ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल कर सकता है चिरायता, जानिए इसके खास एंटीडायबिटिक गुणों के बारे में 

Chirata ke fayde
एंटी डायबिटिक गुण होने के कारण चिरायता ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है| चित्र : शटरस्टॉक
स्मिता सिंह Published on: 28 September 2022, 20:12 pm IST
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भारत में सदियों से बीमारी खत्म करने में जड़ी-बूटियों का प्रयोग किया जाता रहा है। ऐसी ही एक खास जड़ी-बूटी (Herb) है चिरायता (Chirata) यानी स्वेर्टिया (Swertia)। इसका उपयोग मलेरिया से आये बुखार को उतारने के लिए किया जाता रहा है। इसे दिव्य बीजों के साथ जोड़ा जाता है। ग्रामीण इलाकों में आज भी बुखार होने पर या फोड़े- फुंसी अधिक होने पर चिरायता का प्रयोग किया जाता है। पर हाल के शोधों में यह सामने आया है कि चिरायता आपके ब्लड शुगर लेवल (Chirata or Swertia Benefits for Diabetes) को भी कंट्रोल कर सकता है। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।  

आयुर्वेदिक दवाओं में प्रयोग 

आयुर्वेद (Ayurved) और होमियोपैथ (Homeopath) की दवाओं में भी चिरायता का प्रयोग किया जाता रहा है। चिरायता शरीर से टॉक्सिन(Toxin) को बाहर कर देता है और पाचन तंत्र को दुरुस्त करता है।  यह स्किन प्रॉब्लम को दूर करने में भी मदद करता है। रिसर्च बताते हैं कि चिरायता में ब्लड शुगर कंट्रोल करने की (Chirata for Diabetes) भी क्षमता है।   

पहले जानिए क्या है चिरायता (Chirata) 

वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन (WHO) ने पूरी दुनिया के 21000 पौधों को चिकित्सकीय उपयोग के लिए उपयुक्त  माना है। इसमें से 800 पौधों को एंटी डायबिटिक कहा गया है। इसमें से एक है चिरायता। यह मुख्य रूप से भारत में पाया जाता है। यह हर्ब 1.5 मीटर की ऊंचाई तक बढ़ता है। पेड़ के सभी भागों को बीमारियों को दूर भगाने में सक्षम पाया गया है। 

इसके बारे में क्या कहती हैं रिसर्च 

पिनाकी डे, जोगिन्दर सिंह और जयतो नायक की टीम ने वर्ष 2018 में चिरायता के खास स्पेसीज स्वेर्तिया चिरायता (swertia Chirata)  के  हाइपोग्लायसेमिक पोटेंशियल पर रिसर्च किया। उन लोगों ने पाया कि चिरायता हाइपोग्लायसेमिक गुणों वाला है। यह गुण पौधे के पत्तों, छाल, जड़, तना यहां तक कि पूरे पौधे में पाया जाता है। इसलिए यह ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल करने में मदद कर सकता है।  

इसके बाद थॉमसन, कविता और दत्तारी की टीम ने भी अपनी रिसर्च में चिरायता को एंटी डायबिटिक और एंटी कार्सिनोजेनिक, एंटी माइक्रोबियल, एंटी इन्फ्लेमेटरी पाया। उन्होंने रिसर्च के निष्कर्ष में यह भी बताया कि डोज की सही जानकारी नहीं होने के कारण चिरायता एंटी डायबिटिक मेडिसिन के रूप में प्रसिद्ध नहीं हो पाया है। चिरायता को एलोपथिक दवाओं के साथ भी लिया जा सकता है, लेकिन इसके सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी जरूरी है। ये दोनों रिसर्च पब मेड सेंट्रल में शामिल हो चुके हैं।

ब्लड शुगर पर कैसे काम करता है चिरायता  

चिरायता में बायो एक्टिव कंपाउंड अमरोंगेटन होते हैं। यह एंटी डायबिटिक प्रभाव दिखाता है। चिरायता हाइपोग्लाइसेमिक गुणों वाला होता है। इसका सेवन करने से शरीर में इंसुलिन का उत्पादन करने वाली सेल्स की सक्रियता बढ़ जाती है। इससे मेटाबोलिज्म भी सक्रिय होता है। इसलिए यह ब्लड शुगर लेवल घटाने में सक्षम है। 

चिरायता में मौजूद महत्वपूर्ण पोषक तत्व 

चिरायता एंटी ऑक्सीडेंट अल्कलोइडस और ग्लायकोसाइड्स से भरपूर होते है। यह जेनथोनस, चिराटानिन, फ़्लवेनोइड, पालमिटिक एसिड, अर्सोलिक एसिड, टर्पेनोइड्स कंपाउंड से भी समृद्ध होते हैं। इसमें कई तरह के बायोएक्टिव कंपाउंड भी होते हैं। इसका एंटी इन्फ्लामेटरी गुण पैंक्रियाज के सेल को डैमेज होने से बचाता है। साथ ही यह इंसुलिन रिलीज़ को बढ़ावा देता है। जिससे ब्लड शुगर लेवल घट जाता है।

शुगर के मरीज कैसे करें चिरायता का सेवन 

एक्सपर्ट शुगर पेशेंट को रोज सुबह खाली पेट चिरायता का सेवन करने की सलाह देते हैं। वे चाहें तो चिरायता का काढ़ा या चिरायता चूर्ण भी ले सकते हैं।

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चिरायता का काढ़ा रोज पीने पर ब्लड शुगर कंट्रोल रहता है | चित्र : शटरस्टॉक

वहीं चिरायता की चाय पीना भी एक आसान ऑप्शन है। पर इसके सेवन से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर कर लें।  

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स्मिता सिंह स्मिता सिंह

स्वास्थ्य, सौंदर्य, रिलेशनशिप, साहित्य और अध्यात्म संबंधी मुद्दों पर शोध परक पत्रकारिता का अनुभव। महिलाओं और बच्चों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करना और नए नजरिए से उन पर काम करना, यही लक्ष्य है।

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