एंटीबायोटिक लेने के बाद क्यों होने लगती है पेट में गैस और ब्लॉटिंग, जानिए इस बारे में सब कुछ

Published on: 17 June 2022, 18:45 pm IST

जब भी  आप बीमार होती हैं तो दवा लेना जरूरी हो जाता है। पर दवा लेने के बाद अकसर पाचन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। क्या आप जानती हैं कि ऐसा क्यों होता है? 

antibiotics are not good for your gut health
एंटीबायोटिक दवाइयां बुरे ही नहीं अच्छे बैक्टीरिया को भी मार देती हैं

उपचार से परहेज हमेशा बेहतर माना गया है। पर जब आप बीमार पड़ ही जाएं, तो उपचार जरूरी हो जाता है। फिर चाहें वह सर्दी-जुकाम, बुखार हो या कोई लंबी बीमारी। पर कभी आपने इस बात पर ध्यान दिया है कि किसी भी बीमारी की दवा लिखने के साथ डॉक्टर हमेशा एक गैस और एसिडिटी के लिए भी एक दवा लिख देते हैं। आखिर क्यों करते हैं वे ऐसा? और अगर आप ये गैस वाली दवा न लें, तो आपने महसूस किया होगा कि आपका पाचन तंत्र अजीब तरह से व्यवहार करने लगता है। जिसमें एसिडिटी, गैस, ब्लॉटिंग और मतली तक शामिल हैं। तब आखिर क्या है एंटीबायोटिक्स और पाचन संबंधी समस्याओं का कनेक्शन। आइए जानते हैं इस बारे में सब कुछ। 

आपके शरीर के लिए कैसे काम करते हैं एंटीबायोटिक्स 

एंटीबायोटिक्स का काम है बैक्टीरिया को मारना। बैक्टीरिया को ख़त्म करके एंटीबायोटिक्स ने लाखों- करोड़ों लोगों की जान बचाई है। पर दिक्कत यह है कि ऐसा कोई तरीका अब तक नहीं खोजा जा सका है जिससे एंटीबायोटिक्स शरीर में संक्रमण के लिए जिम्मेदार हानिकारक जीवाणुओं और अच्छे बैक्टीरिया के अंतर को समझ सकें

यह जानना ज़रूरी है कि एंटीबायोटिक्स को अच्छे आंत (intestine) बैक्टीरिया को मारने से कैसे रोक सकते हैं और गुड बैक्टीरिया के ख़त्म होने के कारण होने वाले एसिड रिफ्लक्स को कैसे ठीक कर सकते हैंin सारी समस्याओं पर हमने बात की ईएसआई मेडिकल कॉलेज में फिजिशियन डॉक्टर सिद्धार्थ शेखर से। 

एसिड रिफ्लक्स या एसिडिटी एक सामान्य स्थिति है, जो भोजन नली (ग्रासनली) में पेट में मौजूद सामग्री के बैकफ्लो के कारण होती है। यह मुख्य रूप से निचली छाती के आसपास महसूस होती है। अनुचित भोजन की आदतें और खराब जीवन शैली भी शरीर में एसिडिक इफेक्ट और जलन के प्रमुख कारण हो सकते हैं। पर एंटीबायोटिक्स और दर्द निवारक दवाएं भी एसिडिक इफेक्ट को ट्रिगर कर सकते हैं।

एंटीबायोटिक्स और एसिडिक इफेक्ट  

पेट और आंतों में कई माइक्रोबायोम होते हैं, जिनमें बैक्टीरिया (अच्छे और बुरे दोनों) शामिल हैं। ये पाचन क्रिया में मदद करते हैं। एंटीबायोटिक्स, शरीर में बैक्टीरिया के संक्रमण का इलाज करने के लिए उपयोग किए जाते हैं, वे आंत (intestine) में मौजूद अच्छे और बुरे बैक्टीरिया के बीच अंतर नहीं कर सकते हैं और उन्हें भी ख़त्म कर देते हैं, जिसके नकारात्मक परिणाम भी हो सकते हैं जैसे-

आंत (intestine) में अच्छे बैक्टीरिया का मरना या कम होना
आंतों के पारिस्थितिकी तंत्र में असंतुलन और हानिकारक जीवाणुओं की संख्या में बढ़ोतरी
पेट के अंदर दबाव का बढ़ना
अन्नप्रणाली में एसिड इफेक्ट का बढ़ना।

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एंटी बायोटिक के दुष्प्रभावों में मितली या उल्टी आना भी शामिल है। चित्र- शटरस्टॉक।

एंटीबायोटिक दवाओं के सेवन के बाद आपको ये साइड इफेक्ट महसूस हो सकते हैं  

मितली और उल्टी
एसिड रिफ्लक्स
पेट में जलन
गैस और सूजन
पेट में असामान्य ऐंठन
दस्त
भूख में कमी

एंटीबायोटिक्स सीधे आपके पेट को प्रभावित करते हैं। जलन होने के कारण, पेट की ग्रंथियां अधिक अम्ल यानी एसिड बनाती है। यह एसिड फ़ूड डाइजेस्टिव सिस्टम में भोजन और एसिड के अधिक पैदा होने का कारण बन सकता है। जिससे गैस या एसिडिटी हो सकती है।

शिशुओं पर लंबे समय तक रहते हैं एंटीबायोटिक के साइड इफेक्ट 

एक शिशु की आंत (intestine) की माइक्रोबियल की संख्या का बच्चे के समग्र स्वास्थ्य पर काफी  ज़्यादा प्रभाव पड़ता है। आंत (intestine) माइक्रोबायोम की विविधता में कमी से कई तरह की एलर्जी और ऑटोइम्यून रोग हो सकते हैं। शिशुओं में एंटीबायोटिक से आंत (intestine) बैक्टीरिया की संख्या कम हो जाती है। अध्ययनों से पता चला है कि शिशु के एंटीबायोटिक उपचार के आठ सप्ताह बाद भी आंत (intestine) माइक्रोबायोम की विविधता (जो गट हेल्थ के लिए बेहद आवश्यक है)  में आई कमी  पूरी नहीं हो पाती है।

एंटीबायोटिक्स लेने के बाद पाचन दुरुस्त करने के लिए फॉलाे करें ये टिप्स 

एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग के नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए आंत (intestine) बैक्टीरिया का पुनर्निर्माण महत्वपूर्ण है। आप कई तरीकों से एंटीबायोटिक दवाओं के साथ आंत (intestine) को ठीक करने की प्रक्रिया को तेज कर सकती हैं:

1. प्रीबायोटिक्स लें 

प्रीबायोटिक्स एक प्रकार का फाइबर है जो आंत (intestine)के रोगाणुओं के लिए “खाद्य स्रोत” के रूप में कार्य करता है। वे बैक्टीरिया और एन्जाइम्स जैसे लाभकारी सूक्ष्मजीवों की वृद्धि  में सहायक हैं, जिससे आंत (intestine) के स्वास्थ्य में सुधार होता है। इसके लिए अपने आहार में लहसुन, प्याज़, केला, जौ, सेब, ओट्स और अलसी के बीज आदि को शामिल करें। 

2. प्रोबायोटिक 

प्रोबायोटिक्स में जीवित बैक्टीरिया और यीस्ट होते हैं, जो आंत (intestine)के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में प्रोबायोटिक का उपयोग करना महत्वपूर्ण है। इस समय आपको दही, छाछ और  पनीर आदि भरपूर मात्रा में लेना चाहिए। इसके अलावा अचार भी प्रोबायोटिक गुण रखता है।

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रइडली प्रीबायोटिक का अच्छा स्रोत है। चित्र- शटरस्टॉक।

3.  किण्वित खाद्य पदार्थ (fermented food)

किण्वित खाद्य पदार्थ प्राकृतिक रूप से प्रोबायोटिक्स से भरपूर होते हैं। वे एंटीबायोटिक उपयोग के बाद आंत (intestine) के स्वास्थ्य के लिए बहुत ही अच्छा है। आदर्श रूप से, दही, डोसा, इडली, खट्टी रोटी और अचार जैसे किण्वित खाद्य पदार्थ को एंटीबायोटिक के उपयोग के बाद नियमित आहार का हिस्सा होना चाहिए। 

4. फल और सब्जियां 

फल और सब्जियां प्राकृतिक रूप से प्रीबायोटिक्स से भरपूर होती हैं (आंत (intestine) माइक्रोबायोम के लिए भी महत्वपूर्ण)। केले, शकरकंद और अन्य कंद प्रीबायोटिक्स के ताजे और आसानी से उपलब्ध होने वाले स्रोत हैं।

5. व्यायाम 

व्यायाम न केवल आपको शेप में रखने के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि आपकी आंत (intestine)  की स्थिति में सुधार करने में भी मददगार  है। यह गुड बैक्टीरिया को बढ़ावा देता है और माइक्रोबायोम की विविधता को बढ़ाता है साथ हीआपके सिस्टम को कोलन कैंसर और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल विकारों से भी बचाता है। 

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शालिनी पाण्डेय शालिनी पाण्डेय

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