विटामिन डी की कमी के कारण प्रेगनेंट महिलाओं को हाइपरथायरोडिज्म होने की संभावना बढ़ जाती है, स्टडी

प्रेगनेंसी के दौरान महिलाएं विटामिन डी जरूर चेक कराएं। गर्भावस्था की पहली तिमाही में विटामिन डी की कमी से हाइपरथायरोडिज्म होने की आशंका बढ़ जाती है। हालिया स्टडी यही बताती है।

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गर्भवती महिलाओं में विटामिन डी की कमी से हाइपरथायरोडिज्म होने की संभावना होती है। चित्र: शटरस्‍टॉक
स्मिता सिंह Published on: 28 October 2022, 12:55 pm IST
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प्रेगनेंसी के दौरान महिलाएं विटामिन डी जरूर चेक कराएं। गर्भावस्था की पहली तिमाही में विटामिन डी की कमी से हाइपरथायरोडिज्म होने की आशंका बढ़ जाती है। हालिया स्टडी यही बताती है।

प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के परिवर्तन होते हैं। कभी कभी हार्मोनल असंतुलन के कारण भी दिक्कत होती है। कभी- कभी महिलाएं सप्लीमेंट अधिक या कम लेती हैं, तो इससे भी परेशानी होती है। इनमें से एक है हाइपरथायरोडिज्म। आयोडीन की मात्रा अधिक लेने या हार्मोनल असंतुलन के कारण यह समस्या होती है। हालिया स्टडी भी कुछ ऐसा ही बताती है। गर्भवती महिलाओं में विटामिन डी की कमी से हाइपरथायरोडिज्म होने की संभावना होती है।

क्या है स्टडी

हाल में शंघाई हॉस्पिटल में 4280 प्रेगनेंट महिलाओं पर स्टडी की गयी। जिन प्रेगनेंट महिलाओं को विटामिन डी डेफिसिएनसी थी और उनके शरीर में आयोडीन एक्सेस मात्रा में था, उनमें पहले तीन महीने के दौरान थाइरोइड डिसफंक्शन अधिक था। स्टडी बताती है कि प्रेगनेंट महिलाओं में विटामिन डी की कमी और थाइरॉयड डिसफंक्शन में सम्बंध है। स्टडी में हर पांचवीं महिला को विटामिन डी की कमी थी और वे हाइपरथायरोडिज्म की शिकार हुई। न्यू बोर्न बेबी भी विटामिन डी की कमी से जूझ रहा था। विटामिन डी की कमी से जूझ रही महिलाओं में टीपीओ एंटीबॉडी लेवल अधिक था। यह लेवल सीधे तौर पर हाइपरथायरोडिज्म से जुड़ा होता है।

प्रेगनेंसी के दौरान जांच है जरूरी

पहले भी कई अध्ययन सामने आ चुके हैं। जो यह साबित करते हैं कि प्रेगनेंसी के
पहले तीन महीनों के दौरान शरीर में थाइरॉयड बढने की समस्या हो जाती है। इसलिए समय-समय पर इसकी जांच कराना जरूरी है। लेवल ज्‍यादा हो जाने पर यह मां और बच्‍चे दोनों के स्‍वास्‍थ्‍य को प्रभावित करता है। ध्यान दें कि गर्भावस्था के दौरान थाइरॉयड लेवल 0.1 ml/u से 2.5 ml/u के बीच होना चाहिए।
दरअसल, गर्भावस्‍था के दौरान थायराइड ग्रंथि द्वारा बनने वाले हार्मोंस के स्‍तर में कई तरह के बदलाव आते हैं। थायराइड ग्रंथि गले के बीच में होती है। यह पूरे शरीर में हार्मोन के लेवल को नियंत्रित करती है।

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गर्भावस्था में थायरॉयड का बढ़ना या घटना मां और बच्चा, दोनों के स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं होता है। चित्र:शटरस्टॉक

हाइपरथायरायडिज्म के उपचार के लिए एंटीथायरॉइड दवा का इस्तेमाल किया जाता है। यह हार्मोन के उत्पादन को रोकता है। यह दवा प्रेगनेंसी के पहली तिमाही के दौरान दी जाती है। इसलिए डॉक्टर से संपर्क करना बेहद जरूरी है।

खान-पान पर देना होगा विशेष ध्यान

यदि प्रेगनेंट महिला को यह समस्या हो गई है, तो उन्हें खान-पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। ज्यादातर एशियाई देशों में खानपान पर ध्यान नहीं देने के कारण ही यह समस्या होती है। महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान दाल का सेवन जरूर करना चाहिए। दालों में प्रोटीन होता है, जो गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास में मदद करता है। दालों के अलावा संतरा, चकोतरा, मौसंबी और एवोकैडो जैसे फल भी खाना चाहिए।
विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट और आयरन से भरपूर फल कीवी जरूर खाना चाहिए।
विटामिन सी से भरपूर संतरा का भी सेवन करना चाहिए, क्योंकि यह इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है।

साबुत फल खाना बेहतर है
विटामिन सी से भरपूर संतरा का भी सेवन करना चाहिए, क्योंकि यह इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है। चित्र: शटरस्टॉक

गर्भवती महिलाएं विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट, एंटीइंफ्लेमेटरी, फोलेट, मैग्नीशियम और पोटैशियम जैसे पोषक तत्वों से भरपूर स्ट्रॉबेरी को अपने आहार में जरूर शामिल करें।

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लेखक के बारे में
स्मिता सिंह स्मिता सिंह

स्वास्थ्य, सौंदर्य, रिलेशनशिप, साहित्य और अध्यात्म संबंधी मुद्दों पर शोध परक पत्रकारिता का अनुभव। महिलाओं और बच्चों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करना और नए नजरिए से उन पर काम करना, यही लक्ष्य है।

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