स्पाइनल कॉर्ड इंजरी से गर्ल्स ऑन हॉट व्हील तक का सफर, पढ़िए करिश्मा लांबा की प्रेरक कहानी

जीवन में होने वाला हर हादसा भी कई बार नई सीख दे जाता है। जरूरत है उस सीख को सकारात्मक रूप में पहचानने की। स्पाइनल कॉर्ड इंजरी सर्वाइवर करिश्मा लांबा न सिर्फ अपने जीवन से सीखती हैं, बल्कि दूसरों को भी प्रेरित करती रहती हैं।

karishma lamba
करिश्मा लांबा हर लड़की के लिए प्रेरणादायी हैं 1
टीम हेल्‍थ शॉट्स Published on: 10 September 2022, 19:00 pm IST
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जब वह खड़ी हो सकती थी, तो उन्होंने नृत्य किया। जब वे अपने पैरों पर ठीक से खड़ी भी नहीं हो पाती थीं, तब उन्होंने इस चुनौती को स्वीकारा। मिलिए युवा और उत्साही महिला करिश्मा लांबा से, जिन्होंने रीढ़ की हड्डी में चोट लगने के बावजूद खुद को कभी टूटने नहीं दिया!

करिश्मा सोशल मीडिया मॉनीकर #GirlOnHotWheels चलाती हैं। इस मंच के माध्यम से वे ऐसे कई युवाओं को प्रेरित करने के मिशन पर हैं, जो किसी न किसी चिकित्सा कारणों से खुद को असमर्थ पाते हैं। उनके इंस्टाग्राम और यूट्यूब पोस्ट दूसरों के जीवन में आशा की किरण जगाते हैं। ऐसे लोग जो किसी चोट या दुर्घटना के आघात से निपटने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

उन्हें लगभग 5 साल पहले गोवा में रीढ़ की हड्डी में चोट लगी थी। वे अपने चार दोस्तों के साथ एक होटल की बालकनी पर खड़ी थीं। बालकनी टूट गई और वे गिर गईं। इससे उनकी रीढ़ की हड्डी में चोट लग गई। जिससे उनके कमर से नीचे के हिस्से में सेंसेशन ही जाती रही। करिश्मा के लिए जीवन हमेशा के लिए बदल गया। लेकिन यह चोट उनके जीवन के उत्साह को कम नहीं कर पाई।

पिछले आधे दशक से वह खुद को “मानसिक, भावनात्मक, शारीरिक और आध्यात्मिक रूप से सशक्त कर रही हैं।

अब नई दिल्ली के इंडियन स्पाइनल इंजरी सेंटर में वे एक सोशल मीडिया अधिकारी हैं। अब वे ऐसे युवाओं के लिए मिसाल बन गई हैं, जो रीढ़ की हड्डी में लगी चोट के कारण प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं।

नृत्य के लिए प्यार बना संबल 

हेल्थशॉट्स से हुए साक्षात्कार में करिश्मा ने बताया, “मुझे अपने स्कूल और कॉलेज के दिनों से ही डांस करना पसंद रहा है। चोट लगने के बाद मैंने रीढ़ की हड्डी की चोट से बचने वाले लोगों के बारे में सुना। वे व्हीलचेयर पर रहते हुए नृत्य करने लगे और अचानक उनके पैर की उंगलियां हिलने लगीं। इस बात से मेरे दिमाग में एक घंटी बजी। मुझे लगा कि यह मेरे शरीर के साथ फिर से जुड़ने का एक शानदार तरीका हो सकता है।”

करिश्मा ने बताया, “धीरे-धीरे, मैंने अपने पैरों से जुड़ना शुरू कर दिया। जब मैं नृत्य करती हूं, तो मुझे खुशी होती है। इसके कारण निकले हार्मोन नसों में कुछ टूटे हुए कनेक्शन उत्पन्न करते हैं।” करिश्मा मानती हैं कि नृत्य एक ऐसी चीज है, जिसे आप पहले अपने दिल से करते हैं, फिर आंखों और फिर अपने शरीर से।

#गर्लऑनहॉटव्हील्स (#GirlOnHotWheels)

महामारी के साल में करिश्मा इस हैशटैग और व्यक्तिगत सोशल मीडिया पहचान के साथ आईं। वे अपने वर्कप्लेस के अलावा, अपनी भूमिका से परे जाकर और अधिक करना चाहती थीं।

करिश्मा कहती हैं, “मैं युवा लड़कों और लड़कियों को समान परिस्थितियों में प्रोत्साहित करना चाहती थी। मैं उन्हें बताना चाहती थी कि जीवन अभी भी जीने योग्य है। यह जीवन सुंदर हो सकता है। आपको इसके लिए बहुत अधिक नहीं करना है। बैठे-बैठे भी आप बहुत कुछ कर सकती हैं।”

ट्रेंडिंग गानों पर उनके वीडियो आते रहते  हैं। इसकी मदद से वे यह बताना चाहती हैं कि आप बैठे-बैठे भी सुखी जीवन जी सकती हैं।

जब नाम के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि उनका एक करीबी दोस्त हमेशा उनके व्हीलचेयर को ‘हॉट व्हील्स’ कहता था। उन्हें यह सुनना अजीब लगता था। किसी दिन, #GirlOnHotWheels उनके दिमाग में आया और उन्होंने वीडियो बनाने का फैसला किया। वे कहती हैं कि कौन कब आपको प्रेरित कर सकता है, यह जानना कठिन है।

स्पाइनल कॉर्ड इंजरी सर्वाइवर के लिए परिवार और दोस्तों का समर्थन

करिश्मा बताती हैं कि दुर्घटना के समय उन्हें जीवन और मृत्यु दोनों स्थितियों को करीबी से देखा। न केवल उन्हें, बल्कि पूरे परिवार को चोट के कारण हुए शारीरिक और मानसिक आघात से उबरने में कुछ महीने लग गए।

वे बताती हैं, “शारीरिक रूप से मैंने दर्द महसूस किया, लेकिन मानसिक और भावनात्मक रूप से मेरे परिवार और दोस्त जिस अवस्था से गुजरे वह भी काफी परेशान करने वाला था। मेरे आधे शरीर ने काम करना बंद कर दिया। मैं हिल भी नहीं पा रही थी। जब भी मुझे हिलना-डुलना पड़ता था, मुझे सहारे की जरूरत होती थी”।

भावनात्मक पहलू एक अलग संघर्ष था

उन्होंने आगे बताया, “हर कोई सदमे में था कि मेरा भविष्य कैसा होगा। इस स्थिति से निपटने के लिए मन में बहुत डर और संदेह था। हम सभी एक-दूसरे से पूछते, अब यह सब कैसे हो पाएगा?'”

ऐसे समय में परिवार का सहयोग बहुत जरूरी है। उन्होंने जोर देते हुए कहा, “मैं खुद को भाग्यशाली व्यक्ति मानती हूं, जिसे परिवार और दोस्तों से बहुत साथ मिला। यह आपकी यात्रा को आसान बनाता है, और आपको विश्वास दिलाता है कि आप अकेले नहीं हैं।

एक दिन फिजियोथेरेपी सत्र से ठीक पहले करिश्मा फूट-फूट कर रोने लगी। इससे उनकी दबी हुई भावनाएं बाहर आने लगीं। उनके मन में सवाल था “मैं ही क्यों?” लेकिन उनकी मां ने उनसे जो कहा उससे उनका नज़रिया बदल गया।

“उन्होंने मुझसे कहा, ‘यह सवाल दोबारा मत पूछना। हर बुरी स्थिति बेहतर के लिए बदलती है। यह हम पर निर्भर करता है कि हम इससे कैसे निपटते हैं।’

करिश्मा इसे अपना दूसरा जीवन मानती हैं। उन्होंने बताया, “मैंने खुद से पूछना बंद कर दिया कि ‘मैं क्यों?’ यह मेरे लिए अपने आप में एक बहुत बड़ा परिवर्तन था।”

अब वह दुनिया को बताती हैं- “यह आप पर निर्भर करता है कि आप जीवन की परिस्थितियों से कैसे निपटना चाहती हैं – क्या आप आसानी से ‘मेरे साथ क्या हो गया’ कहना चाहती हैं या आप अभी भी आशा की किरण देखती हैं।”

फिजियोथेरेपी बनी मददगार

करिश्मा के गिरने और उसके बाद की सर्जरी के बाद एक बार फिर उनके नए जीवन की शुरुआत हुई थी।

करिश्मा ने कहा, “मैं बिस्तर से उठना, नहाना और कपड़े बदलना जैसी चीजें सीख रही थी। अब मैं कम से कम बैठ पाती हूं। शुरू में मैं सिर्फ स्ट्रेचर पर लेटी रहती थी। धीरे-धीरे मुझे बैठाया गया। मुझे एक बार फिर से एक बच्चे की तरह बुनियादी चीजें करना सिखाया गया।”

दूसरा चरण फिजियोथेरेपी था, जिसे वह रीढ़ की हड्डी की चोट से बचे लोगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानती हैं।

“यह आपके शरीर और मांसपेशियों को आगे बढ़ने और आकार में रहने में मदद करता है। फिजियोथेरेपी आपके पैर की गतिविधियों में मदद करती है और यह सुनिश्चित करती है कि आपका ऊपरी शरीर काम करता रहे। यह आपके निचले शरीर की मदद करता है। ”

रीढ़ की हड्डी की चोट से बचे लोगों की काउंसलिंग

वे अपने अनुभवों को दूसरों के साथ साझा करती रहती हैं। इससे उन्हें दूसरों को प्रेरित करने की संतुष्टि मिलती है।

“वे युवा लोग हैं और उनके पास ठीक होने की बहुत गुंजाइश है। उनमें बहुत ऊर्जा है। उन्हें हर समय इसे चैनलाइज करने की जरूरत है। मैं उन्हें अपने जीवन में वापस जाने के लिए प्रोत्साहित करती हूं।

खुद से लें प्रेरणा

करिश्मा पहले की अपेक्षा स्पिरिचुअलिटी के प्रति रुचि दिखाने लगी है। वे प्रेरक वक्ताओं की बातचीत भी सुनती हैं, लेकिन उन्हें आत्म-चर्चा सत्र से अधिक संतोषजनक कुछ भी नहीं लगता है।

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करिश्मा लांबा दूसरों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

“मुझे लगता है कि प्रेरक बातें सुनी जा सकती हैं, लेकिन जब तक आप उन पर विश्वास नहीं करतीं या आत्म-प्रेरित महसूस नहीं करतीं, आप इस पर काम नहीं कर सकती है। जब तक आप भीतर से नहीं जुड़ती हैं, तब तक कोई फर्क नहीं पड़ेगा। कभी-कभी, मैं बस अपने-आप में खो जाती हूं और खुद को एक जोरदार बात कह देती हूं। यह वास्तव में मदद करता है!”

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