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कोविड – 19 के बाद कुछ बच्चों में देखे गए हैं मल्टी सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम के लक्षण, जानिए क्‍या है ये

Published on:25 May 2021, 12:00pm IST
कोविड से रिकवर हुए कुछ बच्‍चों में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अति सक्रिय हो जाती है और हृदय, फेफड़े, रक्त वाहिकाओं, गुर्दे, पाचन तंत्र, मस्तिष्क जैसे महत्वपूर्ण अंगों में सूजन पैदा कर सकती है।
ऐश्‍वर्या कुलश्रेष्‍ठ
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कोविड – 19 के बाद बच्चों को हो सकता है मल्टीसिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम. चित्र : शटरस्टॉक

शनिवार, 22 मई को, बेंगलुरु के एस्टर सीएमआई अस्पताल में एक 13 वर्षीय बच्चे का अजीबो गरीब मामला देखने को मिला, इस बच्चे का दिल केवल 30 प्रतिशत काम कर रहा था। पता चला कि बच्चे को मल्टीसिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम (एमआईएस-सी) लक्षणों के कारण होने वाली समस्या के लिए अस्पताल लाया गया था।

क्‍या है मल्टीसिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम

मल्टीसिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम (एमआईएस-सी) कोविड -19 से ठीक होने के बाद उत्पन्न होता है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अति सक्रिय हो जाती है और हृदय, फेफड़े, रक्त वाहिकाओं, गुर्दे, पाचन तंत्र, मस्तिष्क जैसे महत्वपूर्ण अंगों में सूजन पैदा कर सकती है।

हालांकि, वयस्कों में एमआईएस-सी दुर्लभ है, बच्चों में कोविड के ठीक होने के बाद इसका प्रसार बढ़ रहा है। अगर इसे रोका नहीं गया तो कुछ हफ़्तों में एमआईएस-सी एक विकराल रूप ले सकती है।

कर्नाटक में कोविड टास्क फोर्स के सदस्य और एस्टर सीएमआई के साथ एक बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. श्रीकांत जेटी, का कहना है कि – “पिछले दो हफ्तों में, हमने एमआईएस -सी. के कारण प्रभावित बच्चों के हर दिन लगभग दो मामले देखे हैं।

कोविड के बाद बच्‍चों में दिख रहे हैं ये लक्षण

जो बच्चे कोविड-19 से अधिकतर हल्के लक्षणों के साथ ठीक हुए हैं, वे कुछ हफ्तों से एक महीने के अंतराल के बाद तेज बुखार, लाल आंखें, शरीर पर चकत्तों की शिकायत कर रहे हैं।”

कोविड के बाद बच्‍चों में दिख रहे हैं मल्टीसिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम के लक्षण . चित्र : शटरस्टॉक

डॉ श्रीकांत बताते हैं, “हमने अप्रैल के मध्य के आसपास बैंगलोर के मामलों में पीक देखा था। तब के 25000 से, हम आज 8000 पर आ गए हैं। हालांकि, ठीक एक महीने बाद, हमने बच्चों को फिर से एमआईएस-सी जटिलताओं के साथ बीमार होता हुआ देखना शुरू कर दिया है।”

शहर के रेनबो अस्पताल में भी एमआईएस-सी जटिलताओं में वृद्धि देखी गई है। रेनबो चिल्ड्रन हॉस्पिटल द्वारा देखे गए कोविड -19 मामलों की बात करते हुए, लीड पीडियाट्रिक इंटेंसिविस्ट डॉ. रक्षा शेट्टी बताती हैं कि, “पिछले तीन हफ्तों में, हमारे पास इससे संबंधित 160 केस आए हैं।

यह संख्या बड़ी लग सकती है, क्योंकि बीबीएमपी ने इन मामलों को हमें भेजा है। हल्के होने पर इनका घर पर इलाज किया जा सकता है। इसमें से केवल 15-20 को विशेष देखभाल की आवश्यकता थी और लगभग पांच को यांत्रिक वेंटिलेशन के संदर्भ में समर्थन की आवश्यकता थी। एन्सेफलाइटिस की जटिलता का एक दुर्लभ मामला भी सामने आया था, जहां एक बच्चे का मस्तिष्क प्रभावित हुआ था।

डॉक्टरों का मानना है कि – कुछ मामलों में बच्चा बहुत हल्के या बिना किसी लक्षण के कोविड-19 से पीड़ित हो सकता है, ऐसे में माता-पिता को इसका एहसास भी नहीं होता है। मगर अचानक एक महीने के बाद, प्रतिरक्षा प्रणाली ओवरड्राइव मोड में चली जाती है और अन्य अंगों को प्रभावित करने लगती है।

इन लक्षणों पर ध्यान दें

अगर आपके बच्चे को कुछ ही दिन पहले कोविड – 19 हुआ है और अब रिपोर्ट नेगेटिव आई है, तो डॉ. रक्षा शेट्टी का सुझाव है कि – तेज़ बुखार, पेट दर्द, दस्त, आखों में लालिमा जैसे लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें। साथ ही, कभी-कभी दौरे या ऐंठन जैसे लक्षण भी हो सकते हैं।

कोरोनाकाल के दौरान ऐसे रखें अपने बच्चों का ख्याल. चित्र : शटरस्टॉक

मल्टीसिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम (एमआईएस-सी) का इलाज

डॉ श्रीकांत के अनुसार एमआईएस-सी के लिए सिर्फ आईवीआईजी ट्रीटमेंट (IVIG treatment) की ही सिफारिश की जाती है। इसका इलाज संभव है अगर शुरूआती लक्षण जल्दी पहचान में आ जाएं। हालांकि, डॉ शेट्टी इस बात से सहमत हैं कि जागरूकता की कमी और कार्रवाई में देरी एक बड़ी समस्या खड़ी कर सकती है।

डॉ श्रीकांत बताते हैं – ऐसे में “अस्थमा, फेफड़े की स्थिति, ब्रोंकाइटिस जैसी सांस की बीमारियों वाले बच्चों को बहुत सावधान रहना होगा। आनुवंशिक स्थितियों वाले बच्चे, जो मोटापे से पीड़ित हैं, कैंसर से पीड़ित बच्चे या जो कीमोथेरेपी से गुजर रहे हैं, और इम्यूनोडिफिशिएंसी वाले बच्चे इस विशेष देखभाल श्रेणी में आते हैं, इसलिए, माता-पिता को सतर्क रहना होगा।”

साथ ही, डॉ शेट्टी का मनना है कि ”बच्चों को संतुलित आहार देना चाहिए, तभी इम्युनिटी बढ़ती है।”

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ऐश्‍वर्या कुलश्रेष्‍ठ ऐश्‍वर्या कुलश्रेष्‍ठ

प्रकृति में गंभीर और ख्‍यालों में आज़ाद। किताबें पढ़ने और कविता लिखने की शौकीन हूं और जीवन के प्रति सकारात्‍मक दृष्टिकोण रखती हूं।