Preeclampsia : विशेषज्ञ बता रहें हैं क्या है प्रेगनेंसी में प्रीक्लेम्पसिया की समस्या और इससे होने वाले जाेखिम

गर्भावस्था के दौरान कई तरह की स्वास्थ्य समस्या हो सकती हैं। इसके कारण गर्भावस्था के दौरान होने वाली जटिलता प्रीक्लेम्पसिया हो सकती है। विशेषज्ञ से जानते हैं कि यह समस्या क्यों होती है?
Pregnancy me apki skin aur hair bhi prabhavit ho sakte hain
प्रीक्लेम्पसिया गर्भावस्था की जटिलता है। प्रीक्लेम्पसिया के साथ हाई ब्लड प्रेशर, यूरीन में प्रोटीन का हाई लेवल हो सकता है। चित्र : अडोबी स्टॉक
स्मिता सिंह Published: 16 Jul 2023, 02:00 pm IST
  • 125

गर्भावस्था के दौरान कई तरह की जटिलता (Pregnancy Complications) हो सकती हैं। ये स्वास्थ्य समस्याएं गर्भावस्था से संबंधित होती हैं। ये जटिलता बच्चे के जन्म के दौरान हो सकती हैं। ये बच्चे के जन्म के बाद भी हो सकती हैं। गर्भावस्था के बाद इन समस्याओं का पूरी तरह से हल हो सकता है। गंभीर मामलों में मातृ या भ्रूण मृत्यु का कारण बन सकते हैं। एनीमिया, गर्भकालीन मधुमेह, संक्रमण, गर्भकालीन उच्च रक्तचाप और प्री-एक्लेमप्सिया भी इसमें शामिल हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि प्रीक्लेम्पसिया एक जटिल समस्या (preeclampsia) है। इसकी पहचान होने पर डॉक्टर से तुरंत सलाह लेनी चाहिए।

क्या है प्रीक्लेम्पसिया (What is Preeclampsia)

सी के बिरला हॉस्पिटल में ओब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलोजिस्ट डॉ. अंजलि कुमार अपने इन्स्टाग्राम पोस्ट में बताती हैं, ‘प्रीक्लेम्पसिया गर्भावस्था की जटिलता है। प्रीक्लेम्पसिया के साथ हाई ब्लड प्रेशर, यूरीन में प्रोटीन का हाई लेवल हो सकता है। अधिक होने पर किडनी डैमेज या अन्य ओर्गन डैमेज हो सकता है। प्रीक्लेम्पसिया आमतौर पर गर्भावस्था के 20 सप्ताह के बाद शुरू होता है। यह समस्या होने से पहले महिला का रक्तचाप मानक सीमा में हो सकता है, यानी नार्मल हो सकता है। उपचार नहीं होने पर प्रीक्लेम्पसिया मां और बच्चे दोनों के लिए गंभीर – यहां तक कि घातक जटिलता पैदा कर सकता है।

बच्चे की डिलीवरी (Early Child Delivery in Preeclampsia)

प्रीक्लेम्पसिया होने पर अक्सर बच्चे की शीघ्र डिलीवरी की सलाह दी जाती है। प्रसव का समय इस बात पर निर्भर करता है कि प्रीक्लेम्पसिया कितना गंभीर है। महिला कितने सप्ताह की गर्भवती है। प्रसव से पहले प्रीक्लेम्पसिया के उपचार के दौरान रक्तचाप को कम करने की कोशिश की जाती है। साथ ही, कोम्प्लिकेशन को प्रबंधित करने के लिए लगातार मरीज की निगरानी और दवाएं भी दी जाती हैं। बच्चे के जन्म के बाद प्रीक्लेम्पसिया विकसित हो सकता है। इस स्थिति को प्रसवोत्तर प्रीक्लेम्पसिया (Postpartum Preeclampsia) कहा जाता है।

ऑर्गन डैमेज का है जोखिम (Preeclampsia Symptoms)

डॉ. अंजलि कहती हैं, ‘ विश्व में 2-8 प्रतिशत प्रेगनेंसी ऐसी है, जिसमें मां को गर्भावस्था के दौरान प्रीक्लेम्पसिया हो गया। इसका उपचार नहीं होने के कारण मां और बच्चे, दोनों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़े। प्रीक्लेम्पसिया के कारण हाई ब्लड प्रेशर होना और किडनी में दिक्कत (यूरीन में अतिरिक्त प्रोटीन) होना मुख्य लक्षण हैं। इनके अलावा ब्लड में प्लेटलेट्स के स्तर में कमी, लिवर एंजाइम में वृद्धि के कारण लिवर प्रॉब्लम, गंभीर सिरदर्द भी हो सकता है। विज़न में परिवर्तन, सांस की तकलीफ, पेट में दर्द, मतली या उलटी हो सकती है।

Heartburn-in-pregnancy (1)
प्रीक्लेम्पसिया के कारण हाई ब्लड प्रेशर होना और किडनी में दिक्कत होना मुख्य लक्षण हैं। चित्र शटरस्टॉक

डॉक्टर से कब मिलना है (Doctor Advice for Preeclampsia)

डॉ. अंजलि के अनुसार, हालांकि गर्भावस्था के दौरान आमतौर पर सिरदर्द, मतली और दर्द की समस्या हो सकती है। पहली गर्भावस्था के दौरान प्रीक्लेम्पसिया से होने वाली समस्या की पहचान करना मुश्किल हो सकता है। लेकिन अचानक ब्लड प्रेशर बढ़ने पर सतर्क हो जायें। अचानक ब्लड प्रेशर बढ़ने के अलावा, गंभीर सिरदर्द, धुंधली दृष्टि या गंभीर पेट दर्द या सांस में परेशानी होने पर तुरंत हेल्थकेयर प्रोवाइडर से मिलने की कोशिश करें। यहां होम रेमेडी कि बजाय डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है

आराम है जरूरी (Rest for Preeclampsia)

यदि गर्भावस्था का लास्ट फेज आने में बहुत समय बाकी है और प्रीक्लेम्पसिया (preeclampsia) के हल्के लक्षण हैं, तो डॉक्टर आराम की सलाह दे सकते हैं। आराम करने से रक्तचाप को कम करने में मदद मिलती है। गर्भनाल (Placenta) में रक्त का प्रवाह बढ़ता है और बच्चे को लाभ होता है। डॉक्टर कुछ लोगों को बिस्तर पर लेटने और ज़रूरत पड़ने पर ही बैठने या खड़े होने की सलाह दे सकते हैं

bedrest pregnancy me
प्रीक्लेम्पसिया  में आराम करने से रक्तचाप को कम करने में मदद मिलती है। चित्र : शटरस्टॉक

सिजेरियन डिलीवरी (cesarean delivery in Preeclampsia)

परेशानी अधिक होने पर शारीरिक गतिविधियां बहुत अधिक सीमित करने की सलाह दी जा सकती है। नियमित
ब्लड प्रेशर चेकअप और यूरीन टेस्ट भी जरूरी है। इससे गर्भ में पल रहे बच्चे के हेल्थ पर बुरा प्रभाव नहीं पड़ता है। बहुत गंभीर मामलों में कोई विकल्प नहीं होने पर जितनी जल्दी हो सके प्रसव या सिजेरियन डिलीवरी कराई जा सकती है। प्रसव के कुछ हफ्तों के बाद प्रीक्लेम्पसिया के लक्षण दूर होते हैं।

यह भी पढ़ें :- इनफर्टिलिटी की समस्या दूर कर सकता है मानव निर्मित प्लेसेंटा सेल, वैज्ञानिक बता रहे हैं और भी फायदे

  • 125
लेखक के बारे में

स्वास्थ्य, सौंदर्य, रिलेशनशिप, साहित्य और अध्यात्म संबंधी मुद्दों पर शोध परक पत्रकारिता का अनुभव। महिलाओं और बच्चों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करना और नए नजरिए से उन पर काम करना, यही लक्ष्य है।...और पढ़ें

अगला लेख