घरवालों का साथ न मिलने पर भी साहस के साथ मल्टीपल स्केलेरोसिस से लड़ी जंग, दिया दृढ़ संकल्प शक्ति का परिचय

नेहा शर्मा 40 की उम्र में मल्टीपल स्क्लेरोसिस की शिकार हुईं। बावजूद इसके उन्होंने कठोर परिस्थिति के आगे हार नहीं मानी और पूरी हिम्मत के साथ एक बार फिर कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ने को तैयार हो गईं
Neha sharma ne ladi multiple sclerosis se jung
मल्टीपल स्केलेरोसिस जिसे एमएस के नाम से जाना जाता है, एक ऐसा ऑटो इम्यून डिज़ीज़ है, जो सेंट्रल नर्वस सिस्टम को प्रभावित करता है।
ज्योति सोही Published: 3 Jun 2024, 14:00 pm IST
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व्यक्ति को जीवन में ढ़ेरों मुश्किलात का सामना करना पड़ता है, मगर जो उन उलझनों का मुकाबला करते हुए आगे बढ़ जाते हैं। असल मायने में वही फाइटर कहलाते हैं। फिर चाहे वो शारीरिक चुनौती हो, मानसिक समस्या हो या भावनात्मक परेशानी। अपनी हिम्मत और हौंसलों से आगे बढ़ने वाली ऐसी ही एक शख्सियत है नेहा शर्मा। 40 वर्षीय नेहा साल 2016 में मल्टीपल स्क्लेरोसिस (multiple sclerosis) यानि एमएस जैसे ऑटोइम्यून डिज़ीज़ की शिकार हुईं। बावजूद इसके उन्होंने इस कठोर परिस्थिति के आगे हार नहीं मानी और पूरी हिम्मत के साथ एक बार फिर कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ने को तैयार हो गईं। जानते हैं नेहा शर्मा के साहस और संकल्प की कहानी।

नेहा हुईं मल्टीपल स्क्लेरोसिस के लक्षणों से ग्रस्त (multiple sclerosis symptoms)

नेहा जीवन की उलझनों में इस कदर मसरूफ थी कि अपनी शारीरिक समस्या पर ध्यान नहीं दे पा रही थी। शुरुआत में उन्हें चक्कर आने और डिज़ीनेस की समस्या का सामना करना पड़ा, जिसे वो मामूली कमज़ोरी (weakness) या गर्मी का लक्षण मानकर नज़रअंदाज़ कर रही थीं। मगर फिर उनके हाथ.पैर सुन्न रहने लगे और डबल विज़न (double vision) की परेशानी से दो चार होने लगीं। शरीर में दिनों दिन बढ़ रही समस्या को लेकर नेहा बेहद चिंतित रहने लगीं। उन्होंने कई फिजिशियन्स और ईएनटी स्पेश्यलिस्ट्स से सलाह की, मगर उनकी शारीरिक समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई थी। उन्हें कही से भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल पा रहा था।

मल्टीपल स्क्लेरोसिस किसे कहते हैं (What is multiple sclerosis)

ये एक ऐसा ऑटो इम्यून डिज़ीज़ (auto immune disease) है, जो सेंट्रल नर्वस सिस्टम (central nervous system) को प्रभावित करता है। इस रोग से ग्रस्त लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता माइलिन पर हमला करती है, जो नर्व फाइबर के इर्द गिर्द प्रोटकक्टिव लेयर को बनाती है।

मल्टीपल स्केलेरोसिस ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड (spinal cord) को प्रभावित करती है। इससे ग्रस्त लोगों को हर पल थकान, चलने में कठिनाई और बातचीत में परेशानी का सामना करना पड़ता है। नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंस के अनुसार ब्रेन से रिलेटिड मल्टीपल स्क्लेरोसिस डिज़ीज़ से कम उम्र की महिलाएं ज्यादा मात्रा में ग्रस्त होती हैं।

Multiple sclerosis kya hai
किसी भी चीज़ पर ध्यान केंद्रित करने की क्षमता में आने वाली कमी को मल्टीपल स्केलेरोसिस कहा जाता है। चित्र : अडोबी स्टॉक

परिवार का साथ नहीं मिला

एक दिन सुबह उठते ही अचानक चक्कर आने लगे और सिर में भारीपन महसूस होने लगा। शाम तक दर्द ठीक न होने पर डॉक्टर से जांच करवाई। मगर उन्होंने कमज़ोरी की दवा दे दी। अब ये समस्या लगातार बढ़ रही थी। इस बीमारी के इलाज के लिए ससुरालवालों का सहयोग नहीं मिल पाया। ऐसे में नेहा अपने माता पति के पास लौट आई और इलाज को नए सिरे से करवाना शुरू किया। इसके चलते चक्कर आना और एकाग्रता की कमी का मुख्य रूप से सामना करना पड़ रहा था। इस समस्या को लेकर नेहा बेहद परेशान रहने लगीं।

शुरूआत में किया मुश्किलात का सामना

इन सबके बाद नेहा ने न्यूरोलॉजिस्ट से मिलने की ठान की। उनकी ये तलाश उन्हें डॉ प्रवीण गुप्ता, चीफ ऑफ न्यूरोलॉजी एंड प्रिंसीपल डायरेक्टरए फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम तक ले पहुंची। डॉ गुप्ता के संपर्क में आने के बाद अब नेहा थोड़ी निश्चिंत दिख रही थी। मगर वहां उन्हें एमआरआई और कुछ अन्य स्कैन्स समेत कई टेस्ट करवाने की सलाह दी गई।

उनकी हालत को देखते हुए करीबन एक सप्ताह तक उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया और इसके बाद जाकर उनका डायग्नॉसिस (diagnosis) हुआ। डॉ गुप्ता ने उनके सारे टैस्ट किए और उन्हें रोग के बारे में जानकारी भी दी। उन्होंने मरीज को एमएस की जटिलताओं के बारे में न सिर्फ विस्तार से समझाया बल्कि उससे जूझने के तौर.तरीके भी बताए।

नहीं मानी जीवन से हार

मल्टीपल स्क्लेरोसिस (multiple sclerosis) एक ऑटो इम्यून डिज़ीज़ है। इससे ग्रस्त नेहा को शुरुआत में साल में दो बार अस्पताल में भर्ती करवाया जाता था। मगर डॉ गुप्ता के संपर्क में आने के बाद उनकी हालत में दिनों दिन सुधार आने लगता है। इससे उन्हें हर साल अस्पताल में भर्ती किए जाने की आवश्यकता नहीं है। इसी के चलते नेहा पिछले चार सालों में एक बार ही अस्पताल में एडमिट हुई है।

स्वास्थ्य में आने वाले परिवर्तन ने नेहा का दोबारा से साहस के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। नेहा के स्वास्थ्य में आने वाले सुधार ने उन्हें जीवन जीने की नई दिशा दिखाई। इससे धीरे धीरे उनके स्वास्थ्य में सुधार महसूस हो रहा था। अपने स्वास्थ्य को लेकर नेहा अब नॉर्मल महसूस कर रही थीं। इस लाइफ लॉन्ग डिज़ीज़ के दौरान बीमारी पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए दवाई को समय समय पर रेगुलेट करना आवश्यक है।

Jaanein kaise ladi multiple sclerosis se jung
स्वास्थ्य में आने वाले परिवर्तन ने नेहा का दोबारा से साहस के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। नेहा के स्वास्थ्य में आने वाले सुधार ने उन्हें जीवन जीने की नई दिशा दिखाई।

चुनौतियों का किया डटकर सामना

ई कॉमर्स से अपने करियर की शुरूआत करने वाली नेहा शर्मा इस वक्त बतौर एवीपी सॉफ्टवेयर प्रॉक्यूरनमेंट पर काम कर रही हैं। उनका मकसद जीवन में आगे बढ़ने अपने स्वस्थ्य का ख्याल रखने के अलावा करियर में नई मंजिलों को पाना है। नेहा का जीवन पहले के समान ही रेगुलर और एक्टिव हो चुका है। अब वो अपनी दिनचर्या में बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रही हैं। वे एमएस जैसे रोग तथा मेंटल हेल्थ (mental health के मैनेजमेंट के लिए डॉ प्रवीण गुप्ता का हृदय से आभार जताती हैं।

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नेहा की ये कहानी समर्पित हेल्थ केयर प्रोफेशनल्स (Healthcare professionals) की मरीज के प्रति केयर और चिंता को दर्शाता है। नेहा वास्तव में साहस और संकल्पशक्ति की मिसाल हैं जिसके दम पर आज वह प्रेरणादायी जीवन जी रही हैं।

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लेखक के बारे में

लंबे समय तक प्रिंट और टीवी के लिए काम कर चुकी ज्योति सोही अब डिजिटल कंटेंट राइटिंग में सक्रिय हैं। ब्यूटी, फूड्स, वेलनेस और रिलेशनशिप उनके पसंदीदा ज़ोनर हैं। ...और पढ़ें

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