लेखिका शाहीन भट्ट कर रहीं अवसाद के साथ अपने संघर्ष और मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य पर बात

Published on: 11 October 2020, 12:00 pm IST

'आई हैव नेवर बीन (अन) हैप्पियर' पुस्तक की लेखिका शाहीन भट्ट टीनेज से ही अवसाद की शिकार रही हैं। इस इंटरव्यू में वह बताती हैं अपने संघर्ष और प्रेरणा के बारे में।

shaheen bhatt ek lekhika hain
लेखिका शाहीन भट्ट मेंटल हेल्‍थ पर खुलकर बात करती हैं। चित्र: Shaheen Bhatt.

इन महामारी और लॉक डाउन ने मानसिक स्वास्थ्य पर बातचीत को बढ़ावा दिया है और इस विषय पर लोग खुल कर बात कर रहे हैं, जैसा पहले कभी नहीं हुआ था। लेकिन फिर भी डिप्रेशन और अन्य मानसिक रोगों को लेकर लोगों में कई तरह की अवधारणाएं व्‍याप्‍त हैं। थेरेपी लेना या अपनी मनोस्थिति के बारे में बात करने को कमजोरी की तरह देखा जाता है। मानसिक रोगों को भी शारीरिक रोग जितना सामान्य बनाने में अभी हमारे समाज को समय लगेगा।

लेकिन लेखिका, HT ब्रंच की कोलमिस्ट और अभिनेत्री आलिया भट्ट की बहन शाहीन भट्ट जैसे सेलिब्रिटी हैं जो इस मुद्दे को उठाकर समाज में विमर्श का मुद्दा बनाने का काम कर रहे हैं। अपनी किताब में वह लेखकों को अपने अवसाद और उससे जुड़े अनुभवों को ईमानदारी से साझा करती हैं।

हेल्थशॉट्स के साथ बातचीत में शाहीन ने बताया कि किस तरह मानसिक रोग के साथ ही शर्मिंदगी भी जुड़ी हुई है। वह बताती हैं मानसिक स्वास्थ्य के लिए सही शब्दों का चयन कितना महत्वपूर्ण है और कैसे डिप्रेशन हर व्यक्ति के लिए अलग है।

क्यों जरूरी है मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा?

“मेरे अनुसार यह बहुत जरूरी है कि सिर्फ मशहूर चेहरे ही नहीं, आम लोग भी अपने मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य और समस्याओं पर बात करें। अगर आप किसी ओहदे पर हो, तो यह आपकी जिम्मेदारी है कि आप इस तरह का माहौल तैयार करें जहां मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात हो सके। अगर आप कहीं सीईओ हैं या मैनेजर हैं, तो आगे बढ़कर इस विषय पर बात करें। इससे आपके जूनियर्स को एहसास होगा कि सफल लोगों के भी अपने किस्से हैं मानसिक स्वास्थ्य को लेकर। इससे लोगों में आगे बढ़कर बोलने की हिम्मत आती है”, कहती हैं शाहीन।

मेंटल हेल्‍थ पर बात करना बहुत जरूरी है। चित्र: शटरस्‍टॉक
मेंटल हेल्‍थ पर बात करना बहुत जरूरी है। चित्र: शटरस्‍टॉक

जाने-माने चेहरों को बस एक ही फायदा है, उनके पास एक प्लेटफार्म है जिसके माध्यम से वह ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच सकते हैं।

शाहीन बताती हैं, “कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप जीवन में किस मुकाम पर हैं। हर व्यक्ति जीवन में कभी न कभी मानसिक रोगों से ग्रस्त होता ही है। बस इस पर बात करने की जरूरत है।”

दोस्तों और परिवार का साथ सबसे जरूरी है

मानसिक स्वास्थ्य से लड़ने के लिए एक सपोर्ट सिस्टम होना बहुत जरूरी है। शाहीन खुद को सौभाग्यशाली मानती हैं कि उनके पास हमेशा उनका परिवार और दोस्तों का साथ और सपोर्ट रहा।

वह कहती हैं,”आपको यह महसूस होता है कि आप बिना हिचकिचाहट और शर्मिंदगी के अपने मन की बात किसी से कह सकती हैं। हालांकि एक बहुत अच्छे परिवार से होने के बाद भी मेरे अंदर शर्मिंदगी रही। शर्म और झिझक मानसिक समस्याओं का ही हिस्सा है, लेकिन आपके आसपास सकारात्मक लोगों के होने से यह कम जरूर होती हैं।”

“मैं इस कथन को अक्सर सबसे साझा करती हूं,’संवेदनशील रहें, हर व्यक्ति युद्ध में है।’ यह बिल्कुल सत्य है हर कोई अपने अंदर एक युद्ध से गुजर रहा है और हम नहीं जानते किस पर क्या बीता है।”, शाहीन साझा करती हैं।

अक्सर चीजों को हल्के में लिया जाता है, खासकर सोशल मीडिया के आने के बाद से। लोगों को अधिक मानवीय होने की जरूरत है। संवेदना कहीं खो रही है। हमारे लिए संवेदनशील होना आवश्यक है, खासकर मानसिक रोगियों के साथ।”

जब बात हो मानसिक स्वास्थ्य की, सही शब्दों का चयन है जरूरी

“मेरा मानना है कि जिस तरह के शब्दों का प्रयोग होता है जब मानसिक स्वास्थ्य की बात होती है, यह भी ध्यान रखना आवश्यक है। जब मैं छोटी थी और मुझे पता नहीं था कि डिप्रेशन क्या है, तो मैं अक्सर दुख और डिप्रेशन को एक ही नजर से देखती थी। मैं कुछ इस तरह डिप्रेशन शब्द का इस्तेमाल करती थी कि ‘मेरी ड्रेस खराब हो गयी है, मैं तो बिल्कुल डिप्रेस्ड हूं इस वक्त।’ शब्दों का गलत इस्तेमाल रोका जाना बहुत जरूरी है”, कहती हैं शाहीन।

शाहीन भट्ट।
शाहीन भट्ट।

जब हम सही अर्थ नहीं जानते हैं, तो हम उसकी गंभीरता को भी नहीं समझ पाते। आज के समय में डिप्रेशन को लेकर जागरूकता बढ़ी है और लोग सही शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं। अब बस इस विषय पर बात करना शुरू किया जाना चाहिए।

मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखने पर क्या हैं विचार-

शाहीन का कहना है कि मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल करना कोई प्लान या रणनीति के तहत नहीं होता, यह हर दिन किया जाने वाला काम है। मानसिक स्वास्थ्य के लिए कोई एक खास तरीका नहीं होता।

शाहीन बताती हैं, “मैंने देखा है कि मेरी भावनात्मक स्थिति एक जैसी नहीं रहती। यही कारण है कि मेरा डिप्रेशन और उसके लक्षण भी कभी एक समान नहीं रहे। हर दूसरे महीने मेरे डिप्रेशन का रूप बदल जाता था। इसलिए मैं अपने दिमाग का ख्याल कैसे रखती हूं यह भी बदलता रहता है। मैं अब भी अपनी दवा और थेरेपी ले रही हूं। अब तो मुझे थेरेपी लेते हुए दो साल से अधिक हो गए हैं। और इससे मुझे बहुत फायदा मिला है।”

मानसिक स्वास्थ्य पर सोशल मीडिया का प्रभाव

शाहीन को लगता है कि सोशल मीडिया हमारे जीवन का एक बहुत ही आक्रामक हिस्सा है, और हमें बहुत कुछ लगता है, भले ही हमें एहसास न हो।

“यदि आपने देखा है कि सोशल मीडिया वास्तव में कैसे संचालित होता है, तो सोशल मीडिया मूल रूप से आपको यह महसूस कराना है कि आपके जीवन में ऐसा कुछ है जो आपके पास नहीं है, कुछ कमी है जो आपके पास है, तो आप ठीक है और अगर आप खुश हैं, तो नकारात्मक आवाजें, निर्दयी आवाजें, तेज़ आवाजें आती हैं। यह सब कभी-कभी बहुत अधिक हो जाता है।

वे बताती हैं ”याद कीजिए कि 20 साल पहले, अगर कोई व्यक्ति दुनिया में कुछ बुरा कह रहा था, तो यह तुरंत आपके फोन पर नहीं आएगा, लेकिन अब यह है।”

यह एक ऐसा चक्र है जिसे मैंने पूरी तरह से काट दिया है। हालांकि यह प्यारा है जब लोग अच्छे, दयालु और सकारात्मक होते हैं, मैं वास्तव में इसके लिए आभारी हूं, लेकिन मैं इसे बहुत गंभीरता से नहीं ले सकती। मैं उस तरह के शब्दों को इतनी गंभीरता से नहीं ले सकती, इसलिए मैं नफरत को इतनी गंभीरता से नहीं लेती। मेरे लिए, यह एक स्वर में चीखने जैसी आवाजें हैं। ” शाहीन बतातीं हैं।

महामारी के दौरान हर दिन जैसा है वैसे जीना चाहिए

“महामारी वास्तव में सभी के लिए अजीब रही है। हम सभी केवल हर दिन को गुजारते रहे हैं। मुझे नहीं लगता कि किसी के पास कोई योजना है, मुझे नहीं लगता कि हम में से किसी की भी योजना थी कि इससे कैसे निपटा जाए। इसलिए मैंने अपने मानसिक स्वास्थ्य और लॉकडाउन से वैसे ही निपटा है, जैसे कि मैं सामान्य रूप से अपने मानसिक स्वास्थ्य से निपटती हूं।

शाहीन भट्ट।

शाहीन भट्ट।”लॉकडाउन के कुछ दिनों में, मैं वास्तव में सकारात्मक और घर के लिए खुश होती रही। अपने परिवार के साथ समय बिताती हूं और अन्य दिनों में मैं व्यावहारिक रूप से निर्दयी और पूरी तरह से निराशाजनक महसूस करती हूं। मैं इस बात पर ध्यान दे रही हूं कि मैं कैसा महसूस करती हूं और खुद की देखभाल का अभ्यास करती हूं। अपने लिए ऐसे काम करती हूं जिससे मुझे अच्छा महसूस होता है, जो कि हम अभी कर सकते हैं।

कुछ खास शब्द

“हर एक व्यक्ति के लिए डिप्रेशन पूरी तरह से अलग है। इसलिए मेरा अनुभव किसी और से पूरी तरह से अलग होगा। यदि आप एक कमरे में सौ लोगों को रखते हैं, जिन्हे अवसाद है, तो उनमें से हर एक के पास अलग-अलग कारण होंगे कि वे उदास क्यों हैं। उनके अलग-अलग लक्षण होंगे, अलग-अलग तरीके जिसमें यह दिखाई देगा – इसलिए इससे निपटने का कोई एक तरीका नहीं है।

अवसाद आपको आश्वस्त करता है कि आप इसमें अकेले हैं, और किसी और ने महसूस नहीं किया है कि आप क्या महसूस कर रहे हैं, लेकिन यह सब याद रखना महत्वपूर्ण है।

शाहीन कहती हैं, “मुझे लगता है कि बौद्धिक रूप से हम जानते हैं कि हम अकेले नहीं हैं। हम जो महसूस कर रहे हैं उसमें संभवतः अकेले नहीं हो सकते हैं, लेकिन भावनात्मक स्तर पर, यह ऐसा कुछ नहीं है जिसे आप वास्तव में महसूस करते हैं। उस झूठ को चुनौती देने का तरीका उसके बारे में बात करना है। लोगों से बात करना है क्योंकि एक बार जब आप बात करते हैं, तो आप महसूस करेंगे कि अन्य लोग उससे गुजर रहे हैं। यही इससे बाहर आने में आपकी मदद करने का तरीका है।”

टीम हेल्‍थ शॉट्स टीम हेल्‍थ शॉट्स

ये हेल्‍थ शॉट्स के विविध लेखकों का समूह हैं, जो आपकी सेहत, सौंदर्य और तंदुरुस्ती के लिए हर बार कुछ खास लेकर आते हैं।