इस मॉडर्न दुनिया में लोगो ने सादगी का नामोनिशान तक मिटा दिया है। इस दुनिया में लोग केवल एक दूसरे से ऊपर उठने के दौर में लगे हैं। हालांकि, सबसे ज्यादा दुख की बात यह है कि लोगों में दिखावा करने की भावना उत्पन्न होती जा रही है। इस सब के बाबजूद अभी भी समय रहते हमें श्री कृष्ण से इस बात पर सीख लेने की जरूरत है।

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