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फीमेल फाइटर : PCOS ने मुझे खुद को दोबारा जानने का मौका दिया, पीसीओएस पर ये है तान्या तनेजा की जीत की कहानी

Published on:8 May 2020, 16:23pm IST
पीसीओएस एक सामान्य हार्मोनल विकार है, जो कई महिलाओं के साथ होता है। यह है तान्या तनेजा की कहानी है, जो इस तकलीफ से गुज़री, तो और भी मज़बूत हुई।
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पीसीओएस तान्या को खुद के और करीब ले आया। चित्र: तान्या तनेजा

मैं एक पीसीओएस (Polycystic ovary syndrome) फाइटर हूं- मेरी वो पहचान जो अक्सर मेरे बाकी परिचय से पहले आता है। मेरा नाम तान्या तनेजा है और मैं एक 23 वर्षीय महिला हूं, जो लगातार हार्मोनल विकार से लड़ती है। मैं आपको अपनी कहानी बताती हूं जिससे आप इसे पूरी तरह से समझ पाएं।

जब मैं 11 वीं कक्षा में थी, तो मुझे पीसीओएस होने के बारे में पता चला। एक ऐसा हॉर्मोनल विकार जिसमें ओवरीज का साइज बढ़ जाता है और उसके बाहरी किनारों पर छोटे-छोटे सिस्ट हो जाते हैं। जिसकी वजह से मुझे लगातार बुखार, ब्लॉटिंग, पेल्विक पेन रहने लगा था जिसकी वजह से मैं कई बार खुद को इतना कमजोरी महसूस करती कि स्कूल मिस करना पड़ता।

बीच-बीच में मेरा वजन भी काफी ज्यादा बढ़ जाया करता था। एक किशोरी के लिए जिसे अपनी बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी करनी थी, उसके लिए यह काफी परेशानियों भरा समय था। मेरे माता-पिता ने कई डॉक्टरों से मेरे बारे में बात की, पर कहीं से भी कोई संतोषजनक समाधान नहीं मिल पाया।

फीमेल फाइटर । चित्र: तान्या तनेजा

आखिरकार हमे एक अच्छा डॉक्टर मिल ही गया, जिन्होंने हमें सुझाव दिया कि मेरी समस्या का सही से पता लगाने के लिए मुझे अल्ट्रा साउंड, एमआरआई और सीटी स्कैन करवाना होगा। तभी इस परेशानी के पीछे के सही कारण का पता लग पाएगा।

और हमें ट्यूमर के खतरे से डरा दिया गया

सभी टेस्ट के बाद, डॉक्टर ने यह निष्कर्ष निकाला कि मेरी ओवरीज के पास जो सिस्ट है, अगर उसका जल्दी ही इलाज नहीं किया गया तो वह ट्यूमर बन सकता है। ट्यूमर के विकास को रोकने के लिए दो विकल्प थे – पहले विकल्प के तौर पर मुझे सर्जरी से अंडाशय को निकलवा देना था और दूसरे विकल्प– में मुझे ट्यूमर की ग्रोथ रोकने के लिए दो साल तक दवाएं लेनी थीं।

मेरे माता-पिता इतनी कम उम्र में सर्जरी के पक्ष में नहीं थे। इसलिए हमने दवा लेने का फैसला किया।इसके बावजूद दवाओं की हाई डोज के कारण मुझे दो वर्ष तक कई परेशानियों का सामना करना पड़ा, क्योंकि मैं नहीं चाहती थी कि ट्यूमर मेरी आने वाली जिंदगी का फैसला करे। लगातार दवा लेने का साइड इफैक्ट मेरे चेहरे और मेरे पूरे शरीर पर नजर आने लगा।

पर मैं इन्हें छोड़ नहीं सकती थी। लंबे समय की समस्या से बचने के लिए मुझे इन थोड़े दिनों के दर्द को बर्दाश्त करना ही था।

पीसीओएस: लड़ाई मुश्किल जरूर है पर असंभव नहीं। चित्र: तान्या तनेजा

मैंने कभी यह नहीं सोचा कि इस तकलीफ के कारण मैं कुछ दिन अपनी पढ़ाई से छुट्टी ले लूं। क्योंकि मुझे लगता था कि इससे मेरा मानसिक स्वास्‍थ्‍य भी प्रभावित होगा। मैंने पूरी कोशिश करके इस तकलीफ के साथ अपने जीवन की नियमित जिम्मेदारियों के बीच सामंजस्य बैठाने की कोशिश की।

आलोचनाएं जो इस बीमारी के साथ मुझे मिलीं

हालांंकि, सब कुछ उतना सुचारू रूप से नहीं चल पाया जितना मैंने करने का इरादा किया था। पीसीओएस के साथ होने की सबसे ज्यादा तकलीफदेह वे सुझाव हैं जो आपके आसपास वाले लोग आपको देने लगते हैं। जैसे तुम इतनी मोटी होती जा रही हो, अपना वजन कम क्यों नहीं करती या फि‍र अपनी स्किन का ख्याल करो कुछ।

दिन-ब-दिन उन्हें यह समझाना बहुत मुश्किल हो गया कि मैं जिस हालत से गुज़र रही हूं, क्योंकि यह नितांत निजी और गहन समस्या थी। मुझे अब एहसास हुआ कि डॉक्टर के पास नियमित जांच के लिए जाना कितना महत्वपूर्ण है, क्योंकि पीसीओएस जैसी समस्या आपके जीवन में किसी भी समय दस्तक दे सकती है। और यह भी नहीं पता कि इससे और कितनी तरह की समस्याएं आपको झेलनी पड़ सकती हैं।

जिंदगी ने दिया एक दूसरा मौका

दो साल की शारीरिक और मानसिक थकावट से गुजरने के बाद, मुझे लगता है कि मैं उस घातक ट्यूमर को सफलतापूर्वक समाप्त करने में कामयाब रही हूं। इससे मुझे एक बेहतर जिंदगी जीने का दूसरा मौका मिला है। अपनी अब तक की यात्रा में मैंने यही सीखा कि अपना खुद का ख्याल रखना और सेहत के प्रति सजग रहना कितना ज्यादा जरूरी है। यह आपकी सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।