योग से मैंने माइग्रेन को हराया और 66 में भी एनर्जेटिक हूं, ये है योग के साथ सर्वेश ताई का अनुभव

Published on: 19 June 2022, 15:00 pm IST

जीवन में आपको एक ही मौका मिलता है, इसलिए खुद को स्वस्थ रखें और खुश रहें, पिछले 25 साल से योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने वाली सर्वेश का यही मानना है।

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सर्वेश ताई से जानिए योग कैसे आपको एक स्वस्थ और सुखी जीवन दे सकता है। चित्र : सर्वेश ताई

एज इज़ जस्ट आ नंबर! ये कहावत बिल्कुल चरितार्थ होती हैं जब हम बात करते हैं 66 साल की सर्वेश जी की। गले में कैमेरा लटकाए, वे आपको कहीं भी नज़र आ सकती हैं, ऊर्जा से भरपूर, हमेशा मुस्कुराती हुई! ऐसा कोई काम नहीं है जो वे 66 साल की उम्र में न कर सकें। तो क्या है इस ऊर्जा से के पीछे का राज़, कहीं ये योग तो नहीं!

अगर हम आपसे कहें कि एक 66 साल की महिला को इमैजिन करिए, तो यकीनन आपके ज़हन में एक ऐसी महिला की छवि उत्पन्न होगी जो बूढ़ी हो, जिसके पैरों में दर्द रहता हो, थोड़ी कमजोर और शायद किसी बीमारी से पीड़ित। अगर हम आपसे कहें, कि ऐसी महिला की कल्पना करिए जो उम्रदराज़ होने के बावजूद हैडस्टैंड, रिवर राफ्टिंग और ट्रेकिंग करने की क्षमता रखती है, तो आप पहले मानने इसे इंकार कर देंगे या चकित रह जाएंगे। मगर सर्वेश ताई इन सभी बातों को चरितार्थ करती हैं।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य (Yoga Day 2022) में हेल्थ शॉट्स के साथ एक खास बातचीत में हमने सर्वेश जी से जाना जीवन जीने का तरीका और कैसे योग ने उन्हें खुद से प्यार करना सिखाया।

प्रस्तुत हैं सीनियर फोटो जर्नलिस्ट सर्वेश जी के साथ हुई खास बातचीत के कुछ अंश

योगा से माइग्रेन किया कंट्रोल और मेनोपॉज में मिली राहत

उनकी योगा जर्नी के बारे में पूछने पर सर्वेश जी ने बताया कि उन्होनें टीवी पर दूरदर्शन का एक शो देखकर योग की शुरुआत की। पहले वे इसे नियमित नहीं कर पाती थीं, लेकिन फिर उनकी माइग्रेन की तकलीफ बहुत बढ़ गयी और इसे ठीक करने में योग नें उनकी मदद की।

वे बताती हैं कि ”योग करने से मुझे माइग्रेन को हराने में मदद मिली। रोजाना कपालभाति- प्राणायाम करने से मुझे बहुत आराम मिला। इतना ही नहीं, मेनोपॉज में घुटने काफी कमजोर होने लगते हैं और कई तरह की तकलीफ़ें आती हैं। योग ने इसमें भी मेरी काफी मदद की। वाकई में आपको पता भी नहीं चलता कि परोक्ष रूप से योग आपको एक बेहतर जीवन जीने में मदद करता है।”

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बालासन भी आएगा आपके काम। चित्र-शटरस्टॉक।

योग कैसे किसी के भी जीवन में परिवर्तन ला सकता है?

सर्वेश जी कहती हैं – ”जैसे स्वस्थ रहने के लिए खाना और पानी ज़रूरी है ठीक उसी तरह योग भी हमारी ज़रूरत है, जीवन का हिस्सा है। यदि आप खुद को एक्टिव नहीं रखेंगे और योग नहीं करेंगे, तो आप बीमार पड़ जाएंगे, शरीर में दर्द या घुटनों में कमजोरी जैसी कई समस्याएं आपको घेर सकती हैं। हालांकि, यह समस्याएं सभी को आती हैं, मगर योग से यह नियंत्रित हो सकती हैं।

बहुत जरूरी है,आप एक संतुलित डाईट लें और अनुशासन में रहें। मैं खुद कोई मंहगा डाईट प्लान फॉलो नहीं करती। बस रात को खाना नहीं खाती, सिम्पल फूड दाल चावल रोटी यही सब खाती हूं।”

आप अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को कैसे बैलेन्स करती हैं, इस बीच योग के लिए कैसे समय निकालती हैं?

जैसे घर के सब कार्य जरूरी है, उसी तरह शरीर को भी टाइम देना जरूरी है। फिर चाहे आप वर्किंग हो या हाउस वाइफ – खुद को ठीक रखना भी आपकी ज़िम्मेदारी है। आप कितनी भी व्यस्त हों ,आपको अपना काम मैनेज करना आना चाहिए। नहीं तो बहुत सारी बीमारियां आपको घेर लेंगी, मैं भी एक फोटो जनर्लिस्ट हूं, इसके कारण ज्यादातर ट्रैवल करती हूं। मगर फिर भी योगा नहीं छोड़ती क्योंकि यह सबसे ज़्यादा ज़रूरी है।

”जीवन में आपको एक ही मौका मिलता है, इसलिए खुद को स्वस्थ रखें।”

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”जीवन में आपको एक ही मौका मिलता है, इसलिए खुद को स्वस्थ रखें।”

क्या योग के लिए किसी प्रशिक्षक का होना जरूरी है?

‘’किसी भी कार्य को सीखने के लिए पहले आपको मानसिक रूप से तैयार होना पड़ता है, मन में दृढ निश्चय होना जरूरी है, कि मुझे इस कार्य को शिद्दत से निभाना है, तभी आप उसमें सफल हो सकते हैं। अन्यथा कोई भी आपको योग नहीं सिखा सकता।”

”योग करने से शरीर में लचीलापन आता है अगर आपकी बाॅडी फ्लेक्सिबल होगी,तो आप कोई भी कार्य आसानी से कर सकेंगे। बॉडी स्टिफ नहीं होनी चाहिए। मगर यदि आप सोचें कि यह सब एक दिन में हो जाएगा तो ऐसा नहीं है। यह सब एक दिन में नहीं होता, इसके पीछे है संतुलित खानपान, नियमित दिनचर्या और अनुशासन।”

योग से पहले और बाद के जीवन क्या अंतर आता है? क्या योग करने के बाद वाकई जीवन बदल जाता है?

यह समग्र जीवन पद्धति है, आपको शारीरिक और मानसिक रूप से फ्लेक्सिबल बनाता है। मगर यदि आपको खुद को समग्र रूप से स्वस्थ रखना है, तो आपको जीवन जीने की कला आनी चाहिए। जिसमें ध्यान करना, हेल्दी खाना, खुद को खुश रखना और अपने लिए समय निकालना यह सभी ज़रूरी है।

आप हर समय हंसती-मुस्कुराती रहती हैं, क्या है इस खुशी का राज़

मैं खुद को खुश रखना पसंद करती हूं। और वो सब करती हूं जो मुझे खुशी देता है। खुद को खुश रखने के लिए यदि आपको गोल गप्पे पसंद तो वो भी खाएं, बस किसी काम को मन मारकर न करें।

मैं खाना भी सोच समझकर खाती हूं, क्योंकि आपका पेट कोई कूड़ेदान नहीं है कि आप कुछ भी खा लें। मैं कभी-कभी सिर्फ लिक्विड डाइट लेती हूं। कभी ड्राई फ्रूट्स, सुबह खाना मन से खाती हूं, और रात को नहीं खाती। साथ ही सभी मौसमी फल मुझे बहुत पसंद हैं।

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”जीवन में आपको एक ही मौका मिलता है, इसलिए खुद को स्वस्थ रखें।” चित्र : सर्वेश ताई

अपनी मेंटल हेल्थ के लिए आप क्या करती हैं?

”योग के साथ-साथ मेडिटेशन भी जरूरी है। परेशानियां सबके जीवन में होती है। मेरे भी हैं! पर मैंने इन सबको शरीर पर हावी नहीं होने दिया, क्योंकि जीवन का नाम ही संघर्ष है। जिस दिन आप ये मान लेंगे जिन्दगी आसान हो जायेगी।”

”अक्सर मैं अपनी हमउम्र महिलाओं को देखती हूं, जो जीवन से हार मानने लगी हैं। मगर मैं तो अपने आपको युवा मानतीं हूं, मेरे बाल भी काले हैं, डाई नहीं करती, और तो और दांत भी नहीं टूटे हैं। मुझे तो लगता ही नहीं कि मेरी उम्र इतनी हो गई, मैं आज भी खुद को जवान महसूस करती हूं।”

क्या आप योग के साथ प्रकृति के लिए भी समय निकाल पाती हैं?

सर्वेश जी बताती हैं कि – ”मुझे कभी बडे घर और गाडी का शौक नहीं रहा, मैं आज भी भारत अपने टू व्हीलर पर घूमना पसंद करती हूं। मुझे पौधों से भी बहुत प्रेम है, ये आपको पाजिटिविटी देते हैं। प्रकृति से तारतम्य बना कर रखना चाहिए, मैं सड़क के पौधो को भी पानी देती हूं, इनसे ही हमारा जीवन है।

चलते – चलते

सर्वेश जी कहती हैं कि – ”बहुत बार सुना होगा, जान है तो जहान है, पर कोई इस लाइन को सीरियसली नहीं लेता। लोग अक्सर अनसुना कर देते हैं और जब बीमारियां आपको जकड़ लेती है, तब आपको होश आता है, और तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। ये धारणा गलत है कि एक उम्र के बाद आप शारीरिक रूप से कमजोर हो जातें हैं। अगर आपने अपने शरीर को शुरू से एक्टिव रखा है, तो यह इतना भी मुश्किल नहीं।

”ये जीवन बार बार नहीं मिलता, इसको खूबसूरती से जीना चाहिए, जीवन जीना भी एक कला है। आप जितना अनुशासित रहेंगे जीवन रूपी यात्रा उतनी सुगम हो जाएगी।”

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ऐश्‍वर्या कुलश्रेष्‍ठ ऐश्‍वर्या कुलश्रेष्‍ठ

प्रकृति में गंभीर और ख्‍यालों में आज़ाद। किताबें पढ़ने और कविता लिखने की शौकीन हूं और जीवन के प्रति सकारात्‍मक दृष्टिकोण रखती हूं।