जब जीवन में कुछ ज्यादा पाना हो, तो ज्यादा मेहनत के लिए तैयार रहना है जरूरी : भाविना पटेल

पैरालंपिक में सिल्वर मेडल जीतने वाली भारत की पहली टीटी खिलाड़ी भाविना पटेल इस सफलता का श्रेय कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास को देती हैं।
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जीत हौंसलों से होती है। चित्र: भाविना पटेल
टीम हेल्‍थ शॉट्स Published: 1 Sep 2021, 03:30 pm IST
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“हर कोई एक सामान्य जीवन जीता है। मगर अगर आप जिंदगी में कुछ खास करना चाहती हैं, तो आपको भी एक्स्ट्रा मेहनत करनी होगी। ” भारतीय पैडलर भविना पटेल, ने टोक्यो पैरालिंपिक में इतिहास रचा है।

12 महीने की उम्र में ही पोलियो से पीड़ित हो जाने के बाद शारीरिक और मानसिक कठिनाइयों ने उन्हें और मज़बूत बनाया। भाविना ने महिला एकल वर्ग 4 टेबल टेनिस स्पर्धा में भारत के लिए पहली बार रजत पदक जीत कर इतिहास रचा है।

हेल्थ शॉट्स के साथ एक एक्सक्लूसिव बातचीत में, उन्होंने अपने संघर्ष, अभी तक के सफर और बलिदान के बारे में बात की।

जूनून और जीत 

स्वर्ण पदक से बस कुछ कदम दूर, भाविना ने रजत पदक हासिल कर भारत का नाम रौशन किया है।

टोक्यो से एक साक्षात्कार में 34 वर्षीय भाविना ने कहा “जबसे मैंने खेलना शुरू किया है, मेरा हमेशा से पैरालिंपिक में स्वर्ण पदक जीतने का सपना रहा है। इस बार मैं स्वर्ण पदक से चूक गयी, और अपना 100 प्रतिशत नहीं दे पायी, लेकिन मेरी सफलता बहुत सारे (पैरा) खिलाड़ियों को प्रेरित करेगी। यह पैरालंपिक के बारे में जागरूकता भी फैलाएगा और ज्यादा से ज्यादा खिलाड़ी अपनी पसंद के खेल चुनने के लिए प्रोत्साहित होंगे।”

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जीत के लिए जुनून जरूरी है।चित्र: भाविना पटेल

भाविना अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए कहती हैं कि ”उन्होंने बस चलना शुरू ही किया था जब उन्हें एक-दो दिन बुखार आया था और शायद वह पोलियो का पहला संकेत था।” उस दिन के बाद से उनका और उनके परिवार का जीवन पूरी तरह से बदल गया।

भाविना बताती हैं कि “मेरे माता-पिता ने कभी हार नहीं मानी। वे दर-दर भटकते रहे, अस्पतालों से लेकर मंदिरों तक और हर उस जगह जहां कहीं भी उन्होंने अपनी बेटी के बेहतर होने की उम्मीद देखी।”

नहीं हरा पाई शारीरिक अक्षमता 

वे एक छोटे से गांव से हैं जहां उन्हें न केवल अपनी शारीरिक अक्षमता से लड़ना था, बल्कि एक ऐसे वातावरण का भी सामना करना था, जहां लड़कियों से भेदभाव किया जाता है।

“तुम लड़की हो, ये नहीं कर सकती वो नहीं कर सकती।” वे हर काम के लिए दूसरों पर निर्भर थीं। भाविना बताती हैं कि उन्हें दिन-रात सबके ताने सुनने पड़ते थे। मगर इस बात ने भाविना को निराश नहीं किया, बल्कि उन्हें और मज़बूत बनाया। ताकि वे अपना जीवन अपने बल पर जी सकें।

“मैं खुद को आत्मनिर्भर और स्वतंत्र बनाना चाहती थी। मैं देश के लिए कुछ करना चाहता थी, वो भी कुछ ऐसा ताकि हर कोई मुझे मेरे नाम से जाने। इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज कराने के लिए मेरे पास ‘जुनून’ था। इस बार मुझे मौका मिला है! मैंने अवसर का भरपूर उपयोग करने की कोशिश की।”

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उन्हें अपने जीवन में माता-पिता और अपने पति से भरपूर सपोर्ट मिला है, जिसने उन्हें आगे बढ़ने में मदद की है।

भाविना कहती हैं “शादी के बाद, अपने ससुराल में रहना, एक गृहिणी, एक खिलाड़ी, एक कर्मचारी होने के नाते, इन सभी भूमिकाओं को एक साथ निभा पाना बहुत कठिन है।

मगर मेरे परिवार ने मेरा साथ दिया और मुझे इतना प्यार दिया। मेरे पति ने मेरे साथ खड़े होने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। वह हमेशा मुझे खुश और प्रेरित रखने की कोशिश करते हैं। वे मेरे गुरु के समान हैं, और मेरे माता-पिता मेरे भगवान हैं।”

यूं हुई टेबल टेनिस की शुरुआत 

इसकी शुरुआत 2004-2005 में हुई थी, जब गुजरात के एक गांव में एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मी भाविना, ने अपनी स्कूली शिक्षा के बाद ब्लाइंड पीपुल्स एसोसिएशन में एक इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग कोर्स (ITI) करने का फैसला लिया, जिसके लिए वे अहमदाबाद चली गईं।

“वहां, मैंने कुछ दोस्तों को देखा जो टीटी खेल रहे थे। उसके बाद, मैंने इसे मजे के लिए भी खेलना शुरू कर दिया। मगर मुझे एहसास हुआ कि टीटी मेरे लिए वाकई दिलचस्प है। मैं खेल में बहुत आत्मविश्वास महसूस करने लगी। मेरी इच्छाशक्ति मजबूत हो गई और मेरे जीवन में बहुत सारे बदलाव आने लगे। धीरे-धीरे, मैं टूर्नामेंट में खेलने लगी। मैंने अच्छा प्रदर्शन किया और कई पदक जीते, बस तब से मेरा लक्ष्य बढ़ता गया।

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टेबल टेनिस ने भाविना को एक नया आत्मविश्वास दिया। चित्र: भाविना पटेल

“मैं कुछ बड़ा करना चाहता थी। तभी से पैरालंपिक मेरा लक्ष्य बना। मैं उस सपने का पीछा करने के लिए निकल पड़ी और परिणाम सबके सामने है।” यह कहते हुए उनकी आंखों में एक चमक थी।

खाने की खूब शौकीन हैं भाविना

भाविना को पैरालिंपिक के लिए कड़ी मेहनत करनी थी। इसलिए उन्होंने काफी समय से अपने पसंद का कुछ खाना या पीना छोड़ दिया था। उनका मानना है कि अगर आपको अपने जीवन में कुछ बड़ा हासिल करना है, तो आपको उसके लिए एक्स्ट्रा मेहनत करनी चाहिए।

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वे कहती हैं – ”मुझे गोलगप्पे खाना बहुत पसंद है, मगर इतने लंबे समय से मैंने इसे खाना तो क्या, छुआ भी नहीं है। मुझे मिर्च बहुत पसंद है, खासकर तली हुई मिर्ची! मैं बहुत बड़ी ‘चटोरी’ हूं… सच कहूं तो मुझे खाना खाना बहुत पसंद है, लेकिन मैं जितना खाने से प्यार करती हूं, उससे कहीं ज्यादा मैं अपने खेल को प्यार करती हूं। और मैं इसके लिए सब कुछ छोड़ सकती हूं।”

ध्यान और योग से करती हैं दिन की शुरुआत

भाविना बेहद हंसमुख हैं, मगर वे उतनी ही संवेदनशील भी हैं! उनका मानना है कि वे बेहद भावुक हैं और जब उनकी मानसिक शक्ति की बात आती है, तो वे उतनी मज़बूत नहीं हैं। मगर यदि एक बार वे अपना दिमाग किसी लक्ष्य पर केन्द्रित कर लें तो फिर वे इसे पाकर ही रहती हैं।

अपनी सुबह की दिनचर्या का ज़िक्र करते हुए भाविना बताती हैं – “मेरी सुबह की शुरुआत योग और ध्यान के साथ होती है। मुझे इससे ढेर सारी ऊर्जा, सकारात्मकता और प्रेरणा मिलती है। इसी वजह से मैं हर खेल में शांत रहती हूं। ध्यान और योग से मुझे बहुत प्रेरणा मिलती है।”

सकारात्मकता दिखाती है राह

“हम महिलाओं में इतनी शक्ति है कि कभी-कभी हमें इसका अहसास ही नहीं हो पाता। मगर महिलाओं को अपनी शक्तियों को समझना चाहिए और अपनी क्षमता और प्रतिभा को उजागर करना चाहिए। अगर कोई चीज नकारात्मक दिशा में जा रही है, तो भी उसे सकारात्मक नजरिए से देखने की कोशिश करें। बस सकारात्मक और आत्मविश्वासी बनें, आपका जीवन अपने आप आसान हो जाएगा।”

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