एक्सपर्ट बता रहीं हैं कैसे आपके समग्र स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है मेनोपॉज

वर्ल्ड मेनोपॉज डे पर एक विशेषज्ञ बता रहीं हैं जीवन के इस अहम बदलाव के बारे में सब कुछ।
40 के दशक में हैं और आपका वज़न बढ़ रहा है, तो हो सकता है कि इसका कारण मेनोपॉज हो। चित्र : शटरस्टॉक
Dr CS Mythreyi Updated on: 18 October 2021, 15:06 pm IST
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मेनोपॉज, पेरी-मेनोपॉज या पोस्ट मेनोपॉज एक महिला के जीवन में ऐसे चरण होते हैं, जब उसके पीरियड्स रुक जाते हैं। यह एक महिला के प्रजनन वर्षों के अंत का संकेत है। प्रजनन के अलावा भी ये आपकी सेहत को कई तरह से प्रभावित करता है। कोई भी महिला जीवन के इस बदलाव से बच नहीं सकती। इसलिए इस विश्व रजोनिवृत्ति दिवस (World Menopause Day) पर मेनोपॉज के बारे में जानिए वो सभी बातें, जो इसे डील करना आपके लिए आसान बना सकती हैं।

जानिए कैसे शुरू होती है ये पूरी प्रक्रिया

पेरी-मेनोपॉज़ इस प्रक्रिया का पहला चरण है और मेनोपॉज़ से 8 से 10 साल पहले शुरू हो सकता है। मेनोपॉज वह समय है जो आपके मासिक धर्म चक्र के अंत का प्रतीक है। जब आपको लगातार 12 महीने तक पीरियड्स नहीं होते, तब माना जाता है कि मेनोपॉज शुरू हो गया।

पोस्ट मेनोपॉज, जैसा कि नाम से पता चलता है, इसके बाद की अवस्था है। एक महिला जब मेनोपॉज से गुजरती है, तो उसके जीवन में शारीरिक और मानसिक तौर पर कई उतार – चढ़ाव आते हैं। साथ ही, इसके बाद वे कुछ बीमारियों से भी ग्रसित हो सकती हैं।

जीवन के इस अहम बदलाव के बारे में सब कुछ। चित्र : शटरस्टॉक

क्या है मेनोपॉज की सही उम्र

यह उम्र बढ़ने का स्वाभाविक हिस्सा है जो आमतौर पर 45 से 55 वर्ष की आयु के बीच होता है। इस उम्र में एक महिला के एस्ट्रोजन का स्तर कम होने लगता है। विकसित देशों में इस स्तर तक पहुंचने के लिए एक महिला की औसत आयु 51 है।

भारत में, रजोनिवृत्ति की औसत आयु 46-47 वर्ष थी, जो कुछ विकसित देशों की आयु से काफी कम है।

अगर कोई महिला 40 साल की उम्र से पहले इसे छू लेती है, तो इसे प्रीमैच्योर मेनोपॉज कहते हैं। प्रारंभिक शुरुआत 45 वर्ष की आयु से पहले होती है। जबकि समय से पहले मेनोपॉज 40 वर्ष से कम उम्र की लगभग 1% महिलाओं को होता है।

क्या हैं अर्ली मेनोपॉज के कारण

ज़्यादातर मामलों में इसका कारण ज्ञात नहीं है
ऑटोइम्यून विकार जहां थायरॉयड और अंडाशय जैसे शरीर के अंगों के लिए प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया होती है।
आनुवंशिक कारण जो परिवारों में वंशानुगत चल रहे हो सकते हैं
संक्रमण या सूजन की स्थिति, जो डिम्बग्रंथि के ऊतकों को नुकसान पहुंचा सकती है

अब जानिए इसके लक्षण

हॉट फ्लैश, जहां एक व्यक्ति को पसीने के साथ शरीर में अचानक गर्मी की लहर महसूस होती है।

योनि का सूखापन जिसके कारण यौन संबंध बनाने में कठिनाई होती है और बार-बार मूत्र संक्रमण होता है।

नींद आने में कठिनाई।

भावनात्मक परिवर्तन जैसे मूड स्विंग, चिड़चिड़ापन और रोने का मन करना।

मीनोपॉज के बाद होने वाली वेजाइनल ड्राईनेस को दूर करने में मदद कर सकता है नारियल तेल। चित्र : शटरस्टॉक

क्या हैं इसके जोखिम

स्मृति हानि सहित विभिन्न तंत्रिका संबंधी समस्याएं
यौन रोग
दिल की बीमारी
मनोवस्था संबंधी विकार
ऑस्टियोपोरोसिस

क्या इसे ठीक किया जा सकता है?

अर्ली मेनोपॉज से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को देखते हुए एचआरटी की सिफारिश की जाती है। यह समय से पहले रजोनिवृत्ति वाली सभी महिलाओं के लिए हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (एचआरटी) है। इसके अलावा

डॉक्टरों के पास नियमित रूप से जाना और उनकी सलाह का पालन करना
बहुत सारे तरल पदार्थों का सेवन
उच्च प्रोटीन और उच्च कैल्शियम युक्त आहार
एंटीऑक्सीडेंट के सप्लीमेंट जैसे विटामिन D
कसरत और व्यायाम
चिड़चिड़ापन जैसे भावनात्मक बदलावों के बारे में पार्टनर या दोस्तों से बात करना
सूती कपड़े पहनना
उच्च तापमान से बचना
धूम्रपान बंद करना और वजन कम करना

रजोनिवृत्ति में देरी भी है एक मुद्दा

यदि कोई महिला 55 वर्ष या उससे अधिक उम्र की है और अभी भी रजोनिवृत्ति शुरू नहीं हुई है, तो डॉक्टर को दिखाएं। रजोनिवृत्ति में देरी मोटापे से ग्रस्त महिलाओं में सामान्य है।

जानिए इसके कारण

इसका पारिवारिक इतिहास
हाई बॉडी मास इंडेक्स
थायराइड विकार
एस्ट्रोजेन-उत्पादक
डिम्बग्रंथि का कैंसर

40 से पहले अगर मेनोपॉज का सामना कर रहीं हैं, तो इन बातों का ध्‍यान रखें। चित्र: शटरस्‍टाॅॅॅक

क्या लेट मेनोपॉज फायदेमंद हो सकता है?

लेट मेनोपॉज से ऑस्टियोपोरोसिस, स्ट्रोक और हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा कम हो जाता है। लंबे प्रजनन जीवन के परिणामस्वरूप लंबी जीवन प्रत्याशा हो सकती है।

ये नुकसानदेह भी हो सकता है?

लेट मेनोपॉज में स्तन, डिम्बग्रंथि और गर्भाशय के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। यह एक महिला के शरीर द्वारा एस्ट्रोजन का उत्पादन करने में अधिक समय लगने के कारण होता है। इनमें से कई बीमारियों का समय पर इलाज करके रोका जा सकता है। इसके लिए –

एक अच्छा लाइफस्टाइल
कम वसा, उच्च प्रोटीन उच्च फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर आहार
नियमित व्यायाम और वजन को नियंत्रण में रखना
नियमित मैमोग्राम, पैप स्मीयर और स्त्री रोग संबंधी टेस्ट विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं

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लेखक के बारे में
Dr CS Mythreyi

Dr CS Mythreyi is Gynaecologist and Obstetrician Madhukar Rainbow Hospital

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