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एक्‍सपर्ट से जानिए तनाव के अलावा क्‍या हैं वे कारण, जो बढ़ा रहे हैं इनफर्टिलिटी का खतरा

Updated on: 10 December 2020, 12:09pm IST
विभिन्‍न अध्‍ययनों में यह सामने आ चुका है कि मौजूदा समय सबसे ज्‍यादा तनावग्रस्‍त समय है। पर क्‍या आप जानती हैं कि यह तनाव सिर्फ आपके मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य को ही नहीं बल्कि आपके प्रजनन स्‍वास्‍थ्‍य को भी प्रभावित करता है।
Dr. Nupur Gupta
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ये रसायन महिलाओं ीी फर्टिलिटी को प्रभावित कर रहे हैं। चित्र: शटरस्‍टॉक
ये रसायन महिलाओं ीी फर्टिलिटी को प्रभावित कर रहे हैं। चित्र: शटरस्‍टॉक

इनफर्टिलिटी एक कॉमन पर गंभीर समस्‍या है। आंकड़े बताते हैं कि युवा महिलाओं में बांझपन का खतरा बढ़ता जा रहा है। पर चिंता की बात यह है कि इसकी वजह प्रजनन संबंधी कोई दोष नहीं बल्कि आपका तनाव है। आइए जानते हैं कि तनाव कैसे आपके प्रजनन स्‍वास्‍थ्‍य को प्रभावित करता है।

क्‍यों तनाव के कारण बढ़ जाती है इनफर्टिलिटी

वास्तव में तनाव से महिलाओं के दिमाग, पिट्यूटरी और ओवेरी के बीच कम्युनिकेशन भी गड़बड़ी पैदा कर देता है। तनाव के दौरान शरीर में कई तरह के न्यूरोकेमिकल परिवर्तन होते हैं। इसके अतिरिक्त गर्भधारण की प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण केमिकल मैसेंजर की स्थिति भी भावनाओं में परिवर्तन के साथ बदल जाती है। जिससे बांझपन का खतरा बढ़ जाता है।

क्‍या है इनफर्टिलिटी का कारण

खराब लाइफस्‍टाइल के कारण युवा महिलाओं में तीन सबसे ज्‍यादा बढ़ने वाली समस्‍याएं हैं एडोनोमायोसिस, एन्डोमेट्रीओसिस और पीसीओडी। ये तीनों ही बांझपन या इनफर्टिलिटी को बढ़ावा देती हैं।

सबसे पहले जानते हैं ऐडेनोमायोसिस के बारे में

ऐडेनोमायोसिस औरतों को होने वाली एक ऐसी बीमारी होती है, जिसमें गर्भाशय की मांसपेशियों के भीतर लाइनिंग टिश्यू (एंडोमीट्रियम) का स्थानान्तरण गलत जगह पर होता है। जिससे मांसपेशियों में सूजन, गर्भपात की संभावना और गंभीर स्थिति में गर्भाशय का सिकुड़़ना जैसी परेशानियां होने लगती है।

ऐडेनोमायोसिस औरतों को होने वाली एक ऐसी बीमारी है, जिसमें मां बनना मुश्किल हो जाता है। चित्र: शटरस्‍टॉक
ऐडेनोमायोसिस औरतों को होने वाली एक ऐसी बीमारी है, जिसमें मां बनना मुश्किल हो जाता है। चित्र: शटरस्‍टॉक

एंडोमीट्रियोसिस क्‍या है

इसी प्रकार, एंडोमीट्रियोसिस में ऊतक सामान्य रूप से गर्भाशय के अंदर की लाइनें बढ़कर गर्भाशय के बाहर (एंडोमेट्रियल प्रत्यारोपण) आ जाती हैं। जिससे कुछ मामलों में गंभीर दर्द होने लगता है।

सबसे आम है पीसीओडी

पीसीओडी में अंडाशय में वृद्धि होने लगती है और ज्यादातर महिलाओं को यह प्रजनन आयु में होता है। यह इस समय की सबसे ज्‍यादा कॉमन समस्‍या है।
सौभाग्य से, इस रोग के चेतावनी संकेतों को ध्यान से देखें और सही समय पर आप अपने डॉक्टर से संपर्क करें तो समाधान हो सकता है।

क्‍या हैं पीसीओडी के लक्षण

इस रोग के लक्षण मासिक धर्म चक्र से जुड़े संबंधिक कारण एक समान ही हैं। चाहे कभी-कभी/लंबे समय तक या अत्यधिक रक्तस्राव और माहवारी और अण्डोत्सर्ग के दौरान दर्द। रोग के अन्य लक्षण भी है पेट में ऐंठन और रक्त के बड़े क्लाट्स पड़ना।

पीसीओडी के मामले में अनचाहे बालों में बढ़ोतरी, मुंहासे और मोटापा आम लक्षण हैं। इसके शीघ्र निदान और उपचार से लंबे समय तक होने वाली जटिलताओं के खतरे को कम करता है, जैसे टाइप 2 डायबिटीज और हृदय रोग।

आम तौर पर यह स्थिति 35 और 50 की उम्र के बीच महिलाओं में पाई जाती है, लेकिन अब युवा लड़कियां भी इसका शिकार होने लगी हैं। इसलिए शुरुआती 20 साल में अगर आपके पीरियड्स मिस होते हैं, तो आपको यह सलाह दी जाती है कि आप किसी चिकित्सक को दिखाएं। जिससे भविष्य में होने वाली परेशानी से बचा जा सकें।

पीसीओडी युवा महिलाओं में बढ़ती जा रही समस्‍या है। चित्र: शटरस्‍टॉक
पीसीओडी युवा महिलाओं में बढ़ती जा रही समस्‍या है। चित्र: शटरस्‍टॉक

पार्टनर का तनाव भी है खतरनाक

यह प्रमाणित हो चुका है कि उम्र, वजन और धूम्रपान एक सामान्य स्वास्थ्य को प्रभावित करतें हैं। साथ ही इन सभी का असर आपकी प्रजनन क्षमता पर भी पड़ता है।

ऑक्सिडेटिव तनाव बढ़ जाता है और वीर्य में एंटीऑक्सीडेंट का स्तर उम्र के साथ कम हो जाता है। पुरुषों के उम्र बढ़ने के साथ ही शुक्राणु डीएनए विखंडन भी बढ़ जाती है। कम वीर्य गुणवत्ता वाले पुरुषों के आहार में अमूमन एंटीऑक्सिडेंट का सेवन कम ही देखा गया है।

एंटीऑक्सिडेंट शुक्राणु में सुधार और ऑक्सिडेटिव तनाव दिखाता है कि पुरुषों के वीर्य में वृद्धि दर्ज होती है जिसका शुक्राणु अच्छी तरह से परिवर्तन नहीं करता है और उनके डीएनए के विखंडन संवर्धित की गई है।

स्‍मोकिंग है सबसे खतरनाक

महिला द्वारा धूम्रपान करना सफलता की संभावना को 50 प्रतिशत कम करता है और गर्भपात की संभावना बढ़ जाती है।

और सूची यहीं खत्म नहीं हो जाती है। वही इस मामले में अभी और अधिक शोध करने की जरूरत है, विशेषज्ञों के अनुसार मानसिक तनाव, कैफीन की खपत, शराब की खपत और पर्यावरण प्रदूषण से होने वाले दुष्‍प्रभाव अंतत: बांझपन की ओर ले जाते हैं।

नई तकनीक हो सकती है मददगार

प्रजनन क्षमता में सुधार के लिए लगातार शोध किए जा रहे हैं। इस संदर्भ्‍ में नई इमेजिंग तकनीक जैसे 3 डी अल्ट्रासोनोग्राफी और एमआरआई ने नॉन इनवेसिव का शीघ्र निदान की दिशा में सकारात्‍मक पहल की है।

एक बार निदान हो जाने से, रोग दवाओं और पिछले 20 वर्षों में नियोजित किए गए मेडिकल और संयुक्त मेडिको सर्जिकल उपचार की एक किस्म के साथ ठीक किया जा सकता है। इस उद्देश्य के लिए उपयोग पहली एजेंट गोनाडोटोफिन रिलिजिंग हार्मोन एगोनिस्ट(जीएनआरएचए) है और अब तक इसका सफलता दर उच्च रहा है।

नई तकनीक की मदद से प्रजनन संबंधी समस्‍याओं को कम किया जा सकता है। चित्र : शटरस्टॉक
नई तकनीक की मदद से प्रजनन संबंधी समस्‍याओं को कम किया जा सकता है। चित्र : शटरस्टॉक

कई ऐसी रिपोर्ट्स प्रकाशित हुई हैं जिसमें जीएनआरएचए से साथ बांझपन के सफल उपचार, अकेले या सर्जरी के संयोजन साथ के बारे में बात हुई है।

आईवीएफ के दौरान शराब का सेवन भी है नुकसानदायक

इस संदर्भ में हुए एक शोध में यह सामने आया है कि आईवीएफ गर्भावस्था में कमी और संभवतः गर्भपात की दरों में वृद्धि हुई है। अंत में, जीवन विकल्प और प्रजनन पर किसी तरह की चर्चा करने से पहले चिंता, तनाव और अवसाद के प्रभावों पर चर्चा किए बिना अधूरा होगा।

विभिन्न अध्ययनों से दिखाई देता है कि इन लक्षणों का अनुभव कर रही महिलाओं में गर्भावस्था प्राप्त करने की सफलता दर कम है।

इसलिए लेडीज, अगर आप फैमिली प्‍लान कर रहीं हैं, तो सबसे पहले तनाव को अपनी जिंदगी से बाहर करें।

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Dr. Nupur Gupta Dr. Nupur Gupta

Dr. Nupur Gupta is Director - Obs & Gynecologist, Well Woman Clinic