पान मसाला और गुटका : न माटी की जुबां है न खुशबू अपनेपन की, ये कैंसर के कारक हैं 

Updated on: 31 May 2022, 13:47 pm IST

विज्ञापनों की दुनिया जितनी भव्य है, धुआं रहित तंबाकू और पान मसाले से होने वाले स्वास्थ्य जोखिम उतने ही ज्यादा गंभीर हैं। अगर सचमुच अपनों से प्यार है, तो इसके सेवन को रोकें। 

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तंबाकू, गुटका, पान-मसाला से स्वास्थ्य को बहुत अधिक नुकसान पहुंचता है। चित्र: शटरस्टॉक

हम टीवी, मोबाइल या फिल्मों में सेलिब्रिटीज को पान-मसाला खाते हुए देखते हैं और हमारा मन भी उन्हें खाने के लिए ललचाने लगता है। हालांकि हर विज्ञापन में इससे होने वाले स्वास्थ्य नुकसान को मेंशन किया जाता है। लेकिन वह इतने छोटे अक्षर में लिखा होता है या इतनी जल्दी बताया जाता है कि हम अच्छी तरह समझ भी नहीं पाते हैं। जब आप लगातार पान मसाला, तंबाकू उत्पादों का सेवन करते हैं, तो छोटे अक्षरों में लिखी गई या तेज रफ्तार में बोली गईं ये चेतावनियां धीरे-धीरे आपके शरीर में नजर आने लगती हैं। इनमें मुंह और गले के कैंसर के अलावा फेफड़ों की गंभीर बीमारियां भी शामिल हैं। यहां हैं तंबाकू और पान मसाला (side effects of pan masala with tobacco) आदि के कुछ गंभीर स्वास्थ्य जोखिम। 

वल्र्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) तंबाकू, गुटखा, पान मसाले से होने वाली बीमारियों की तरफ ध्यान दिलाने के लिए हर वर्ष 31 मई को नो टोबैको डे(No Tobacco Day) मनाता है। तंबाकू में निकोटिन होता है, जो मुंह के कैंसर का कारण बनता है। तंबाकू के साथ-साथ गैर-तंबाकू पान मसाला भी ओरल प्रीकैंसर के विकास का कारण बनता है। 

चकाचौंध के पीछे का सच 

सेलिब्रिटीज द्वारा इसका प्रचार-प्रसार करने के बावजूद तंबाकू, पान मसाला या गुटखा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। तंबाकू और पान मसाले पर समय-समय पर रिसर्च होते रहते हैं, ताकि इससे होने वाले ओरल कैंसर के बारे में लोगों को पता चल सके। 

भारत में आंध्र प्रदेश, गोवा, महाराष्ट्र और तमिलनाडु राज्यों में पान मसाला जैसे सभी तंबाकू युक्त उत्पादों पर प्रतिबंध लगा हुआ है। यदि आप या आपका पार्टनर किसी भी रूप में तंबाकू का इस्तेमाल करते हैं, तो अपने  और उनके स्वास्थ्य के लिए इसके सेवन को हतोत्साहित करें। 

क्या कहता है रिसर्च

इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) द्वारा तंबाकू में पाए जाने वाले निकोटिन पर शोध किया गया। इसके आधार पर उन्होंने बताया कि पान मसाला हानिकारक क्यों है!

तंबाकू में निकोटिन होता है, जो मुंह के कैंसर का कारण बनता है। यह कार्सिनोजेनिक होता है। पान मसाले में मौजूद सुपारी में निकोटिन तो नहीं होता है, लेकिन इसमें नाइट्रोसामाइन मौजूद होता है, जो कार्सिनोजेनिक भी होता है। कई जगहों पर पान के पत्ते को खाया जाता है। इसमें बुझे हुए चूने का इस्तेमाल किया जाता है। 

हालांकि अभी तक इसे कार्सिनोजेन के रूप में वर्गीकृत नहीं किया गया है, लेकिन यह मुंह में ट्यूमर बनाने में अग्रणी भूमिका निभाता है। आईएआरसी के अनुसार, भारत में मुंह के कैंसर के अधिकांश मामले पान मसाला जैसे धुएं रहित तंबाकू के सेवन के कारण होते हैं। 

उत्तर भारत खासकर उत्तर प्रदेश और बिहार में मसाले के साथ पान के पत्ते का खूब सेवन किया जाता है, जिसके कारण मुंह के कैंसर की दर अधिक है। इसलिए IARC तंबाकू के साथ-साथ पान को भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मानती है।

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क्या कहता है लखनऊ में किया गया शोध 

उत्तर भारत में ओरल कैंसर के कारणों को जानने के लिए रिसर्च किया गया। यह अध्ययन लखनऊ शहर पर किया गया था। इसमें 0.45 मिलियन लोगों को शामिल किया गया। तंबाकू और गैर तंबाकू पान मसालों का सेवन करने वालों में 20-35 वर्ष के पुरुष और 35-39 वर्ष की महिलाएं भी शामिल थीं। 

अध्ययन के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि पान मसाला के सेवन से भी ओरल प्रीकैंसर विकसित होने की संभावना अधिक होती है, जबकि इसका सेवन तंबाकू के बिना किया जाता है। तंबाकू का उपयोग करने वालों में 12.22% प्रीओरल कैंसर की संभावना देखी गई, तो गैर-तंबाकू पान मसाला प्रयोग करने वालों में ओरल प्रीकैंसर डेवलप होने की संभावना 20.71 थी।

यहां जानिए पान मसाले से होने वाले नुकसान

इन दिनों पाउच में उपलब्ध पान मसाले का खूब प्रयोग किया जाता है। इस गैर तंबाकू पान मसाले के कारण भी ओरल कैंसर होता है। फिजिशियन अमित सिन्हा के अनुसार, पान मसाला सबम्यूकोस फाइब्रोसिस का प्रमुख कारण बनता है, जो बाद में ओरल कैंसर में तब्दील हो जाता है। यह जीनोटॉक्सिक है, जो सिस्टर क्रोमेटिन एक्सचेंज और क्रोमेटिन एबरेशन को बढ़ा देता है। 

पब मेड के एक शोध से प्राप्त जानकारी के अनुसार जानवरों पर जब इसके प्रभाव पर अध्ययन किया गया, तो पाया गया कि यह लंग, लिवर और स्टमक में नियोप्लास्टिक ट्यूमर बना देता है। जब किसी कोशिका की वृद्धि दर में असामान्य व तीव्र गति से परिवर्तन होता है, तो यह प्रक्रिया नियोप्लाज्म कहलाती है। इससे बनने वाला ट्यूमर नियोप्लास्टिक ट्यूमर कहलाता है। यह ट्यूमर हानिकारक(Malignant) और अहानिकारक (Benign) भी हो सकता है।

पान मसाला हेपेटोटॉक्सिक होता है, जो एंजाइम्स के बढ़े हुए लेवल, डीरेंज्ड कार्बोहाइड्रेट और लिपिड मेटाबॉलिज्म रेट को बढ़ा देता है। यह किडनी के लिए भी खतरनाक है, क्योंकि क्रिएटिनिन को यह खराब करता है। टेस्टिस को प्रभावित करनेे के कारण स्पर्म पर भी नकारात्मक प्रभाव बढ़ जाता है। पान मसाला शरीर की सभी क्रियाओं और अंगों को हानिकारक ढंग से प्रभावित करता है।

कैसे तैयार होता है पान मसाला

पान मसाला में सुपारी के साथ बुझा हुआ चूना, कत्था और अन्य स्वाद बढ़ाने वाले, लेकिन हानिकारक एजेंटों को मिलाया जाता है। इसलिए इसके उत्पादन, भंडारण, बिक्री और विपणन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए एक राष्ट्रीय नीति बननी चाहिए।

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स्मिता सिंह स्मिता सिंह

स्वास्थ्य, सौंदर्य, रिलेशनशिप, साहित्य और अध्यात्म संबंधी मुद्दों पर शोध परक पत्रकारिता का अनुभव। महिलाओं और बच्चों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करना और नए नजरिए से उन पर काम करना, यही लक्ष्य है।

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