लॉकडाउन में क्या आपका बच्चा भी मोटा हो गया है? समझिए आप कैसे दोबारा फिट होने में उसकी मदद कर सकती हैं

Published on: 4 March 2022, 14:06 pm IST

एक अमेरिकी बच्चा हर हफ्ते लगभग 24 घंटे टीवी देखने में बिताता है, जो उसे गतिहीन बना देता है और डबल्यूएचओ के अनुसार यही बच्चों में मोटापे का सबसे बड़ा कारण है।

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अपने बच्चे को मोटापे से बचाने के लिए टिप्स. चित्र : शटरस्टॉक

जहां एक तरफ लॉकडाउन ने कई लोगों को कोविड – 19 से बचाया, वहीं कई लोगों को इसने गतिहीन जीवनशैली की तरफ अग्रसर किया है। ऑनलाइन क्लासेस और वर्क फ्रम होम ने न सिर्फ वयस्कों, बल्कि बच्चों को भी आलसी (lazy) बना दिया है, जिससे उनके शरीर पर काफी बुरा असर पड़ रहा है। कोविड-19 महामारी के बाद लॉकडाउन में ज्यादातर बच्चे मोटे हो गए हैं। और ये उनके स्वास्थ्य के प्रति एक गंभीर चेतावनी का संकेत है। वर्ल्ड ओबेसिटी डे (World obesity day) के उलपक्ष्य में आपको भी समझना चाहिए कि आप अपने बच्चे की फिटनेस को कैसे सुधार सकती हैं।

लॉकडाउन और बच्चों में ओबेसिटी

सेडेंटरी लाइफस्टाइल, एक ही कमरे में सारा दिन बिताने और ऑनलाइन मोड पर स्विच करने के कारण बच्चे मोटे हो रहे हैं। मोटापे के कारण बच्चे डायबिटीज़ जैसी बीमारियों के भी शिकार होते जा रहे हैं। छोटी उम्र में घातक बीमारियों से घिर जाना माता – पिता के लिए चिंता का विषय है। यदि आपका बच्चा भी बीते एक-दो साल में मोटापे से ग्रस्त हो गया है, तो आपकी चिंता हम समझ सकते हैं।

इसलिए आज हम आपको कुछ ऐसे सुझाव देने वाले हैं, जिनसे आप अपने बच्चे की फिटनेस को पटरी पर ला सकती हैं।

1 संतुलित आहार

माता-पिता स्वस्थ भोजन, दैनिक शारीरिक गतिविधि और पोषण शिक्षा प्रदान करके बचपन में मोटापे को रोकने में मदद कर सकते हैं। स्वस्थ भोजन और स्नैक्स स्वस्थ खाने के व्यवहार और दृष्टिकोण बढ़ते शरीर के लिए पोषण प्रदान करते हैं।

दैनिक भोजन और नाश्ते का समय निर्धारित करें, और जितनी बार संभव हो एक साथ भोजन करें। छोटे बच्चों के लिए फूड गाइड पिरामिड के आधार पर विभिन्न प्रकार के स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराएं।

2 शारीरिक गतिविधियां बढ़ाएं

बढ़ी हुई शारीरिक गतिविधि स्वास्थ्य जोखिम को कम करती है और वजन प्रबंधन में मदद करती है। पोषण शिक्षा छोटे बच्चों को जीवन भर के लिए अच्छे पोषण और स्वस्थ खाने की आदतों के बारे में जागरूकता विकसित करने में मदद करती है।

बच्चों को स्वस्थ खाने के व्यवहार को अपनाने और शारीरिक रूप से सक्रिय रहने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।

परिवार पर ध्यान दें। अधिक वजन वाले बच्चों को अलग न रखें। पूरे परिवार को शामिल करें और परिवार की शारीरिक गतिविधि और खाने की आदतों को धीरे-धीरे बदलने के लिए काम करें।

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जंक फूड न खिलाएं। चित्र : शटरस्टॉक

बच्चे को फिटनेस की राह पर ले जाते समय पेरेंट्स इन बातों का रखें ख्याल

माता-पिता को केवल अधिक वजन के आधार पर बच्चे के आहार में बदलाव नहीं करना चाहिए। सभी प्रीस्कूलर अपनी व्यक्तिगत शारीरिक संरचना और विकास पैटर्न प्रदर्शित करते हैं। बच्चों में मोटापे का आकलन करना मुश्किल है, क्योंकि बच्चे अप्रत्याशित रूप से बढ़ते हैं। यह केवल एक हेल्थ प्रॉफेशनल द्वारा ही किया जाना चाहिए। जो बच्चे का सही बीएमआई (BMI) नापे और उसके बाद खानपान में कुछ बदलाव करे।

अधिक वजन वाले बच्चों की मदद करना

अधिकांश छोटे बच्चों के लिए वजन कम करना एक अच्छा तरीका नहीं है, क्योंकि उनका शरीर बढ़ रहा है और विकसित हो रहा है। अधिक वजन वाले बच्चों को तब तक डाइटिंग नहीं करनी चाहिए जब तक कि कोई चिकित्सक चिकित्सकीय कारणों से उसकी देखरेख न करे। इसलिए बच्चों को डाइटिंग कराने से पहले डॉक्टर से पूछ लें।

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आउट डोर गेम्स के लिए प्रोत्साहित करें। चित्र : शटरस्टॉक

इसके बजाय उनकी शारीरिक गतिविधि को बढ़ावा दें, जिसमें सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एन्ड प्रिवेंशन द्वारा सुझाइ गई ये टिप्स आपकी मदद करेंगी-

  1. टीवी देखते समय भोजन या नाश्ता करने से मना करें। टीवी के सामने भोजन करने से तृप्ति की भावनाओं पर ध्यान देना मुश्किल हो सकता है और इससे बच्चा ज़्यादा खा सकता है।
  2. कम उच्च कैलोरी, कम पोषक तत्व वाले खाद्य पदार्थ खरीदें। बच्चों को यह समझने में सहायता करें कि मिठाई और उच्च वसा वाले फूड्स (जैसे कैंडी, कुकीज़, या केक) रोज़मर्रा के भोजन नहीं हैं।
  3. खाद्य पदार्थों को “अच्छा” या “बुरा” के रूप में लेबल करने से बचें। मॉडरेशन में सभी खाद्य पदार्थ स्वस्थ आहार का हिस्सा हो सकते हैं।
  4. हेल्दी स्नैक्स का अधिकतम लाभ उठाएं। अधिकतम पोषण पर ध्यान दें – फल, सब्जियां, अनाज, कम चीनी वाले अनाज, कम वसा वाले डेयरी उत्पाद, और लीन मीट और मांस के विकल्प।
  5. अधिक मात्रा में फलों के रस से बचें, जिसमें कैलोरी होती है, लेकिन वे जिन फलों से आते हैं, उनकी तुलना में कम पोषक तत्व होते हैं। एनसीबीआई के अनुसार जूस की एक उचित मात्रा प्रति दिन 4-8 औंस है।
  6. शारीरिक गतिविधि को प्रोत्साहित करें। नियमित रूप से पारिवारिक शारीरिक गतिविधि के समय में भाग लें, जैसे कि सैर, बाइक की सवारी, लंबी पैदल यात्रा और खेल।
  7. बच्चों द्वारा टेलीविजन देखने, वीडियो गेम खेलने और कंप्यूटर पर काम करने के समय को प्रतिदिन 1 से 2 घंटे तक सीमित करें।

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ऐश्‍वर्या कुलश्रेष्‍ठ ऐश्‍वर्या कुलश्रेष्‍ठ

प्रकृति में गंभीर और ख्‍यालों में आज़ाद। किताबें पढ़ने और कविता लिखने की शौकीन हूं और जीवन के प्रति सकारात्‍मक दृष्टिकोण रखती हूं।

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