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मैंने वही किया, जो एक डॉक्टर की पत्नी को शोभता था, ये है डॉ. मंजु शर्मा महापात्र की कहानी

Published on:1 July 2021, 10:30am IST
आज डॉक्टर्स डे है, उन मसीहाओं को समर्पित एक विशेष दिन, जो कोरोना महामारी के समय में कभी हमारी ढाल बने, तो कभी उपचार। आज उन डॉक्टरों को भी सलाम करें, जो हमारे बीच नहीं रहे।
ऐश्‍वर्या कुलश्रेष्‍ठ
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डॉ. मंजु शर्मा महापात्र ने अपने पति और कोरोना वॉरियर स्वर्गीय डॉ. राहास बिहारी महापात्र को पीपीई किट पहनकर दिया आखिरी सैल्यूट।
डॉ. मंजु शर्मा महापात्र ने अपने पति और कोरोना वॉरियर स्वर्गीय डॉ. राहास बिहारी महापात्र को पीपीई किट पहनकर दिया आखिरी सैल्यूट।

वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (Covid-19) ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले रखा है। दुनिया भर में इस वायरस से संक्रमित होने वालों और जान गंवाने वालों का आंकड़ा डराने वाला रहा है। इस दौर में शायद ही कोई ऐसा परिवार बचा हो, जिसे कोरोना वायरस कोई आघात न देकर गया हो।

डॉक्टर, नर्स, अन्य स्वास्थ्य कर्मी और उनके परिवार जिस हिम्मत से इस कठिन दौर में समाज का संबल बने रहे, वह अतुलनीय है। ऐसी ही एक स्त्री हैं डॉ. मंजु शर्मा महापात्र। जिन्होंने अपने पति और कोरोना वॉरियर स्वर्गीय डॉ. राहास बिहारी महापात्र को पीपीई किट पहनकर आखिरी सैल्यूट दिया। मंजु शर्मा खुद भी उस समय कोरोना से पीड़ित थीं, जब उन्हें अपने डॉक्टर पति को अंतिम विदाई देनी पड़ी।

आइए जानते हैं डॉ. मंजु शर्मा महापात्र से जटिलतम समय के उनके अनुभव उन्हीं की जुबानी

58 वर्षीय डॉ. मंजु शर्मा महापात्र प्रियदर्शिनी महिला महाविद्यालय, राउरकेला (ओडिशा) में हिन्दी विभागाध्यक्ष हैं। इसके अलावा वे एक लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं। पर इन सभी से ज्यादा वे गर्व करती हैं कि वे एक कर्तव्यनिष्ठ डॉक्टर की पत्नी हैं।

उनके पति इस्पात जनरल अस्पताल, राउरकेला में फिजिशियन थे। 2020 का समय देश भर में कोरोनावायरस की पहली दस्तक थी। एक ऐसा भयावह समय, जिसके लिए आम जन तो क्या, स्वास्थ्य जगत से जुड़े विशेषज्ञ भी तैयार नहीं थे। डॉ. महापात्र तमाम अन्य डॉक्टरों की तरह मरीजों की सेवा में लगे थे। इस बात की परवाह किए बिना कि उन्हें भी कई बीमारियों से जूझना पड़ सकता है।

 

स्वर्गीय डॉ. राहास बिहारी महापात्र एक कर्मठ डॉ. और कोरोना वॉरियर थे.
स्वर्गीय डॉ. राहास बिहारी महापात्र एक कर्मठ डॉ. और कोरोना वॉरियर थे.

 

डॉ मंजु शर्मा कहती हैं , “उन्हें अपने मरीजों की इतनी फिक्र रहती थी कि वे कभी भी घर पर समय से नहीं आ पाते थे। शुरू से उनके स्वभाव में समाज के प्रति समर्पण और सेवाभाव रहता था। उनके लिए उनके मरीज हमेशा से पहली प्राथमिकता पर थे।”

कोविड – 19 से एक डॉक्टर की जंग

डॉ मंजु बताती हैं कि हमारे दोनों बच्चे विदेश में हैं। और डॉक्टर साहब ने अपने कर्तव्य के सामने अपने स्वास्थ्य की भी चिंता नहीं की। अपनी ड्यूटी के दौरान ही उन्हें एक दिन हल्का बुखार महसूस हुआ। जब टेस्ट करवाया गया तो वे जुलाई 26, 2020 को कोरोना पॉजिटिव पाए गए। कुछ डॉक्टर पारीवारिक मित्रों ने उन्हें हॉस्पिटल में एडमिट करवाया।

शुरुआत के कुछ दिन बेहद सामान्य रहे, पर कुछ दिन मुझे भी कोरोना के लक्षण प्रकट होने लगे और टेस्ट करवाया गया तो मेरा टेस्ट भी कोविड पॉजिटिव आया।

कोविड ने हमें जुदा कर दिया

डॉक्टर साहब हॉस्पिटल में दाखिल थे और मैं घर पर अकेली, अपनी देखभाल कर रही थी। गर्म पानी, काढ़ा और नियमित गायत्री मंत्र का जाप ही अब मेरा संबल था। उस समय किसी तरह की हाउस हेल्प भी उपलब्ध नहीं थी। खैर, मैं धीरे-धीरे ठीक होने लगी।

डॉ. मंजु और उनके पति, कोरोना वॉरियर स्वर्गीय डॉ. राहास बिहारी महापात्र.
डॉ. मंजु और उनके पति, कोरोना वॉरियर स्वर्गीय डॉ. राहास बिहारी महापात्र.

डॉक्टर साहब की हालत में भी सुधार हो रहा था और यह तय था कि 7 अगस्त, 2020 को उन्हें डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। मगर इसी दौरान उनकी हालत और बिगड़ गई, जिसके चलते उन्हें एक दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करना पड़ा।

डॉ मंजु शर्मा याद करती हैं कि “वह समय मेरे लिए बहुत कठिन था, मैं अपने पति से सिर्फ वीडियो कॉल पर बात करती और कभी-कभी उन्हें सिर्फ दूर से देख पाती थी। पर मैंने हिम्मत नहीं हारी और खुद को पॉजिटिव रखने के लिए अध्यात्म का सहारा लिया।’’

एक डॉक्टर को आखिरी सलाम

डॉ महापात्र ने अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए इस युद्ध में 28 अगस्त, 2020 को दुनिया को अलविदा कह दिया। श्रीमती मंजू ने उन्हें पीपीई किट पहनकर एक वॉरियर की तरह सलाम किया।

पीपीई किट पहनकर दी अपने पति को अंतिम सलामी।
पीपीई किट पहनकर दी अपने पति को अंतिम सलामी।

मंजु महापात्र अपने दिवंगत डॉक्टर पति को याद करते हुए कहती हैं कि उनकी इच्छा थी कि मैं उनसे बात करूं। वह एक कठिन और उतार – चढ़ाव से भरा समय था, हम वीडियो कॉल पर बात करते, उनकी हालत बिगड़ती देख मैं कभी-कभी टूट जाती, पर मुझे हिम्मत बनाए रखनी थी। गहन भावनात्मक क्षणों में भी मैंने प्रोटोकॉल नहीं तोड़ा और वही किया जो एक सीनियर डॉक्टर की पत्नी को शोभा देता था।’’

मैं इस तरह डॉक्टर साहब को याद करती हूं

दांपत्य का लंबा साथ निभाने वाले पति को कोई पत्नी भला कैसे भूल सकती है। पर उन्हें याद करने का मंजु शर्मा महापात्र का अंदाज बहुत संजीदा है। यूं तो वे कॉलेज में प्राध्यापक हैं, पर अपना खाली समय उन्होंने पूरी तरह से कोरोना की लड़ाई के लिए दे दिया है। वे घर में अपनी सिलाई मशीन पर जरूरतमंदों के लिए मास्क तैयार करती हैं।

डॉ. मंजु की डॉ साहब के साथ कुछ पुरानी यादें.
डॉ. मंजु की डॉ साहब के साथ कुछ पुरानी यादें.

डॉ. मंजु कहती हैं, “जीते जी मेरे पति ने भी समाज की सेवा की, मैं उन्हीं के दायित्वों को आगे बढ़ा रही हूं। कोरोना से पीड़ित लोगों की जितनी भी मदद होती है, मैं करती हूं। फिर चाहें उन्हें उचित दवा और इलाज के लिए मदद देना हो या उनके परिवार के लिए राशन आदि उपलब्ध करवाना। मैं इसी तरह डॉक्टर साहब को याद करती हूं।”

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ऐश्‍वर्या कुलश्रेष्‍ठ ऐश्‍वर्या कुलश्रेष्‍ठ

प्रकृति में गंभीर और ख्‍यालों में आज़ाद। किताबें पढ़ने और कविता लिखने की शौकीन हूं और जीवन के प्रति सकारात्‍मक दृष्टिकोण रखती हूं।