क्या आपका बच्चा ड्राई आईज से जूझ रहा है? जानिए इसके कारण और बचाव के उपाय

बच्चों और किशोरों दोनों में आंखों में ड्राईनेस के कारण अलग-अलग हो सकते हैं। आइए उन कारणों और बचाव के तरीकों के बारे में जानें। 

dry eyes ki samasya
ड्राय आइज के कारण बच्चे की आंखों पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। चित्र: शटरस्टॉक
टीम हेल्‍थ शॉट्स Published on: 11 August 2022, 13:00 pm IST
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बच्चे हों या बड़े ड्राय आईज से काफी असहज महसूस करते हैं। बच्चों के लिए ड्रायनेस उनकी आंखों को स्ट्रेच आउट महसूस कराता है। वास्तव में ड्राई आई सिंड्रोम (Dry eye syndrome) अक्सर सुबह के समय शुरू हो जाता है। इस समय हवा, डस्ट पार्टिकल्स आदि आंखों में किरकिरापन महसूस कराते हैं। इसकी वजह से पूरे दिन परेशानी हो सकती है। इसका असर बच्चे के विजन को भी धुंधला कर सकता है। आइए जानते हैं बच्चों में होने वाली ड्राई आईज (Dry eyes in kids) समस्या के कारण और बचाव के उपायों के बारे में। 

अक्सर ड्राय वेदर, धुआं या प्रदूषण आंखों को परेशान करता है। कई बार एलर्जी या कॉन्टैक्ट लेंस भी आंखों में जलन पैदा कर सकते हैं। आप बच्चे की आंखों को बेहतर महसूस करने में मदद करने के तरीके खोजने के लिए अपने आई एक्सपर्ट के साथ बात कर सकती हैं। इसके अलावा, प्राकृतिक उपचार भी मददगार साबित होते हैं।

बच्चों में ड्राई आई क्यों होती हैं?

ड्राई आई सिंड्रोम बच्चों की डेली एक्टिविटी को चुनौतीपूर्ण बना सकती है। जैसे पढ़ना, कंप्यूटर का उपयोग करना और खेलना। कभी-कभी जलन, खुजली और आंखों में किरकिरापन महसूस करना, आंखों को झपकने में दिक्कत महसूस करना, क्लास में ध्यान केंद्रित करने में बाधा उत्पन्न होना आदि समस्याएं भी उत्पन्न होती हैं। 

ड्राई आई के लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। उनमें से कुछ में शामिल हैं:

 

  1. गंभीर एलर्जी, एग्रेसिव एंटीहिस्टामाइन उपयोग के कारण ड्रायनेस
  2. कॉन्टैक्ट लेंस पहनने पर
  3. कभी-कभी, कंजक्टिविटि (Pink eyes) एक प्रकार की ड्राय आई का कारण बन सकती है
  4. न्यूट्रीशनल डेफिशिएंसी
  5. स्मार्टफोन और अन्य डिजिटल उपकरणों का उपयोग

बच्चों में ड्राई आई के विभिन्न लक्षण क्या हैं?

अमूमन बच्चे अपनी आंखों की समस्याओं को ठीक से बता नहीं पाते हैं। इस तरह की कोई समस्या होने पर वे अक्सर अपनी आंखें मलते रहते हैं। माता-पिता को अपने बच्चों के इस तरह के व्यवहार के पीछे के कारणों को समझने के लिए निगरानी रखनी चाहिए।

यहां बच्चों में ड्राई आई सिंड्रोम के कुछ सामान्य लक्षण दिए गए हैं:

बार-बार आंखों का झपकना

आंखों के आसपास लाली

लगातार आंख मलना

प्रकाश के स्रोतों से दूर जाना

आंखों में और उसके आसपास चुभन या जलन महसूस होना

ब्लर्ड विजन के क्षण

रीडिंग में कठिनाई, डिजिटल डिवाइस पर काम करना या ऐसी कोई गतिविधि जिसमें विजुअल अटेंशन देने की आवश्यकता है।

घर पर अपने बच्चे की ड्राई आइज का इलाज कैसे करें

ड्राई आइज से संबंधित लक्षणों को कम करने के लिए आपके डॉक्टर आर्टिफिशियल टीयर की सिफारिश कर सकते हैं, लेकिन आप ड्राई आई सिंड्रोम से छुटकारा पाने के लिए घरेलू उपचार भी कर सकती हैं।

कुछ घरेलू उपचार इसमें मदद कर सकते हैं

  1. आंखों में जलन पैदा करने वाले धुएं और अन्य चीजों से बचें।
  2. सुनिश्चित करें कि बच्चा धूप का चश्मा पहनता है, जो सिर के किनारों को भी कवर करता है।

. बच्चे को टोपी या छतरियों का उपयोग करने को बताएं, क्योंकि ये आंखों को धूप, हवा, धूल और गंदगी से बचा सकते हैं।

  1. अपने बच्चे के बिस्तर के पास एक ह्यूमिडिफायर रखें। मशीन की सफाई के लिए हमेशा निर्देशों का पालन करें।
  2. जब आपका बच्चा सो रहा हो तो पंखे का इस्तेमाल न करें।
  3. यदि आपका बच्चा आमतौर पर कॉन्टैक्ट लेंस पहनता है, तो यह सुनिश्चित करें कि वह रीवेटिंग ड्रॉप्स का उपयोग करता है या जब तक आंखें बेहतर महसूस न करें तब तक चश्मा पहनें।
  4. दवाओं से सुरक्षित रहें। सुनिश्चित करें कि आपका बच्चा ठीक उसी तरह से दवाएं लेता है जैसा कि निर्धारित किया गया है। यदि आपको लगता है कि आपके बच्चे को किसी दवा से समस्या हो रही है, तो अपने नेत्र रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।
  5. क्या आपका बच्चा दिन में कम से कम 4 बार आर्टफिशियल टीयर्स का उपयोग करता है?
  6. यदि आपके बच्चे को दिन में 4 बार से अधिक ड्रॉप्स की आवश्यकता है, तो बिना प्रिजर्वेटिव वाले आर्टिफिशियल टीयर का उपयोग करें। वे आंखों में जलन कम कर सकते हैं।
  7. यदि आपका बच्चा कॉन्टैक्ट लेंस पहनता है, तो उसे रीवेटिंग ड्रॉप्स दें।

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    यदि आपका बच्चा चश्मा या कॉन्टैक्ट लैंस लगाता है, तो आई चेकअप भी नियमित रूप से कराती रहें। चित्र : शटरस्टॉक

10 रोज सुबह करीब 5 मिनट के लिए अपने बच्चे की पलकों पर गर्म और नरम कपड़ा रखें। फिर पलकों की हल्की मालिश करें। यह आंखों की प्राकृतिक नमी को बढ़ाने में मदद करता है।                                 

  1.  यह भी पढ़ें:- स्कूल जाने से कतराता है बच्चा, तो जानिए क्या हो सकते हैं इसके कारण

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