National Girl Child Day : घर से हो लड़कियों के प्रति भेदभाव खत्म करने की शुरुआत : समीरा रेड्डी

लोकप्रिय अभिनेत्री समीरा रेड्डी नेशनल गर्ल चाइल्ड डे के अवसर पर कहती हैं कि लैंगिक भेदभाव को खत्म करने की शुरुआत घर से होनी चाहिए। पेरेंट्स यदि बेटे-बेटी को समान प्यार-दुलार और अवसर देंगे, तो समाज में भी सकारात्मक बदलाव आयेगा।

समीरा रेड्डी अपनी बेटी से बहुत प्यार करती हैं और लैंगिक भेदभाव पर बेहद मुखर होकर बोलती हैं।
टीम हेल्‍थ शॉट्स Updated on: 24 January 2023, 13:47 pm IST
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समीरा रेड्डी अपने अभिनय और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के रूप में हमेशा चर्चा में रहती हैं। वे सोशल मीडिया पर औरतों और मातृत्व के मुद्दों को प्रभावशाली ढंग से उठाने के लिए भी जानी जाती रही हैं। चाहे वह बॉडी पॉज़िटिविटी हो या पोस्टपार्टम डिप्रेशन, ऐसे कई मुद्दे हैं, जिनके बारे में वह अपनी राय रखती हैं। उनकी बातें लोगों को प्रभावित भी करती हैं। राष्ट्रीय बालिका दिवस (National Girl Child Day) के अवसर पर अपने बच्चों की प्यार करने वाली मां के रूप में लैंगिक समानता और इसके प्रति बच्चों को संवेदनशील बनाने के महत्व के बारे में हेल्थ शॉट्स से  बातचीत की।

राष्ट्रीय बालिका दिवस (National Girl Child Day-24 January)

भारत में लड़कियों के प्रति होने वाली लैंगिक असमानता के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए देश भर में हर साल 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है।

एक बेटा और एक बेटी की मां हैं समीरा

2002 में ‘मैंने दिल तुझको दिया’ से बॉलीवुड में कदम रखा समीरा रेड्डी ने। समीरा को न्यारा नाम की एक बेटी और हंस नाम का एक बेटा है। माता-पिता के रूप में, उनका जोर लैंगिक समानता और संवेदनशीलता बनाए रखने पर है। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने राष्ट्रीय बालिका दिवस की शुरुआत की। इसके केंद्र में लड़की द्वारा सामना की जाने वाली असमानताओं का उन्मूलन है।

लैंगिक समानता घर से शुरू होती है

समीरा रेड्डी ने 2015 में अपने बेटे हंस को जन्म दिया। इसके बाद 2019 में बेटी नायरा को जन्म दिया। एक महिला के रूप में वह समाज में लड़कियों और महिलाओं के साथ होने वाले अन्याय के प्रति संवेदनशील रही हैं। वह इस सामजिक व्यवस्था के प्रति हमेशा मुखर रही हैं। वे मानती हैं कि सबसे अच्छी बात जो वह कर सकती हैं, वह है घर के भीतर बदलाव की शुरुआत करना।

घर पर हो लड़कियों का सम्मान

समीरा रेड्डी लैंगिक समानता को कैसे बढ़ावा देती हैं? इसके जवाब में वे हेल्थशॉट्स से कहती हैं, ‘वह यह सुनिश्चित करती हैं कि उनका बेटा यह जान पाए कि उसकी बहन या कोई अन्य लड़की उसके समान है। लड़कियां होशियार, इंटेलिजेंट और यहां तक कि बेहतर कर सकती हैं। उसे इसका सम्मान करना चाहिए। उनके घर में बेटा और बेटी हर तरह से बराबरी पर हैं। लड़का और लड़की को लेकर दोनों के बीच भेदभाव शून्य है। यह सबसे अच्छी चीज है, जो मैं कर सकती हूं। उन्होंने घर से ही बदलाव की शुरुआत की है।

दो बहनों के साथ बड़े होने के बावजूद अंतर नहीं

बड़े होने के दौरान समीरा को घर में किसी तरह के भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा। अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए पूर्व मॉडल मेघना रेड्डी और सुषमा रेड्डी की बहन समीरा कहती हैं, ”हम तीन बहनें ही हैं। मुझे नहीं लगता कि हमें उस मोर्चे पर कोई समस्या हुई।” तीनों बहनों का कोई भाई नहीं था। लेकिन वे बेहद सशक्त महसूस करते हुए बड़ी हुईं। स्वास्थ्य ” भले ही मेरे पास एक भाई था। लेकिन मेरे पेरेंट्स यह मानते थे कि लड़कियां निश्चित रूप से बराबर या उससे अधिक हैं। इसलिए उन्होंने कोई अंतर नहीं महसूस किया। इससे उन्हें ताकत ही मिली।

 माता-पिता के लिए संदेश

समीरा कहती है, “कृपया! भेदभाव की इस जंजीर को तोड़ दें, क्योंकि इसे तोड़ना जरूरी है। एक छोटी लड़की के लिए कंडीशनिंग बहुत महत्वपूर्ण है। जिस तरह से हम अपने बच्चों के साथ व्यवहार करते हैं, उसी सोच के साथ वे युवा और वयस्क बनते हैं। इसी तरह वे दुनिया में जाते हैं और अपनी राय बनाते हैं।

माता-पिता के रूप में यह सुनिश्चित करना बहुत महत्वपूर्ण है कि बच्चे इस पूर्वाग्रह को घर पर न देखें। ” समीरा को लगता है कि यह सुनिश्चित करना एक माता-पिता की जिम्मेदारी है कि आपकी युवा बेटी इस तथ्य जाने कि वह इस दुनिया में जो कुछ भी चाहती है, वह उसे पूरा कर सकती है। इसमें कोई लैंगिक पक्षपात नहीं होगा।”

समीरा रेड्डी ने अपनी बेटी से कही ये बातें

1. अपनी योग्यता पर विश्वास 

यह कुछ ऐसा है जो उसकी मां ने समीरा को सिखाया था। अब वह चाहती है कि उसकी बेटी भी वही सीखे। लोकप्रिय इन्फ्लुएंसर समीरा इस बात के लिए अपनी मां की शुक्रगुजार है। इस लाइफ लर्निंग ने वास्तव में उन्हें हर कदम पर साथ दिया है।

2.  जिंदगी कोई परी कथा नहीं है 

समीरा परियों की कहानियों को जीवन के लिए उपयोगी नहीं मानती हैं। वह नहीं चाहती कि उनकी बेटी यह सोचे कि उसे बचाया जाएगा या किसी पुरुष या विवाह होने पर उसकी देखभाल की जाएगी।

वे मानती हैं कि परी कथाओं जैसा नहीं होता जीवन। चित्र :  Insta/समीरा रेड्डी

समीरा बहुत कम उम्र में ही इन बातों से अवगत हो गई थीं। इसलिए वह अपनी बेटी को ऐसी कहानियां सुनाती हैं, जो उसे सशक्त बनाती है। समीर यह बात जोर देकर कहती हैं कि यह कोई फेमिनिज्म के सपोर्ट में नहीं है। उसके लिए लैंगिक समानता के मूल्य को बताना अधिक जरूरी है।

3. हमेशा मिले माता-पिता का साथ

समीरा अपनी बेटी से कहती हैं कि उसके पास एक विकल्प है। उसे पता होना चाहिए कि वह कब ‘नहीं’ कह सकती है। जब भी आवश्यकता हो, उसे नहीं कहना चाहिए। अगर उन्हें लगता है कि कुछ गलत है, तो उन्हें इसके बारे में बताना चाहिए। अभिनेत्री मानती हैं कि बहुत सारी लड़कियां अपना मुंह इसलिए नहीं खोलती हैं, क्योंकि उन्हें समाज और उनके परिवार का समर्थन नहीं मिलने की चिंता होती है।

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समीरा को उम्मीद है कि भारत में लड़कियों  के प्रति भेदभाव खत्म होगा।

वह चाहती हैं कि उनकी बच्ची को पता चले कि उसके माता-पिता हमेशा उसके साथ हैं। उन्हें उम्मीद है कि भारत में सभी लड़कियों को इस तरह का समर्थन मिलेगा। लड़कियों को यह पता होना चाहिए कि उनके पास अपनी बात कहने का विकल्प है कि अन्याय हो रहा है। कोई उनके लिए खड़ा होगा।

अंत में

समीरा रेड्डी की ये बातें न सिर्फ उनकी बेटी बल्कि अन्य बच्चियों, बेटियों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। लैंगिक समानता को बढ़ावा और माता-पिता को जागरूक करने में उनके ये संदेश मदद करेंगे।

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