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मैंने 2 साल पहले दौड़ना शुरू किया था और आज मैं हूं बिल्‍कुल फिट और खुश

Published on:3 August 2020, 15:30pm IST
वैसे तो कहा जाता है कि रनिंग एक्सरसाइज है, लेकिन अक्षिता के लिए रनिंग उनका लाइफस्टाइल है।
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अब मैं रनिंग के बिना नहीं रह सकती। चित्र: Akshita Chhangani

जॉन बिंघम के शब्द हैं “मैं एक रनर हूं। कितना तेज दौड़ता हूं या कितनी दूर दौड़ता हूं यह मायने नहीं रखता। रनिंग एक सफर है,मंज़िल नहीं।”

मेरा रनिंग का सफर शुरू हुआ 2018 में, जब मुझे एहसास हुआ कि मैं बहुत अनफिट हो गयी हूं। मेरी जॉब के बाद से मैंने 18 किलो वजन गेन किया था। मैं काफी जंक फूड खा रही थी और जॉब भी बैठने वाली थी। अब मैंने ठाना कि मैं फ़िटनेस पर ध्यान दूंगी। मैंने योग, जिम और पिलाटेस सब ट्राय किये, वजन कम भी हुआ, लेकिन मैं मोटिवेटेड महसूस नहीं कर रही थी।

फिर मैंने रनिंग शुरू की। मैंने जून में एक रेस में हिस्सा लिया था जिसमें 3 किलोमीटर भागना था। पहले तो मैं इसे बहुत हल्के में ले रही थी, लेकिन जब मुझे एहसास हुआ कि मुझे भागने में इतनी कठिनाई हो रही है, तो मैंने तय किया कि मैं दौडूंगी। मैं घर के पास ही थोड़ा-थोड़ा दौड़ने लगी। रनिंग में मेरी जेब पर कोई एक्स्ट्रा दबाव नहीं पड़ रहा था। यह मेरे लिए सबसे अच्छी बात थी। अगले दो-तीन महीने मैं तीन किलोमीटर रोज़ाना दौड़ना शुरू किया।

इंस्टाग्राम पर इस पोस्ट ने मेरे जीवन में बड़ा परिवर्तन किया

मैंने बॉम्बे रनिंग की एक पोस्ट देखी, एक इवेंट था जिसमें दस दिन 10 किलोमीटर दौड़ना था, यानी कि 10 दिन में 100 किलोमीटर। मुझे यह इंटरेस्टिंग लगा, और मैंने हिस्सा लेने का सोचा। शुरुआती दिनों में थोड़ी मुश्किल हुई, लेकिन मैंने हार नहीं मानी। मैं जानती थी यहां हार मान ली तो कभी खुद को पुश नहीं कर पाऊंगी।

रनिंग सिर्फ एक्‍सरसाइज नहीं थेरेपी भी है।चित्र: Akshita Chhangani

मैंने वह चैलेंज पूरा किया। मैं कितना तेज या कितनी धीरे दौड़ी इस बात पर मेरा ध्यान नही था। मेरा ध्यान था इस टारगेट को पूरा करना। इवेंट में हिस्सा लेने वाले बाकी प्रतिभागियों ने मुझे मोटिवेट किया, मेरे दोस्तों ने भी मेरा मनोबल बढ़ाया। मैं देर रात के प्लान कैंसिल करके सुबह 4 बजे दौड़ने जाती थी। संडे को मैं 3:30 बजे उठने लगी। इसके बाद मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

मैराथन का सफर

मैं खुद को हाफ मैराथन के लिए तैयार करने लगी। सितंबर 2019 में मैंने अपनी पहली हाफ मैराथन दौड़ी पंचगनी में। उसके बाद मैंने 5 और हाफ मैराथन दौड़ में हिस्सा लिया और अब मैराथन की ट्रेनिंग करने लगी हूं।

मेरे लिए मेडल से बड़ी खुशी है। चित्र: Akshita Chhangani

रनिंग अब मेरे लिए सिर्फ एक एक्सरसाइज नहीं है,यह मेरी जीवनशैली का एक हिस्सा है। धीरे-धीरे मेरा खानपान बदल गया, मेरे रूटीन में बदलाव आया। रनिंग मुझे रिलैक्स करती है, और तनाव को दूर रखती है। यह मेरे लिए मेडिटेशन के समान है।

आज भी मैं उतने ही उत्साह के साथ उठती हूं और दौड़ने निकलती हूं। मेरे दोस्तों ने मुझे बहुत मोटिवेट किया है। मैं बस खुद से यही कहती हूं कि यह सफर अभी शुरू हुआ है।

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