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योग के सहारे जीती कोरोना से जंग : ये है एक डायबिटिक महिला की हिम्‍मत और अनुशासन की कहानी

Published on:3 September 2020, 21:00pm IST
कोविड-19 से लड़ने और जीतने के लिए मन की ताकत ज्यादा आवश्यक है।
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कोविड-19 से लड़ने में कैसे सहायक है योग, जानिए। चित्र- सुषमा सरन।

मैं हूं सुषमा सरन, मैं 42 वर्ष की हूं, दो बच्चों की मां हूं, दोनों ही पढ़ाई और काम के चलते अन्य शहरों में रहते हैं। लॉकडाउन में दोनों बच्चे वहीं रह गए। मैं डायबिटीज की मरीज हूं इसलिए हमने घर में किसी का आना-जाना बिल्कुल बन्द कर रखा था। मगर मैं शहर में कई समाजसेवी संस्थाओं से जुड़ी हुई थी और इस महामारी के दौरान आगे बढ़कर काम करना भी मेरा दायित्व था।

कोविड-19 से रिकवरी के बारे में जानना भी जरूरी है। चित्र: शटरस्‍टॉक

डायबिटिक होने के साथ-साथ मुझे हाइपरटेंशन और थायराइड की भी समस्या है, जिसके कारण मैं कोरोना संक्रमण के सबसे क्रिटिकल जोन में थी। योग शिक्षा में डिप्लोमा होल्डर होने के कारण योग मेरी दिनचर्या का हिस्सा रहा है। योग के साथ ही आयुर्वेदिक औषधियों का मेरे आहार में महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। सुबह उठते ही गिलोय का सेवन, तुलसी, आंवला इत्यादि लेना, काढ़ा बनाकर पीना मैंने अप्रैल से ही शुरू कर दिया था।

कोविड-19 के पहले लक्षण

फिर भी अपने दायित्वों के चलते फील्ड में काम कर रहे कार्यकर्ताओं से मिलना होता ही था। प्रीकॉशन्स बरतने के बावजूद मैं कोरोना से संक्रमित हो गयी। 8 अगस्त, 2020 से तीन-चार दिन पहले मुझे हल्का बुखार आया। गले में थोड़ा दर्द था। अन्य कोई समस्या नहीं थी। इसलिए मैंने एजीथ्रोमाईसिन 500 और पेरासिटामोल 650 एमजी लेनी शुरू कर दी। बुखार तो खत्म हो गया, लेकिन गले में दर्द था।

8 अगस्त की सुबह मुझे गंध न आने का एहसास हुआ तो मुझे ऐसा लगा कि हो सकता है कि मैं कोरोनावायरस की शिकार हो गई हूं। मैंने तुरंत अपने पति को कहा, उन्होंने इसका संज्ञान लेते हुए मुझे कोरोना एंटीजन टेस्ट कराने की सलाह दी। टेस्ट कराने पर मैं कोरोना पॉजिटिव पाई गई।

 

चित्र- सुषमा सरन।

जब मुझे पता चला मैं कोविड-19 पॉज़िटिव हूं…

मेडिकल टीम के निर्देश पर मैं अपने घर सेपरेट रूम में होम आइसोलेट हो गई। मेरे पास ग्लूकोमीटर, बीपी मशीन, ऑक्सीमीटर, थर्मामीटर आदि सभी उपकरण उपलब्ध थे । आइसोलेशन में रहते हुए मैंने मेडिकल टीम द्वारा जारी निर्देशों का पालन किया। उनके द्वारा दी गई दवाएं नियमित रूप से खाती रही। इसके साथ ही मैंने पतंजलि की कोरोनिल दवा का सेवन किया।

हालांकि मैं जानती हूं कि कोरोना कोई हौआ नहीं है। यह एक साधारण फ्लू है जो 8 -10 दिन तक आइसोलेट होने पर स्वयं प्रभावहीन हो जाता है, लेकिन फिर भी मुझे कुछ घबराहट हुई। कोविड-19 संक्रमण शरीर पर बहुत गंभीर प्रभाव डालता है। लेकिन उससे भी गंभीर प्रभाव पड़ता है आपकी मनोस्थिति पर। यही मेरे साथ भी हुआ, मैं टेस्ट पॉज़िटिव आने के बाद से ही घबराने लगी। इसके साथ- साथ शरीर में थकान और कमजोरी इतनी थी कि मेरा पूरा रूटीन गड़बड़ा गया।

योग-ध्यान ने बढ़ाया मनोबल

योग की सबसे अच्छी बात यही है कि यह व्यायाम मात्र नहीं है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को दुरुस्त रखता है। कोविड-19 संक्रमित होने के बाद मुझे डर और घबराहट होना सामान्य था, लेकिन यह घबराहट तनाव का रूप न ले, यह मुझे ही ध्यान रखना था। मैंने हर दिन योग जारी रखा। आइसोलेटेड थी इसलिए समय बहुत था, काम कुछ नहीं। मैंने इस समय को ध्यान लगाने में बिताना शुरू किया। इस दौरान मेरे पति घर का सारा काम करने के साथ-साथ मेरा भी ख्याल रखते थे। योग और ध्यान से मुझे एक हफ्ते में स्वस्थ महसूस होने लगा।

 

कोविड-19 संक्रमण के दौरान सबसे जरूरी है अपनों का साथ और प्यार। चित्र- सुषमा सरन।

आईसोलेशन की अवधि 10 दिन की थी। 10 दिन के बाद 7 दिन अतिरिक्त थे,यानी कुल 17 दिन की अवधि थी। आइसोलेट होने के दौरान मेरे पास डॉक्टर्स के फोन आते थे। वे मेरे स्वास्थ्य के विषय में हालचाल लेते थे और मुझे उत्साहित भी करते थे।

17 दिन बाद जब मैं पूरी तरह स्वस्थ हो गई, तो मुझे एहसास हुआ कि मेरे जैसे और कितने लोग इस संक्रमण का शिकार हो रहे हैं। लेकिन चिंता और तनाव से न लड़ पाने के कारण वे कोरोना को हरा नहीं पाते। और उसके साथ ही समाज का कोरोना मरीजों के प्रति जो रवैया है, वह भी लोगों को सामान्य जीवन में लौटने नहीं देता।

कोरोनावायरस से मैंने क्‍या सीखा

मैं सभी से यह कहना चाहती हूं कि कोरोना कोई हौआ नहीं है। आपको सिर्फ सावधानी बरतने की आवश्यकता है। अगर आपका स्वास्थ्य सही नहीं है, तो चिंता न करें। सामाजिक संकोच का पर्दा उतार कर अपना कोरोना टेस्ट करवाएं। सरकार निःशुल्क कोरोना टेस्ट कर रही है। यदि आप पॉजिटिव हुए तो समय पर टेस्ट कराकर अन्य लोगों को संक्रमित होने से बचा सकते हैं। इस प्रकार आप एक जागरूक नागरिक होने का परिचय दे सकते हैं।

याद रखिए, कोरोना को लेकर बिलकुल भ्रमित न हों। कुछ लोगों में यह भ्रांति है कि यदि आपका स्वास्थ्य सही नहीं है और आप यदि ऐसे में कोरोना टेस्ट कराते हैं तो यह समझ लिया जाता है कि आप कोरोना पॉजिटिव ही आएंगे। यह सोचना नितान्त गलत है। मेरे पति ने अपना स्वास्थ्य खराब होने पर कोरोना टेस्ट कराया जिसमें वह निगेटिव पाए गए। अब मैं पूरी तरह से स्वस्थ हूं।

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ये बेमिसाल और प्रेरक कहानियां हमारी रीडर्स की हैं, जिन्‍हें वे स्‍वयं अपने जैसी अन्‍य रीडर्स के साथ शेयर कर रहीं हैं। अपनी हिम्‍मत के साथ यूं  ही आगे बढ़तीं रहें  और दूसरों के लिए मिसाल बनें। शुभकामनाएं!