Jaundice Prevention : छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को प्रभावित करता है पीलिया, क्या इससे बचा जा सकता है?

लिवर में प्रॉब्लम होने पर जॉन्डिस जैसी समस्या हो सकती है। जॉन्डिस के कारण हमें कई दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इसका ट्रीटमेंट तो उपलब्ध है, लेकिन कुछ उपाय अपनाकर बचाव भी किया जा सकता है।
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जीवनशैली में परिवर्तन करके पीलिया के खतरे को कम किया जा सकता है। चित्र : एडॉबी स्टॉक
स्मिता सिंह Published: 4 Mar 2024, 09:30 am IST
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लिवर शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। यह शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है। इसलिए लिवर का स्वस्थ होना जरूरी है। कभी-कभी कुछ कारणों से लिवर में प्रॉब्लम हो जाती है। इससे फैटी लिवर, लिवर सिरोसिस सहित कई बीमारियां हो जाती हैं। जॉन्डिस भी उनमें से एक है। जॉन्डिस या पीलिया होने पर शरीर पीला पड़ने लगता है। यह बच्चों और बड़ों दोनों में हो सकता है। एक्सपर्ट बताते हैं कि कुछ उपाय अपनाकर जॉन्डिस से बचाव (Jaundice Prevention) किया जा सकता है।

क्या है जॉन्डिस ( what is Jaundice)

हिपेटोलॉजिस्ट डॉ. तेजस्वी एम बताते हैं, ‘जब रेड ब्लड सेल्स मर जाती हैं, तो वे ब्लड में बिलीरुबिन, एक पीला-ऑरेंज कलर छोड़ देती हैं। लिवर ब्लड फ्लो से बिलीरुबिन को फ़िल्टर कर मल में निकाल देता है। यदि सिस्टम में बिलीरुबिन की बहुत अधिक मात्रा है या लीवर इससे ओवरलोडेड हो जाता है, तो यह हाइपरबिलिरुबिनमिया नामक बिल्डअप का कारण बनता है। यही पीलिया का कारण बनता है।  पीलिया के कारण स्किन और आंखों का सफेद भाग भी पीला दिखने लगता (liver health) है।

गॉल ब्लैडर की समस्या का कारण

नवजात शिशुओं को अक्सर यह हो जाता है। लगभग 60% शिशु को जन्म के बाद पहले कुछ दिनों के भीतर पीलिया हो जाता ((Jaundice Prevention) है। इसे इक्टेरस भी कहा जाता है। वयस्कों को भी यह हो सकता है, लेकिन यह कम होता है। पीलिया होने पर व्यक्ति को तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। यह लीवर, ब्लड या गॉल ब्लैडर की समस्या का कारण भी हो सकता है।‘

क्यों होता है जॉन्डिस (Jaundice causes) ?

1 वायरल संक्रमण ( हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी या ई)
• सिरोसिस (लिवर पर घाव) या शराब पीना
• ऑटोइम्यून रोग के कारण हो सकता है
• वंशानुगत स्थितियां जैसे डबिन-जॉनसन सिंड्रोम और गिल्बर्ट सिंड्रोम
• कुछ दवाइयां
• गर्भावस्था भी पीलिया की वजह बन सकता है

पीलिया के लक्षण (Symptoms of Jaundice)

हिपेटोलॉजिस्ट डॉ. तेजस्वी एम बताते हैं, ‘पीलिया के जाने-माने लक्षण हैं- त्वचा का पीला पड़ना। आंखों का पीलिया भी हो सकता है, जिसे स्क्लेरल इक्टेरस भी कहा जाता (liver health) है।

पीलिया या जॉन्डिस के कारण बुखार, पेट दर्द, ठंड लगना, पेशाब का रंग पीला होना, टार- या मिट्टी के रंग का मल, फ्लू जैसे लक्षण, त्वचा में खुजली, वजन घटना, असामान्य रूप से चिड़चिड़ापन महसूस करना जैसे लक्षण दिख सकते हैं। कुछ व्यक्तियों में भ्रम, असामान्य उनींदापन, आसानी से चोट लगना या खून बहना, उल्टी में खून आना जैसे लक्षण भी दीखते हैं।‘

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जॉन्डिस के कारण ब्लड में बिलीरुबिन बढ़ जाता है।चित्र : एडॉबी स्टॉक

क्या हो सकता है इलाज (Jaundice treatment) ?

डॉ. तेजस्वी एम के अनुसार, पीलिया को आमतौर पर आहार या जीवनशैली से प्रबंधित किया जा सकता है। यदि स्थिति गंभीर है, तो व्यक्ति को तत्काल सर्जिकल या लॉन्ग टर्म उपचार की जरूरत हो सकती है। इस दौरान आयरन सप्लीमेंट, एंटीहिस्टामाइन, कोलेस्टारामिन, रिफैम्पिन और नाल्ट्रेक्सोन जैसी दवाएं दी जा सकती हैं।

क्या बचाव किया जा सकता है (How to prevent from jaundice)

1 लाइफ़स्टाइल में बदलाव (changes in lifestyle)

यदि आप बहुत अधिक शराब पीती हैं, तो आपको पीलिया होने का खतरा अधिक हो सकता है। यह मिडल एज में आम है। जीवनशैली में परिवर्तन करके पीलिया के खतरे को कम किया जा सकता (liver health) है।

2 हर्बल सप्लीमेंट (don’t take Herbal supplement more )

बिना डॉक्टर की सलाह के हर्बल सप्लीमेंट लेने से बचें। बिना जरूरत के इसे लेना लीवर के लिए टॉक्सिक साबित हो सकता है।

3 स्मोकिंग नहीं करें (Smoking can cause jaundice)

यदि स्मोकिंग की आदत है, तो इसे तुरंत छोड़ दें। यदि आपको शराब पीने की आदत है, तो लिवर हेल्थ के लिए इसे तुरंत छोड़ दें। किसी भी प्रकार की शराब बहुत कम कर दें या पीना बंद कर दें।

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यदि स्मोकिंग की आदत है, तो  तो लिवर हेल्थ के लिए इसे तुरंत छोड़ दें। चित्र : एडॉबी स्टॉक

4 इंट्रावेनस दवाएं इग्नोर करें (Ignore intravenous medicine)

ऐसी दवाएं जो नस में जाती हैं, इंट्रावेनस दवा कहलाती हैं। इनका उपयोग न करें। कभी भी डॉक्टर द्वारा बताई गई दवा से अधिक दवा न लें। इससे भी लिवर हेल्थ पर बुरा प्रभाव पड़ता (liver health) है।

इनके अलावा, विदेश यात्रा से पहले सभी जरूरी टीके लगवाना, सुरक्षित यौन व्यवहार करना, हेल्दी वजन बनाए रखना, कोलेस्ट्रॉल लेवल को नियंत्रित किये रखना भी जॉन्डिस से बचाव (liver health) कर सकता है।

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