एक मां से बेहतर कौन हो सकता है सस्टेनेबिलिटी चैंपियन, मिलिए सस्टेनेबिलिटी लाइफस्टाइल को प्रमोट कर रही कामना गौतम से

घर और बाहर की जिम्मेदारियां निभाते हुए भी हम पर्यावरण सरंक्षण में योगदान कर सकते हैं, सस्टेनेबिलिटी पेरेंटिंग को बढ़ावा दे रही कामना गौतम इसी बात को समझाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं।
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जानें सस्टेनेबल लाइफस्टाइल अपनाने का कामना गौतम का सफर। चित्र : इंस्टाग्राम
अंजलि कुमारी Updated: 15 Nov 2023, 06:55 pm IST
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“मां” शब्द खुद में एक पूरा संसार है। एक मां बिना किसी स्वार्थ के बच्चों की शिक्षक, दोस्त और जरूरत पड़ने पर उनकी मार्गदर्शक भी बन जाती है। यदि आप सोशल मीडिया पर एक्टिव रहती हैं, तो इंस्टाग्राम स्क्रॉल करते हुए अक्सर आपको मायकॉकटेल लाइफ (Mycocktail_life) नामक पेज जरूर नजर आता होगा। हैदराबाद की रहने वाली “कामना गौतम” (Kamna Gautam) इस पेज को हैंडल करती हैं। एक मां, पत्नी, न्यूट्रीशनिस्ट और जिम्मेदार नागरिक की भूमिकाओं में रहते हुए कामना अपने इस पेज के जरिये बच्चों की देखभाल से लेकर पर्यावरण प्रदूषण और सस्टेनेबिलिटी के बारे में जागरुक करती हैं। उनकी सतत रचनात्मकता, सक्रियता और मेहनत का ही परिणाम है कि आज 46.3k लोग उन्हें इंस्टाग्राम पर फॉलो कर रहे हैं।

छोटी सी जानकारी के साथ की शुरुआत

7 साल पहले कामना ने अपने इंस्टाग्राम पेज की शुरुआत की थी। वे बताती हैं, ” शुरुआत में मुझे इंस्टाग्राम के बारे में कुछ भी मालूम नहीं था। केवल बेसिक चीजें पता थीं, जैसे फॉलोअर्स, हैशटेग.. फॉलोइंग आदि। मुझे इंगेजमेंट, कोलैबोरेशन, एल्गोरिदम जैसी चीजों के बारे में बिल्कुल भी पता नहीं था। शुरुआत में मेरे लिए इंस्टाग्राम को सेटअप करना बहुत मुश्किल था। फिर मैंने इस पर रिसर्च की और धीरे-धीरे इंस्टाग्राम से जुड़ी सभी जानकारी इकट्ठा की। मैं मानती हूं कि यदि आपमें सीखने की इच्छा है, तो आपके लिए कोई भी काम कठिन नहीं है।”

“मैंने खुद को और अपने थॉट को दुनिया के सामने रखने के लिए इंस्टाग्राम को चुना। ठीक इसी प्रकार आप किसी भी माध्यम से अपने आप को प्रकट कर सकती हैं। अब चाहें वह सोशल मीडिया हो या फिर कोई दूसरा प्लेटफार्म। ये पूरी तरह से आपके ऊपर निर्भर करता है कि आप कहां और कैसे कॉन्फिडेंस के साथ खुद को प्रस्तुत कर सकती हैं।

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आसान नहीं था मां बनने का सफर. चित्र : इंस्टाग्राम

बहुत जटिल था मां बनने का अनुभव

कामना गौतम अपने सोशल मीडिया के सफर के बारे में आगे बढ़ते हुए कहती हैं, ” इंस्टाग्राम पेट शुरू करने के पहले मैंने अपने पहले बच्चे को जन्म दिया था और चाइल्डबर्थ का मेरा यह अनुभव काफी खराब था। मैंने एक सरकारी अस्पताल में अपने बच्चे को जन्म दिया था और वहां मुझे काफी ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ा। हालांकि, में अपने देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर उंगली नहीं उठा रही हूं। परंतु इस दौरान मैं अपने शरीर को लेकर काफी ज्यादा डिमोटिवेटेड हो गई थी। पहले बच्चे के जन्म के बाद मैंने सोच लिया था कि अब मैं दूसरे बच्चे को जन्म नहीं दे पाऊंगी।”

पहले बच्चे के जन्म के तुरंत बाद कामना के पति की जॉब हैदराबाद में शिफ्ट हो गई थी और उन्हें वहां जाना पड़ा था। उन्होंने बताया कि “हैदराबाद मेरे लिए एक नया शहर था जिसके बारे में मैं ज्यादा कुछ नहीं जानती थी। मैं दूसरी बार प्रेगनेंट हो गई थी और इस बार मैं किसी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहती थी।

मेरे लिए दूसरी बार मां बनना और बच्चे को जन्म देने का अनुभव काफी ज्यादा मोटिवेटिंग और एंपावरिंग रहा। मेरे अंदर कॉन्फिडेंस आया और मुझे लगा कि मेरा शरीर भी बच्चे को जन्म देने के काबिल है।”

पहले बच्चे के साथ फ्लांट किया दूसरी प्रेगनेंसी का बेबी बंप

प्रेगनेंसी के दौरान कामना ने डिसाइड किया कि वे अपनी इस जर्नी को इंस्टाग्राम पर शेयर करेंगी। उन्होंने कहा कि “पहली बार मां बन रही महिला और अन्य प्रेगनेंट महिलाओं तक जरूरी जानकारी पहुंचना अनिवार्य है। मैंने अपने अनुभव से यह महसूस किया कि सपोर्ट और सही जानकारी प्रेगनेंसी को काफी आसान बना सकता है।”

“आज की तरह कुछ साल पहले तक प्रेगनेंसी में अपने पेट की नेकेड तस्वीरें शेयर करना आम नहीं था। क्योंकि लोगों की कुछ ऐसी अवधारणाएं सालों से चली आ रही हैं कि प्रेगनेंसी में नजर लग जाती है और उन्हें अपने पेट को दुपट्टे से कवर करके रखना चाहिए।”

“परंतु मैं खुद को इन बातों में बांधकर नहीं रखना चाहती थी। इसलिए मैंने प्रेगनेंसी के दौरान कई सारे फोटो शूट कराएं और उन्हें अपने इंस्टाग्राम पर पोस्ट भी किया। साथ ही मैं कई अन्य चीजें भी पोस्ट करती थी। जैसे कि प्रेगनेंसी न्यूट्रीशन से जुड़ी बातें, प्रेगनेंसी केयर टिप्स और बच्चों की देखभाल करने का तरीका। मैं अपने पहले बच्चे को गोद में लेकर अपने बेबी बंप के साथ भी तस्वीरें शेयर किया करती थी। यह बताने के लिए कि आप किस तरह अपने पहले बच्चे की केयर करते हुए अगली प्रेगनेंसी को हैंडल कर सकती हैं।”

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खुद पॉजिटिव चीजों पर ध्यान देती रही। चित्र : इंस्टाग्राम

नेगेटिव कमेंट और ट्रॉल्स को नहीं बनने दी कमजोरी

मैंने डिलीवरी के वक़्त की तस्वीरें भी शेयर की। साथ ही ब्रेस्टफीड कराते हुए भी तस्वीरें शेयर किया करती थी। उस दौरान मुझे कई बार ट्रोल किया गया। नेगेटिव कमेंट, संदेश और कई बार आदमियों ने मुझे खुद अपनी न्यूड तस्वीरें भेजीं। लोगों ने मुझे अटेंशन सीकर कहा क्योंकि मैं अपनी ब्रेस्टफीडिंग की तस्वीरें शेयर करती थी। परंतु इसका मतलब यह बिल्कुल भी ये नहीं था कि मैं आपसे आपका अटेंशन चाहती थी। हालांकि, मैंने इसे कभी भी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। मैं नेगेटिव चीजों को इग्नोर करते हुए खुद पॉजिटिव चीजों पर ध्यान देती रही।

“कई लोगों ने इसे काफी ज्यादा पसंद किया। मुझे फॉलो करना शुरू किया, इतना ही नहीं कई इंटरनेशनल ब्रेस्टफीडिंग कम्युनिटी ने मेरी पोस्ट को रिपोस्ट किया। मेरी पोस्टपार्टम तस्वीरें भी काफी ज्यादा वायरल हुईं। लोग मुझे मेरे नाम से जानने लगे थे।”

कोई टैबू नहीं है ब्रेस्टफीडिंग

आजकल महिलाएं जॉब करती हैं। उनके लिए घर पर बैठे रहना मुमकिन नहीं है। बाहर निकलना, घूमना, फिरना नियमित जीवन का एक हिस्सा है। ऐसे में ब्रेस्टफीडिंग मदर को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कामना के अनुसार ब्रेस्टफीडिंग के प्रति घटते रुझान का कारण सामाजिक अवधारणाएं हैं। महिलाएं जब कभी बाहर होती हैं या किसी के साथ में होती हैं, तो वह बच्चे को ब्रेस्ट फीड कराने में संकोच महसूस करती हैं।

यदि बच्चा भूखा है और रो रहा है, तो सबसे पहले उन्हें कोई ऐसी जगह ढूंढनी पड़ती है जहां वे अपने बच्चे को ब्रेस्टफीड करवा सकें। क्योंकि हमने कभी उन्हें इतना कंफर्टेबल किया ही नहीं कि वह आसानी से कहीं भी अपने बच्चे को दूध पिला लें। ऐसे में ब्रेस्टफीडिंग को प्रमोट करने के लिए सबसे पहले इस टैबू खत्म करना बहुत जरूरी है।

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लोग मुझे मेरे नाम से जानने लगे थे। चित्र : इंस्टाग्राम

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‘सस्टेनेबिलिटी’ का मतलब है एक बेहतर जीवन और खुशी

यदि आप कामना के इंस्टाग्राम पेज से वाकिफ हैं, तो आपको पता होगा कि कामना सस्टेनेबिलिटी के प्रति किस तरह जागरूकता फैला रही हैं। इस बारे में बात करते हुए कामना कहती हैं कि “हर मां-बाप अपने बच्चे को एक बेहतर जिंदगी देना चाहता है। इसकी शुरुआत सबसे पहले सस्टेनेबिलिटी लाइफस्टाइल अडॉप्ट करने से होती है। हमारे सभी संसाधन लिमिटेड हैं, जिन्हें यदि हम सही से इस्तेमाल करेंगे तभी हमारी अगली जनरेशन भी एक हेल्दी लाइफ़स्टाइल को इंजॉय कर पाएगी।”

सस्टेनेबिलिटी की शुरुआत छोटी-छोटी चीजों से हो सकती है। हालांकि, समाज से पहले आपको अपने परिवार के सदस्यों का सामना करना पड़ता है। ठीक इसी प्रकार कामना ने भी धीरे-धीरे पहले अपने पति और परिवार के अन्य लोगों को सस्टेनेबिलिटी के बारे में जागरुक किया।

वे कहती हैं, “शुरुआत में मैंने अपने घर से प्लास्टिक मैटेरियल्स को डंप करना शुरू किया। परंतु बाद में मुझे लगा की सस्टेनेबिलिटी केवल इतने में ही सीमित नहीं है। हालांकि, सस्टेनेबिलिटी की शुरुआत मेरे लिए भी आसान नहीं था। अपने परिवार को इसके लिए मनाना एक मुश्किल टास्क है।”

बच्चों के साथ भी संभव है सस्टेनेबल लाइफस्टाइल मेंटेन करना

कामना के अनुसार बच्चे छोटी उम्र में सस्टेनेबिलिटी को नहीं समझ पाते, क्योंकि अपने घर के साथ साथ वे औरों को भी देखते हैं। उन्हें धीरे-धीरे इसके लिए तैयार करना पड़ता है। कामना बताती हैं कि उनके घर में बैलून नहीं आते, परंतु दूसरे बच्चों के बर्थडे पार्टी में बलूंस देखकर कामना के बच्चे भी बलून से खेलने की मांग करते हैं। ऐसे में इन सिचुएशन को डील करना थोड़ा मुश्किल होता है, परंतु यदि उन्हें समझाया जाए तो वह समझ जाते हैं।

कभी कभार उनकी सोसायटी में पार्टियां होती हैं। जहां बलूंस का इस्तेमाल होता है और बाद में उन बलूंस को साइड में रख दिया जाता है। ऐसे में उनके बच्चे उन बलूंस को घर ले आते हैं और उससे खेलते हैं। तब कामना उन्हें कुछ नहीं कहती क्योंकि वह उसे रीयूज कर रहे होते हैं।

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बच्चों को भी सिखाएं सस्टेनेबल लाइफस्टाइल। चित्र : इंस्टाग्राम

अब जानें कैसे कर सकते हैं सस्टेनेबिलिटी को फॉलो

अपनी जिंदगी के कुछ उदाहरण देते हुए कामना ने बताया कि वह जब भी बाहर स्ट्रीट फूड खाने जाती है, तो अपने साथ अपने बर्तन ले जाती हैं। क्योंकि ज्यादातर स्ट्रीट फूड प्लास्टिक पैकेट में मिलते हैं। हालांकि, यह आसान नहीं है। परंतु धीरे-धीरे आपको इसकी आदत हो जाती है। इसी तरह प्लास्टिक बॉटल खरीदने की जगह अपनी खुद की बोतल कैरी करें। इसके अलावा बायोडिग्रेडेबल मटेरियल से बने प्लेट इत्यादि को भी कैरी करना चाहिए। बाहर सामान लाने जाते वक्त हमेशा अपना कैरी बैग लेकर चलें। यदि आप भूल जाती हैं, तो एक कैरी बैग हमेशा अपने पर्स और कार में रखें।

कामना कहती हैं, “मैं जहां भी घूमने जाती हूं, वहां अपने फुटप्रिंट के अलावा और कुछ भी नहीं छोड़ती।”

(कामना गौतम को हेल्थ शॉट्स शी स्लेज अवॉर्ड सस्टेनेबिलिटी स्टार कैटेगरी में नामित किया गया है। उन्हें वोट करने और उनकी जैसी और भी प्रेरक स्त्रियों के बारे में जानने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें – शी स्लेज अवॉर्ड्स)

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इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म ग्रेजुएट अंजलि फूड, ब्यूटी, हेल्थ और वेलनेस पर लगातार लिख रहीं हैं। ...और पढ़ें

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