बरसात के साथ बढ़ने लगता है आई फ्लू का खतरा, जानिए इससे बचाव के उपाय

मानसून में आई फ्लू का खतरा बढ़ जाता है। कंजक्टिवाइटिस से ग्रस्त होने पर आंखों में सूजन व डिसचार्ज की समस्या बढ़ने लगती है। जानते हैं आई फ्लू के लक्षण और इसे दूर करने के कुछ उपाय भी
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आंख की आउटर लेयर जिसे कंजक्टिवा कहा जाता है उसमें सूजन आ जाती है, जो आई फ्लू का कारण बन जाती है। चित्र- अडोबी स्टॉक
ज्योति सोही Updated: 2 Jul 2024, 07:08 pm IST
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मॉनसून के दिनों में वातावरण में ह्यूमिडिटी बढ़ने से कई प्रकार के संक्रमण पनपने का खतरा बढ़ जाता है और उन्हीं में से एक है आई फ्लू (eye flu) । इसके चलते आंखों में लालिमा या हल्का गुलाबी रंग नज़र आने लगता है। इस समस्या को कंजक्टिवाइटिस कहा जाता है। इस समस्या से ग्रस्त होने पर आंखों में सूजन व डिसचार्ज की समस्या बढ़ने लगती है। जानते हैं आई फ्लू के लक्षण (symptoms of eye flu)और इसे दूर करने के कुछ उपाय भी।

आई फ्लू किसे कहा जाता है (What is eye flu)

इस बारे में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ अनुराग नरूला बताते हैं, कि आंख की आउटर लेयर जिसे कंजक्टिवा कहा जाता है उसमें सूजन आ जाती है, जो आई फ्लू का कारण बन जाती है। ये समस्या बैक्टीरियल और वायरल संक्रमण से फैलने लगती है। दरअसल, मॉनसून के दिनों में उमस के कारण बैक्टीरिया जल्दी ग्रो करने लगते हैं । ऐसे में किसी भी आई ड्राप या एंटीबायोटिक को लेने से पहले डॉक्टर से अवश्य संपर्क करें।

Eye flu ke kaaran
आंखों पर गंदे हाथ लगाने या फिर किसी और व्यक्ति का चश्मा या रूमाल प्रयोग करने से ये समस्या बढ़ने लगती है। चित्र- अडोबी स्टॉक

क्यों बढ़ने लगती है ये समस्या

आंखों पर गंदे हाथ लगाने या फिर किसी और व्यक्ति का चश्मा या रूमाल प्रयोग करने से ये समस्या बढ़ने लगती है। दरअसल, आंखों से निकलने वाले तरल पदार्थ के संपर्क में आने से इस समस्या का खतरा बढ़ जाता है। एक से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचने वाले इस संक्रामक रोग से ग्रस्त व्यक्ति की आंखों को पिंक आई या आई कोल्ड भी कहा जाता है। ये रोग किसी को देखने से नहीं फैलता है।

जानें आई फ्लू के लक्षण (symptoms of eye flu)

  • आंखों में लगातार खुजली और जलन का बढ़ जाना
  • बार बार आंखों से पानी का आना और बार बार आंखों को पोंछना
  • आई लिड्स में रूखापन महसूस होना
  • पीला या सफेद रंग का गाढ़ा डिसचार्ज होना और आंखों का चिपक जाना
  • कंजक्टिवा पर लालिमा का बढ़ना और रोशनी में रहने से दिक्कत होना

इस समस्या से बचने के लिए इन टिप्स को करें फॉलो

1. हाथों को बार बार धोएं

किसी भी प्रकार के संक्रमण के प्रभाव को कम करने के लिए आंखों को छूने से पहले हाथों को धो लें। इसके अलावा कॉटेक्ट लैंसर रिमूव करने से पहले भी हैंड हाइजीन का ख्याल रखना आवश्यक है। हाथों को चेहरे पर लगाना अवॉइड करें। इसके अलावा आंखों को भी साफ पानी से अवश्य धोएं। इससे आंखों की चिपचिपाहट को कम किया जा सकता है।

hygiene ka khyal rakhne se eye flu se bachav kiya ja sakta hai.
किसी भी प्रकार के संक्रमण के प्रभाव को कम करने के लिए आंखों को छूने से पहले हाथों को धो लें। चित्र : अडोबी स्टॉक

2. पर्सनल चीजों को शेयर न करें

आंखों से जुड़ी समस्या से ग्रस्त व्यक्ति को अपनी मूलभूत चीजों को अलग रखना चाहिए। अपने तौलिए से लेकर रूमाल और पिलो तक किसी के साथ भी शेयर न करें। इसके अलावा अन्य लोगों से कुछ दिन तक ज्यादा करीब न रहें। इससे संक्रामक रोग फैलने का खतरा रहता है।

3. प्रोटेक्टिव आईवेयर करें प्रयोग

डॉक्टरी जांच के बाद आंखों की समस्या को दूर करने के लिए प्रोटेक्टिव आईवेयर का इस्तेमाल करना आवश्यक है। इससे स्वीमिंग समेत अन्य गतिविधियों को करने में भी मदद मिलती है। अपने चश्मे को अन्य लोगों से अलग रखें।

Eye wear ka prayog karein
डॉक्टरी जांच के बाद आंखों की समस्या को दूर करने के लिए प्रोटेक्टिव आईवेयर का इस्तेमाल करना आवश्यक है। चित्र- अडॉबीस्टॉक

4. हाइजीन का ख्याल रखें

अपने आईवेयर से लेकर तौलिया और अन्य कपड़ों तक सभी चीजों को रोज़ाना धोएं। इसके अलावा मेकअप रिमूव करने के लिए भी साफ कपड़े का ही प्रयोग करें। साथ ही कुछ दिन मेकअप को अवॉइड करें। हाइजीन को मेंटेन करने से संक्रामक रोगों का प्रभाव कम होने लगता है।

5. डॉक्टर से जांच करवाएं

आई फ्लू का प्रभाव 4 से लेकर 7 दिन तक बना रहता है। इसके लिए अपने मन मुताबिक कोई भी आईड्रॉप या एंटीबायोटिक लेने से बचें। उपचार के लिए आंख की जांच अवश्य करवाएं और डॉक्टर की बताए दवाएं ही लें। इससे आंखों में बढ़ने वाले संक्रमण की रोकथाम में मदद मिलती है।

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लेखक के बारे में

लंबे समय तक प्रिंट और टीवी के लिए काम कर चुकी ज्योति सोही अब डिजिटल कंटेंट राइटिंग में सक्रिय हैं। ब्यूटी, फूड्स, वेलनेस और रिलेशनशिप उनके पसंदीदा ज़ोनर हैं। ...और पढ़ें

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