लंबे समय तक एक ही जगह पर बैठने, वर्कआउट न करने और सोने के दौरान मांसपेशियों में आने वाला खिंचाव गर्दन में दर्द और स्टिफनेस को बढ़ा देता है। इससे स्पाइन में ऐेंठन महसूस होती है, जिससे सिरदर्द (reasons of headache) का भी सामना करना पड़ता है। रोजमर्रा के जीवन में बरती गई लापरवाही इस समस्या को बढ़ा देती है। इसके चलते गर्दन को हिलाने डुलाने में भी तकलीफ होती है, जिससे रोजमर्रा के कार्य बाधित हो जाते हैं। जानते हैं गर्दन में दर्द के कारण (causes of stiff neck) और उसे दूर करने के उपाय।
इस बारे में बातचीत करते हुए फिज़िशियन डॉ विवेक लूम्बा बताते हैं कि तनाव के चलते गर्दन और कंधों के मसल्स में स्टिफनेस बढ़ने लगती है। इसके चलते देर तक काम करने से गर्दन में दर्द (reasons of neck pain) का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा चोटिल होने और मसल्स में आने वाला खिंचाव इस समस्या को बढ़ा देता है। सोने के दौरान उचित पोज़िशन न अपनाना और बिना रूके लगातार काम करना भी मसल्स में ऐंठन को बढ़ा देता है। इससे राहत पाने के लिए डेस्क एक्सरसाइज़, चेयर स्क्वैट और लेटते व बैठते समय सही पोश्चर को अपनाना चाहिए।
गर्दन को हिलाने के दौरान दर्द महसूस होता है। साथ नर्वस कंप्रैस होने लगती हैं, जिससे हाथों और बाजूओं में नंबनेस और झनझनाहट होने लगती है। इससे माइग्रेन का जोखिम भी बढ़ जाता है। वे लोग जो देर तक वर्कआउट करते हैं, उससे भी गर्दन में जर्क यानि झटके का सामना करना पड़ता है।

लगातार घंटों तक एक ही पोज़िशन में बैठकर काम करने की जगह 30 मिनट बाद अपनी जगह से उठें और वॉक करें। इसके अलावा अपनी गर्दन को झुकाकर काम करना भी नेक पेन का कारण बनने लगता है। ऐसे में अपनी स्क्रीन को अपने हेड से अलाइन करके रखें।
गलत पोश्चर में सोना भी गर्दन के दर्द को बढ़ा देता है। ऐसे में तकिला लेकर सोना अवॉइड करे। सिर को उंचाई पर रखने की जगह फ्लेट सरफेस पर सोने का प्रयास करें। इससे गर्दन और कमर में बढ़ने वाली स्टिफनेस का कम किया जा सकता है।
शरीर में बढ़ने वाले दर्द और तनाव से दूर रहने के लिए कुछ देर स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज़ करें। इससे मसल्स में बढ़ने वाली ऐंठन कम होती है और मांसपेशियों में लचीलापन बढ़ जाता है। शोल्डर स्ट्रेच, आर्म स्ट्रेच और लेग स्ट्रेचिंग से शरीर को फायदा मिलता है। इससे कोर मसल्स को भी मज़बूती मिलती है।

ऐंठन को दूर करने के लिए कोल्ड कंप्रैस से कुछ देर तक सिकाई करें। इससे गर्दन की मांसपशियों में बढ़ने वाली कॉन्टरेक्शन कम होने लगती है। संकुचित मांसपेशियां रिलैक्स हो जाती है, जिससे दर्द व खिंचाव देनों से मुक्ति मिल जाती है। दिनभर में 2 बार खिंचाई अवश्य करें।
नेक और बैक मसल्स में बढ़ रहे तनाव को दूर करने के लिए मसाज की मदद लें। इससे मसल्स रिलैक्स होने लगते हैं और गर्दन का दर्द कम हो जाता है। नियमित तौर पर मसाज से गर्दन के पीछे के मसल्स भी रिलैक्स होते है। साथ ही बाजूओं का दर्द भी कम होने लगता है।
काम करने के दौरान सही पोश्चर में बैठें। इससे स्पाइन को मज़बूती मिलती है और गर्दन व कंधों के मसल्स भी रिलैक्स रहते हैं। गलत तरीके से बैठना दर्द और शरीर के पोश्चर को बदल देता है, जिससे बैक हंप समेत शरीर में कई समस्याओं का खतरा बढ़ने लगता है।
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