67 वर्षीय महिला ने अपने आहार में बाजरा शामिल कर पाया डायबिटीज से छुटकारा

Published on: 15 November 2021, 14:08 pm IST

मधुमेह एक जानलेवा बीमारी है, अगर इसे नजरंदाज किया जाए तो। हम लाएं हैं एक ऐसी महिला की कहानी, जिन्होनें अपने आहार में सफेद चावल और गेहूं की जगह बाजरा शामिल करके अपनी डायबिटीज से छुटकारा पा लिया!

67 वर्षीय महिला ने अपने आहार में बाजरा शामिल कर पाया डायबिटीज से छुटकारा। चित्र : शटरस्टॉक

लता रामास्वामी जब 32 वर्ष की थीं, तब उन्हें मधुमेह का पता चला था। 59 वर्ष की होने तक उनकी दाहिनी आंख की रेटिना डैमेज हो गई थी। यह वह समय था जब उन्हें यह पता चला कि डायबिटीज ऐसा भी कर सकती है। एक विज्ञान शिक्षक के रूप में, रामास्वामी की मधुमेह के प्रति उत्सुकता बढ़ी। दिन-रात इस विषय पर गहन अध्ययन के बाद उन्होंने मिलेट्स यानी बाजरा के चमत्कारों के बारे में जाना।

रामास्वामी हेल्थशॉट्स को बताती हैं कि “मेरे माता-पिता दोनों मधुमेह रोगी थे। मुझे पता था कि मुझे सावधान रहना होगा। मगर नियमित जांच के दौरान जब मैं 32 साल की थी, हमें पता चला कि मुझे रक्तचाप की समस्या है। उसके बाद मुझे मधुमेह का पता चला। भले ही मैं दवा ले रही थी, मगर यह बीमारी उम्र के साथ धीरे-धीरे बढ़ने लगी।”

दवाओं के अलावा, उन्होंने अपनी दिनचर्या में बदलाव किया, जिसमें टहलना भी शामिल था।

वह बताती हैं “मैंने सुना था कि जब आपको लंबे समय तक मधुमेह होता है, तो यह आपके शरीर के एक या कई हिस्सों को प्रभावित करेगा। इसका असर मुझे अपनी रेटिना पर देखने को मिला। एक दिन, मैंने पाया कि मैं अपना सिर घुमाए बिना अपनी दाहिनी ओर नहीं देख पा रही हूं। मैं डॉक्टर के पास गई। तब मुझे पता चला कि मेरे रेटिना पर डायबिटीज का प्रभाव पड़ा है।”

जिसके बाद उनके मन में डर पैदा हो गया।

मधुमेह का डर

रामास्वामी बताती हैं कि इसके बाद उनके मन में डायबिटीज को लेकर एक डर पैदा हो गया। इसका प्रभाव और अंगों पर भी आ सकता है। तभी उन्होंने अपने जीवन में कुछ बदलाव लाने का फैसला लिया। जिसके लिए उन्होनें इसके बारे में पढ़ना शुरू किया।

शोध के बाद रामास्वामी को मिलेट्स के बारे में पता चला। वह रात – रात भर यह पता लगाने की कोशिश करती थीं कि अपने शर्करा के स्तर में बदलाव लाने के लिए अपने दैनिक जीवन में बाजरा को कैसे शामिल किया जाए।

उन्होनें दो डॉक्टर्स पर भरोसा किया – डॉ बीएम हेगड़े, जिन्हें हाल ही में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था और मैसूर के डॉक्टर और वैज्ञानिक, डॉ खादर वल्ली। दोनों विशेषज्ञों ने सकारात्मक बदलाव के लिए जीवनशैली और खानपान में बदलाव लाने पर जोर दिया।

रामास्वामी ने बाजरा में आशा की एक किरण देखी। लेकिन ध्यान रहे, वह ज्वार, बाजरा, जौ, प्रोसो बाजरा या क्विनोआ नहीं ले रही थी। इसके बजाय, वह 5 अन्य मिलेट के लिए आगे बढ़ीं।

diabetes aur milets
डायबिटीज में फायदेमंद है बाजरा। चित्र : शटरस्टॉक

मधुमेह से निपटने के लिए अपने आहार में करें इन मिलेट्स को शामिल

रामास्वामी के अनुसार, ये 5 प्रकार के मिलेट्स आपके जीवन का हिस्सा होने चाहिए:

1. फॉक्सटेल मिलेट्स
2. छोटे मिलेट्स
3. बरनार्ड मिलेट्स
4. कोडो मिलेट्स
5. ब्राउनटॉप मिलेट्स

रामास्वामी और उनके पति, जो मधुमेह से जूझ रहे हैं, ने महामारी के बीच जून 2020 में अपनी मिलेट जर्नी शुरू की। जल्द ही, सफेद चावल, गेहूं और सभी तरह के आटे उनकी रसोई से बाहर हो गए।

‘Amma’s Miracle Millets’

तीन महीने तक खुद पर प्रयोग करने के बाद, अक्टूबर 2020 में रामास्वामी ने महसूस किया कि इस सुपरफूड से लाभ पाने वाली वह अकेली नहीं होनी चाहिए।

वह साझा करती हैं – “हम अकेले नहीं थे जो पीड़ित थे। ‘इंडिया इज द डायबिटीज कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड’। और मैंने सोचा, ‘अगर मैं इसे करने में सक्षम हूं, तो मुझे इसे अपने तक नहीं रखना चाहिए’। इसलिए तब मैंने ‘Amma’s Miracle Millets’ की शुरुआत की।”

यह एक ऐसा मंच है, जहां वह मधुमेह और बाजरा के साथ अपने अनुभव साझा करती है, और लोगों के उपयोग के लिए टिप्स भी देती हैं। अब रामास्वामी ने मिलेट डोसा बैटर का पैकेज भी शुरू कर दिया है।

स्कूल में छात्रों को विज्ञान पढ़ाने से लेकर अब लोगों को डायबिटीज रिवर्सल के बारे में पढ़ाने तक, रामास्वामी जागरूकता फैलाने का काम कर रही हैं।

वह साझा करती हैं “मुझे लगता है कि डायबिटीज से लड़ने के लिए लोगों को केवल दवाओं पर निर्भर नहीं होना चाहिए। लोग शायद इसे न जानते हों, लेकिन मधुमेह की दवा भी लंबे समय में किसी व्यक्ति के लिए अच्छी नहीं होती है। इसलिए, हमें इसका सेवन कम करने की कोशिश करनी चाहिए।”

रामास्वामी अब एक दिन में कम से कम 10 लोगों के सवालों का जवाब देती हैं। यहां तक ​​कि अपनी बेटी को भी सलाह देती हैं, जिसे 35 साल की उम्र में मधुमेह है।

यह है अंबालि बाजरा। चित्र : शटरस्टॉक

बाजरा का उपयोग करने के लिए टिप्स

1. अगले दिन इस्तेमाल करने के लिए बाजरे को रात भर (कम से कम 8 घंटे) भिगोना पड़ता है।

2. बाजरे का अधिक मात्रा में सेवन न करें। लगभग 25 से 30 ग्राम बाजरा प्रति भोजन पर्याप्त होता है।

3. दाल के साथ अपने आहार में ढेर सारी कच्ची, पकी और हरी सब्जियों को शामिल करें। दही की जगह छाछ का सेवन करें। इसे संतुलित भोजन कहते हैं।

4. बाजरा का दोबारा इस्तेमाल न करें। भोजन के लिए इसे दोबारा गरम न करें या बचा हुआ दोबारा न खाएं।

5. इसे खाने का सबसे अच्छा तरीका दलिया है।

याद रखें, बाजरा पहली, दूसरी या तीसरी बार में स्वादिष्ट नहीं लगेगा, लेकिन हिम्मत रखिए और खाइए!

क्या है बाजरा और मधुमेह पर पोषण विशेषज्ञ की राय:

रामास्वामी की मधुमेह की कहानी सुनने के बाद, हेल्थशॉट्स ने लोकप्रिय पोषण विशेषज्ञ कविता देवगन से बाजरा के फायदे जानने के लिए संपर्क किया।

देवगन ने बताया कि “मिलेट्स मधुमेह रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकते हैं। इसके लिए 3 प्रकार के मिलेट्स पर भराेसा किया जा सकता है।

बाजरा:

यह मैग्नीशियम से भरपूर होता है, जो हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करता है, इसमें बहुत सारा पोटेशियम होता है। यह समग्र रक्तचाप को कम करने में मदद करता है, और इसका फाइबर खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है। इसमें मौजूद मैग्नीशियम शरीर में ग्लूकोज रिसेप्टर्स को नियंत्रित करने और मधुमेह को दूर रखने में भी मदद करता है।

रागी:

जौ की तरह रागी भी मधुमेह और अधिक वजन वाले लोगों के लिए एक आदर्श भोजन है, क्योंकि इसका पाचन धीमा होता है। आंतों से ग्लूकोज बहुत धीरे-धीरे रक्त में छोड़ा जाता है।

फॉक्सटेल मिलेट:

इसे कांगिनी या थिनई के रूप में भी जाना जाता है। यह स्मार्ट कार्बोहाइड्रेट से भरा होता है, जो रक्त शर्करा के स्तर को तुरंत नहीं बढ़ाता है, लेकिन धीरे-धीरे रक्तप्रवाह में ग्लूकोज को छोड़ता है।

आपको अपने मेटाबॉलिक स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है। चित्र- शटरस्टॉक।

क्या यह एक सस्टेनेबल डाइट है?

जिन लोगों ने अपने आहार में मुख्य रूप से सफेद चावल लिए हैं, उनके लिए यह सवाल महत्वपूर्ण था। मगर रामास्वामी दंपति ने चावल पर वापस नहीं जाने का फैसला किया।

”एक दिन हमने सोचा कि चावल खा लेने चाहिए, तो हमने लंच औए डिनर में चावल खाए। आप यकीन नहीं करेंगे कि अगले दिन हमारा शुगर लेवेल 200 के पार था।”

ऐसा ही तब हुआ जब उन्होंने गेहूं की रोटी खाई।

यह उनके लिए पर्याप्त सबूत था कि मधुमेह को मात देने के लिए बाजरा जादुई भोजन था।

अब, वे बाजरे का आटे से बनी रोटी, पराठा और पूरी का आनंद लेते हैं! 5 मिलेट में से प्रत्येक का विशिष्ट स्वाद उन्हें वैराइटी बनाए रखने में मदद करता है।

बाजरे के अलावा मधुमेह के प्रबंधन के लिए और क्या किया जाना है जरूरी?

अम्मा, जैसा कि रामास्वामी को प्यार से बुलाया जाता है, कहती हैं कि छोटे बदलावों ने उनके जीवन में एक बड़ा बदलाव ला दिया। वह साझा करती है:

हमने रिफाइंड तेल के बजाय, सरसों का तेल, तिल का तेल, नारियल का तेल और मूंगफली का तेल जैसे कोल्ड प्रेस्ड ऑयल का उपयोग करना शुरू कर दिया। हमने किसी भी रूप में सफेद चीनी का सेवन बंद कर दिया। कभी-कभी ताड़ के गुड़ से मिठाइयां बनाते हैं। हमने घर से सभी प्लास्टिक की वस्तुओं को हटा दिया, और अब हम केवल स्टील या कभी-कभी कांच का उपयोग करते हैं।

“जब हमने ये चीजें कीं, तो हमें 10 दिनों के भीतर फर्क महसूस हुआ। तीन हफ्तों के भीतर, हमने देखा कि हमारी मधुमेह कम हो रही है। मेरा हीमोग्लोबिन A1C परीक्षा परिणाम शुरू में 9 था, और तीन महीनों में, मैं 5.6 पर आ गयी।” रामास्वामी का वजन मिलेट डाइट शुरू करने के बाद से 14 किलो कम हुआ।

तो लेडीज, क्या आप अपने खाने की आदतों में बदलाव लाने के बारे में सोच रही हैं?

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टीम हेल्‍थ शॉट्स टीम हेल्‍थ शॉट्स

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