Mumps: गले में दर्दनाक सूजन का कारण बनते हैं कनफेड़,जानिए इस स्थिति में आपको क्या करना है

इस समय दिल्ली, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में मम्प्स या कनफेड़ के मामले बढ़ रहे हैं। अभी तक इसका कोई भी उपचार नहीं है, इसलिए इसके लक्षणों को समझकर उन्हें कंट्रोल करने की काेशिश की जाती है।
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कनफेड एक संक्रामक वायरल संक्रमण है। चित्र- अडोबी स्टॉक
Updated: 7 Feb 2024, 00:35 am IST
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इनपुट फ्राॅम

गलसुआ या कनफेड (Mumps) रोग वास्तव में बच्चे को मानसिक और भावनात्मक रूप से परेशान कर देता है। यह गालों के नीचे पेरोटिड ग्रंथियों में संक्रमण के कारण होता है। ये ग्रंथियां लार बनाती हैं। कानों के आसपास बढ़ आई सूजन दर्दनाक होती है। वहीं संक्रामक होने के कारण बच्चे को आइसोलेट करना पड़ता है। यही वजह है कि इससे बच्चे बहुत परेशान हो जाते हैं। इन दिनों दिल्ली और अन्य राज्यों में मम्प्स अर्थात कनफेड़ फैल रहे हैं। इसलिए यह जरूरी है कि आप इस स्थिति में बच्चे (How to care for someone with mumps) की देखभाल कैसे करनी है, इस बारे में जानें।

क्या होते हैं कनफेड़ (what is mumps)

कनफेड़ एक संक्रामक रोग है, जो आमतौर पर कान के पास लार ग्रंथियों में सूजन और कोमलता के साथ-साथ बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, थकान और भूख न लगना जैसे लक्षणों के साथ होता है।

यह श्वसन या संक्रमित लार के सीधे संपर्क से फैलता है। कनफेड़ से मेनिनजाइटिस, एन्सेफलाइटिस, ऑर्काइटिस और बहरापन जैसी जटिलताएं हो सकती हैं। यह संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाले तरल पदार्थ की छोटी बूंदों से फैलता है। बात करने या हंसने के अलावा उनके द्वारा उपयोग की जाने वाली वस्तुओं जैसे गंदे टिश्यू, स्ट्रॉ, या पीने के गिलास के संपर्क में आने से भी यह वायरस फैल सकता है।

यदि संक्रमित व्यक्ति अपने हाथ नहीं धोता और सतह को छू देता हैं, तो उसे छूने वाले अन्य लोगों में कनफेड़ से संक्रमित हो सकते हैं। कनफेड़ से पीड़ित व्यक्ति लक्षण शुरू होने से 2 दिन पहले से लेकर ख़त्म होने के 5 दिन बाद तक सबसे अधिक संक्रामक होते हैं।

mumps ke causes
यह श्वसन या संक्रमित लार के सीधे संपर्क से फैलता है। चित्र- अडोबी स्टॉक

यहां हैं कनफेड के लक्षण

कई बच्चों में कोई लक्षण नहीं होते हैं, या बहुत हल्के लक्षण होते हैं जो सर्दी की तरह महसूस होते हैं। लेकिन कुछ लोगों में लक्षण दिख सकते है

  1. बुखार
  2. सिरदर्द
  3. भूख ख़त्म हो जाना
  4. थकान, दर्द और आम तौर पर अस्वस्थ महसूस करना
  5. पैरोटिड ग्रंथियां सूज सकती हैं और दर्दनाक हो सकती हैं। इससे गाल फूले हुए दिखते हैं। दर्द तब और बढ़ जाता है जब बच्चा निगलता है, बात करता है, चबाता है। एक या दोनों पैरोटिड ग्रंथियां सूज सकती हैं।
mumps ka treatment
गर्म या ठंडे सेक से सूजी हुई पैरोटिड ग्रंथियों को शांत करें। चित्र- अडोबी स्टॉक

जानिए कैसे करनी है कनफेड़ से ग्रस्त बच्चे की देखभाल (how to care for someone with mumps)

कनफेड के लिए कोई विशिष्ट उपचार नहीं है। लेकिन लक्षणों को प्रबंधित किया जा सकता है

1 तरल और मुलायम आहार दें 

अपने बच्चे को भरपूर मात्रा में तरल पदार्थ और मुलायम भोजन दें, जिन्हें चबाना आसान हो। तीखा या अम्लीय फलों का रस (जैसे संतरे का रस, अंगूर का रस या नींबू पानी) न दें जो पैरोटिड ग्रंथि के दर्द को बढ़ा सकते हैं। 

2 बुखार के लिए दवाएं 

यदि आपका बच्चा असहज है, तो बुखार कम करने या दर्द कम करने के लिए एसिटामिनोफेन या इबुप्रोफेन जैसी दवाएं दें। ऐसे बच्चे को कभी भी एस्पिरिन न दें जिसे वायरल बीमारी हो।

3 सूजन पर सिकाई करें 

गर्म या ठंडे सेक से सूजी हुई पैरोटिड ग्रंथियों को शांत करें। अगर आपके बच्चे को ठंडे सेक से आराम मिलता है तो ठंडे सेक का इस्तेमाल करें, लेकिन अगर गर्म सेक से आराम मिल रहा है तो उसका इस्तेमाल करें। 

4 भरपूर आराम करने दें

अपने बच्चे को भरपूर आराम दे। उन्हे इस दैरान स्कूल न भेजें इससे वो परेशान हो सकता है। ये रोग संक्रामक होता है इससे दुसरे बच्चों को भी खतरा हो सकता है। बच्चे को बाहर खेलने भेजने की बजाय घर पर ही छोटे मोटे खेल खिलाएं। 

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5 स्कूल या बाहर खेलने न भेजें

कनफेड से पीड़ित बच्चों को पैरोटिड ग्रंथि की सूजन की शुरुआत से 5 दिनों तक घर पर रहना चाहिए। अपने डॉक्टर से पूछें कि आपका बच्चा स्कूल या चाइल्डकैअर में कब लौट सकता है।

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