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कुछ खोना कुछ पाना चलता रहता है- अपने वेट लॉस और खुद से प्यार के सफर में मैंने यह सीखा

Published on:30 September 2020, 08:00am IST
शारिका का वेट लॉस और डायटिंग का सफर काफी लंबा रहा है। हालांकि उनके जीवन में उनके वजन ने बड़ा किरदार निभाया, लेकिन उन्होंने कभी अपने वजन के कारण अपने जीवन को खुल कर जीने का मौका नहीं छोड़ा। जानिए उनकी कहानी।
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ये है वेट लॉस जर्नी ।

तीन साल की उम्र से ही मैं मोटापे की शिकार थी। इसका कारण थे मेरे जीन्स, जो शायद मुझे अपने पिता से ही मिले थे, जिन्हें मैंने नौ साल की उम्र में हार्ट अटैक से खो दिया था। बचपन से ही मैं गोल मटोल थी, इसका कारण स्पष्ट करना तो मुश्किल है, लेकिन मेरे जेनेटिक्स और मेरे बहुत खाने की आदत दोनों ही इसके लिए जिम्मेदार हैं।

उस वक्त मेरी पेडियाट्रिशन को लगा कि यह बेबी फैट है और उम्र के साथ कम होता जाएगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। मेरा वजन मेरे जीवन की सबसे बड़ी चुनौती बन गया।

मैं किसी दिखती थी यह मायने नहीं रखता, मैं अस्वस्थ थी यह मायने रखता है…

बचपन से मोटा होना आपके जीवन को बहुत प्रभावित करता है। जब तक मैं 8वीं कक्षा में पहुंची, मेरा वजन 80-90 किलो के करीब था। अब मेरे मोटापे के लिए मेरी जीवनशैली भी जिम्मेदार थी। मैं स्कूल में होने वाली प्रतियोगिता खासकर स्पोर्ट्स में हिस्सा लेना चाहती थी लेकिन मेरे वजन के कारण नहीं ले पाती थी। मेरे जीवन में शारीरिक एक्टिविटी लगभग ना के बराबर थी।
मेडिकल चेकअप से मुझे सबसे ज्यादा चिढ़ थी क्योंकि मेरे वजन को लेकर हर बार चिंता जताई जाती थी।

सन 2006 से 2016 के बीच मैं इतना वजन बढ़ा चुकी थी कि 20 साल की उम्र में मेरा वजन 108 किलो था।

वेट लॉस आसान नहीं है, इस रास्ते में ढेरों मुश्किलें आती हैं

जब मैं 23 साल की थी तो मेरा स्वास्थ्य बदतर हो चुका था। मेरे घुटनों में हर वक्त दर्द रहता था। यही कारण था कि मेरे डॉक्टर अक्सर मुझे समझाते थे कि जब 23 में यह स्थिति है तो भविष्य में क्या होगा।

2016 में 108 किलो वजन के साथ मैंने अपना वेट लॉस का सफर शुरू किया। मेरा पहला कदम था अपनी डाइट सुधारना।

मेरी डायटीशियन ने मेरे लिए एक डाइट प्लान बनाया जिसमें कोई सख्त डाइट नहीं थी। उसमें सीमा में हर एक भोजन मौजूद था। मैंने और पांच डायटीशियन से सलाह ली थी और सभी ने मुझे सामान्य हेल्दी डाइट सुझाई।

सभी डाइट्स का एक ही मूल आधार था- थोड़ा थोड़ा भोजन, जिसमें फलों और ताजी सब्जियों की मात्रा अधिक होगी। मैंने इडली, उपमा, चिल्ला, पोहा इत्यदि में ओट्स शामिल किया।
मुझे रात का खाना जल्दी खाने की सलाह दी गयी थी और रात को भूख लगने पर पानी और फल से अधिक कुछ नहीं खाना था।

साल 2017 तक मैं 20 किलो वजन घटा चुकी थी

मैं लॉ पढ़ रही थी जिसके कारण मेरी कॉलेज लाइफ और पढ़ाई बहुत हेक्टिक होती जा रही थी। मैं अपने डाइट और एक्सरसाइज प्लान के अनुसार काम नहीं कर पा रही थी। पढ़ाई का प्रेशर ही नहीं, वेट लॉस प्लेट्यू भी मेरे हताश होने का बड़ा कारण था। वेट लॉस प्लेट्यू तब होता है जब काफी वजन घटाने के बाद आपका शरीर वजन घटाना बन्द कर देता है।

ऐसे समय में एक्सरसाइज में कुछ बदलाव और लगन और मेहनत से आगे बढ़ा जाता है लेकिन मैं हिम्मत हारने लगी थी। यही कारण था कि जहां मैं 86 किलो तक पहुचीं थी, अगले आठ महीनों में मैं फिर 93 किलो की हो गयी।

सामाजिक चुनौतियां और असुरक्षा

वेट लॉस के लिए मानसिक रूप से तैयार होना बहुत आवश्यक है।
जब आप वेट लॉस के सफर पर निकलते हैं, डाइट और एक्सरसाइज करते हैं तो आप हर उस फूड को सोचते हैं जो आप खाते थे और आप उसमें से एक हेल्दी विकल्प ही चुनते हैं। आप आईने में देख कर यही सोचते हैं कि मैं कल से बेहतर हूं, ज्यादा स्वस्थ व्यक्ति हूं। आप खुद पर बहुत मेहनत करते हैं और उसका परिणाम भी मिलता है।

लेकिन उस एक सफल डाइट प्लान से पहले सौ असफल प्रयास होते हैं और उस असफलता से बाहर निकलना जरूरी होता है।

समाज में मोटे होने से जुड़ी बहुत सी समस्याएं हैं जिनमे से एक है ‘मोटी’ या ‘भैंस’ कहलाना। मेरे साथ भी यह अक्सर होता था लेकिन मेरे ऐसे दोस्त थे, कॉलोनी में, स्कूल-ट्यूशन में जो मुझे आशावान बनाते थे। मेरे मोटापे से वेट लॉस के सफर में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

कैसे मैं वापस रास्ते पर आई- एक एक कदम उठाते हुए

यह मानसिक सपोर्ट ही था जिससे मैं वापस वेट लॉस के रास्ते पर आई। मेरी मां मेरे डाइट प्लान के अनुसार ही खाना बनाती थी। जो मैं नहीं खा सकती थी, वह घर पर बनता ही नहीं था। मैं अपने डाइट प्लान से टस से मस नहीं हो रही थी।

मैं एक सख्त डाइट तो कर रही थी लेकिन कीटो जैसे कोई खास डाइट नहीं। मेरा मुख्य लक्ष्य स्वस्थ होना था। मैं ज्यादा शारीरिक श्रम करने लगी, मैं हर दिन टहलने जाती थी। सुबह नाश्ते में दूध, उबला अंडा और टोस्ट होता था, लंच में एक रोटी के साथ सब्जी और ढेर सारा सलाद, 2 से 3 बजे के करीब फल और 6 बजे अंकुरित दाल। डिनर मैं 8 बजे तक कर ही लेती थी और डिनर प्रोटीन से भरपूर होता था।

अच्छा खाएं, खुद से प्यार करें और आत्म विश्वास रखें

मेरा वजन हमेशा मेरे लिये शर्मिंदगी का विषय रहा। मैं किसी दिखती हूं और उसके अनुसार लोग मुझे कैसा समझते हैं यह मेरे लिए बहुत मायने रखता था।जब मैंने वेट लॉस शुरू किया तो पहला कदम था जो मैं हूं उसे मानना और खुद से प्यार करना।

मुझे बहुत समय बाद पता चला कि खुद को सुधारने के लिए जरूरी है कि मैं खुद की कमियों को मानू। मेरे वेट लॉस के सफर में भरोसा, दृढ़ संकल्प और खुद पर विश्वास ही था जिससे मैं इतने आगे आ सकी।

मैं फिलहाल 95 किलो की हूं लेकिन मैं पहले से कहीं ज्यादा फिट और एक्टिव हूं और मेरे लिए यह ज्यादा मायने रखता है। अगर इस सफर से एक सीख मुझे मिली है तो वह यही है कि अपने वजन के अनुसार जीवन ना जियो। आपका वजन आपकी कहानी नहीं लिखता, अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दें वजन पर नही।

तो लेडीज, यह याद रखें कि मेरा सफर एक दिन का नहीं है। मुझे कई साल लगे हैं और कई साल लगेंगे। मैं अभी भी खुद को सुधार ही तो रही हूं। मैं अपनी डाइट से कोई समझौता नहीं करती और यही आपको भी समझना होगा। अपने लिए सही वेट लॉस का तरीका खोजें और उसे निभाएं। फिट रहें और खुश रहें।

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