भारत में बढ़ रहे हैं स्वाइन फ्लू के मामले: जानिए क्या हैं इसके लक्षण और बचने के उपाय

डॉक्टरों ने स्वाइन फ्लू के प्रति जागरूकता के लिए एक एडवाइजरी साझा की है, जो देश में बढ़ते मामलों के मद्देनजर आवश्यक मानी जा रही है।

swine flu ke lakshan
स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए खाने-पीने और संक्रमण पर ध्यान देना है। चित्र: शटरस्टॉक
टीम हेल्‍थ शॉट्स Published on: 1 September 2022, 20:45 pm IST
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भारत में स्वाइन फ्लू (Swine flu) का खौफ तेजी से फैल रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, अकेले महाराष्ट्र में अगस्त 2022 के महीने में 180 से अधिक मामले सामने आए हैं। 2021 में एक ही महीने में स्वाइन फ्लू के मामलों की तुलना में 10 गुना अधिक। स्वाइन फ्लू के लक्षणों और रोकथाम के तरीकों को जानने के लिए यह पर्याप्त कारण है।

सीनियर कंसल्टेंट, रेस्पिरेटरी मेडिसिन एंड पल्मोनोलॉजी, इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल, नई दिल्ली के डॉ राजेश चावला ने हेल्थ शॉट्स के साथ स्वाइन फ्लू के बारे में बात करते हुए इससे जुड़ी सभी जानकारियां साझा की।

स्वाइन फ्लू क्या है?

यह वायरस के कारण होने वाला श्वसन रोग है, जो सूअरों के श्वसन तंत्र को संक्रमित करता है। यह मौसमी फ्लू की तरह संक्रामक है। H1N1 वायरस के कारण, मनुष्यों में फैलने वाले स्वाइन फ्लू वायरस का मुख्य मार्ग आपका चेहरा है। जब कोई संक्रमित व्यक्ति छींकता या खांसता है, और वायरस संभावित श्लेष्म सतहों में से एक में प्रवेश करता है। यह तब भी फैल सकता है जब कोई व्यक्ति वायरस से संक्रमित किसी चीज को छूता है और बाद में अपनी नाक, मुंह या आंख को छूता है।

स्वाइन फ्लू के मामलों में वृद्धि को देखते हुए, डॉक्टरों ने पुष्टि की है कि फ्लू हवा में है, जिससे इसका संक्रमण और भी आसान व संभावित हो गया है।

स्वाइन फ्लू के लक्षण

इसके लक्षण सामान्य फ्लू के लक्षणों जैसे बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना, शरीर में दर्द, सिर दर्द, ठंड लगना और थकान के समान होते हैं। स्वाइन फ्लू से पीड़ित कई लोगों को दस्त और उल्टी का भी अनुभव हुआ है, लेकिन ये लक्षण कई अन्य स्थितियों के कारण भी हो सकते हैं।

डॉक्टरों और विशेषज्ञों ने उल्लेख किया है कि स्वाइन फ्लू के मामले आमतौर पर मानसून के दौरान बढ़ जाते हैं।

जानिए स्वाइन फ़्लू से बचने के तरीके, चित्र: शटरस्टॉक

स्वाइन फ्लू के मामलों में वृद्धि की प्रवृत्ति के बावजूद, अधिकांश मामले खास गंभीर नहीं होते हैं और अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं होती है। इस परिस्थिति में गले में खराश और खांसी के हल्के लक्षण देखने को मिलते हैं। केवल कई पहले से कमज़ोर शरीर वाले वरिष्ठ नागरिकों को आईसीयू या अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता होती है।

क्या हो सकते हैं स्वाइन फ्लू से बचाव के उपाय

लोगों को बुनियादी स्वच्छता का पालन करना चाहिए, जैसे कि छींकते समय अपनी नाक को ढंकना, खांसते समय रूमाल या टिशू का उपयोग करना, फ्लू के संक्रमण से बचने के लिए आंख, नाक या मुंह को छूने से बचना चाहिए।

क्या करें जब हो जाए फ़्लू

स्वाइन फ्लू के उपचार में देरी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि इससे जटिलताएं बढ़ सकती हैं और मृत्यु का खतरा हो सकता है। उच्च रक्तचाप, मधुमेह के रोगियों और शरीर के कमज़ोर होने या गर्भावस्था जैसी स्थिति के साथ ही वरिष्ठ नागरिकों को भी इससे अधिक सावधान रहना चाहिए। स्वाइन फ्लू होने पर मरीज को एंटी वायरल दवा दी जानी चाहिए।

फ्लू की गंभीरता पर इसका उपचा निर्भर करता है। लक्षण गंभीर न होने पर तरल पदार्थ पीना, बुखार और सिरदर्द के लिए दर्द निवारक लेना फ़्लू से निपटने में सहायक हो सकते हैं।

हालांकि, यदि कोई रोगी पुराने लक्षणों से पीड़ित है, तो उसे तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए और लक्षणों को दूर करने में मदद के लिए आवश्यक दवाएं शुरू करनी चाहिए।

इस तरह रखें ध्यान 

  • पानी, जूस और गर्म सूप जैसे तरल पदार्थों का सेवन निर्जलीकरण को रोकने में मदद करेगा।
  • स्वाइन फ्लू से पीड़ित मरीजों को अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को संक्रमण से लड़ने को मजबूत बनाने के लिए आराम करने के साथ भरपूर नींद लेनी चाहिए।
  • डॉक्टर से सलाह लेने के बाद एसिटामिनोफेन (टाइलेनॉल, अन्य) या इबुप्रोफेन (एडविल, मोट्रिन आईबी, अन्य) जैसे ओवर-द-काउंटर दर्द निवारक का सेवन  राहत पाने में मदद कर सकता है।

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