मानसून के दौरान बढ़ सकता है आई इंफेक्शन का जोखिम, जानिए इससे कैसे बचा जा सकता है

मानसून के दौरान इन आसान टिप्स को अपनाकर आप अपने परिवार को कंजक्टिवाइटिस जैसे आंखों के संक्रमण से बचा सकती हैं।
इस मानसून आंखों के इन्फेक्शन को रखें दूर. चित्र : शटरस्टॉक
टीम हेल्‍थ शॉट्स Published on: 30 July 2021, 15:09 pm IST
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मानसून में आंखों में संक्रमण का जोखिम बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। खासकर जब बात बुजुर्गों और बच्चों की हो। आंखों के संक्रमण के तेजी से फैलने का मुख्य कारण गर्म और ह्यूमिड मौसम है जो बैक्टीरिया के विकास को बढ़ावा देता है। लेकिन अगर आप कुछ बातों का ध्यान रखें, तो आप कंजक्टिवाइटिस जैसे संक्रमण को बहुत अच्छी तरह से रोक सकती हैं।

उम्र के साथ बढ़ जाता है संक्रमण का जोखिम

हमारे शरीर के सबसे संवेदनशील हिस्सों में से एक आंखें हैं, और बारिश के मौसम में आंखों में आसानी से संक्रमण होने का खतरा होता है। आपके एजिंग पेरेंट्स के मामले में यह जोखिम अधिक होता है, क्योंकि उम्र के साथ, उनका शरीर कमजोर हो जाता है और उनकी हड्डियों, मांसपेशियों और प्रतिरक्षा के स्तर भी कमजोर होते हैं।

यही कारण है कि इस समय संक्रमण में तेजी से वृद्धि देखी जाती है, खासकर आंखों और त्वचा से संबंधित।

मानसून के दौरान बुजुर्गों में देखे जाने वाले सामान्य नेत्र संक्रमण

नेत्र रोग विशेषज्ञ और सीनियर्स फर्स्ट की संस्थापक डॉ ममता मित्तल के अनुसार, बुजुर्ग लोगों को खराब दृष्टि का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इससे मानसून के मौसम में गिरने और फिसलने का खतरा बढ़ जाता है। कुछ सामान्य नेत्र समस्याएं जिनका बूढ़े लोग अनुभव करते हैं, – कंजक्टीवाइटिस (Conjunctivitis), आइज स्टाई (Eye Stye), ड्राई आइज (Dry Eyes) और कॉर्नियल अल्सर आदि है।

1. कंजक्टीवाइटिस (Conjunctivitis)

जिसे पिंक आइज के रूप में भी जाना जाता है, एक संक्रामक रोग है और बारिश के दौरान, हवा में नमी बढ़ने के कारण होता है। मानसून के मौसम के दौरान, स्टाई की घटनाओं में भी वृद्धि होती है। इस स्थिति में, आइ लैश कि सतह पर लम्प बन जाता है और यह दर्द और परेशानी का कारण बनता है।

इसके अलावा, धूल, पोलन, दवाओं या सौंदर्य प्रसाधनों के उपयोग से भी आंखें लाल और खुजलीदार हो सकती हैं, जिससे अन्य प्रकार की आंखों की एलर्जी हो सकती है।

आपनी आखों को देखभाल करें. चित्र : शटरस्टॉक

2. कॉर्नियल अल्सर (Corneal Ulcer)

यह एक नेत्र संक्रमण है जो आमतौर पर बैक्टीरिया, वायरस, फंगस या पैरासाइट के संपर्क में आने के कारण होता है। यह एक आइ इमरजेंसी है और समय पर ठीक से इलाज न करने पर संभावित रूप से इंसान अंधा भी हो सकता है।

आंखों के संक्रमण को तुरंत एक नेत्र चिकित्सक से परामर्श करके और निर्धारित उपचार का पालन करके ठीक किया जा सकता है।

यहां बुजुर्गों के लिए आंखों की देखभाल के कुछ आसान उपाय दिए गए हैं

बुजुर्गों के लिए आंखों की देखभाल बेहद जरूरी है, खासकर बारिश के मौसम में, जब आंखों में संक्रमण होने का खतरा बहुत ज्यादा होता है। तो, आइये जानते हैं कुछ टिप्स के बारे में –

सबसे पहला नियम यह है कि उन्हें कभी भी गंदे हाथों से अपनी आंखों को छूने न दें, क्योंकि गंदे हाथों से संक्रमण का खतरा बढ़ता है। इसके अलावा, किसी को अपनी व्यक्तिगत वस्तुओं या आवश्यक वस्तुओं जैसे तौलिये, रूमाल आदि को साझा करने से बचना चाहिए।

संतुलित और पौष्टिक आहार लेना और मजबूत प्रतिरक्षा स्तर का निर्माण करना, संक्रमण को प्राकृतिक रूप से दूर रखने का सबसे अच्छा तरीका है।

बारिश के मौसम में कॉन्टैक्ट लेंस पहनने और भारी मेकअप करने से बचना चाहिए।

अपनी आखों को इन्फेक्शन से बचाएं। चित्र: शटरस्‍टाॅॅक

मानसून के मौसम से पहले बुजुर्गों को आंखों की जांच करानी चाहिए। यह वास्तविक समय में खराब दृष्टि के समस्याओं को ठीक करने में भी मदद करेगा और बारिश के दौरान उनके गिरने या फिसलने के जोखिम को खत्म कर देगा।

हालांकि, ओवर-द-काउंटर आई ड्रॉप का उपयोग करना सख्त मना है! किसी भी तरह की परेशानी होने पर तुरंत किसी नेत्र रोग विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए और उसके बताए गए उपचार का पालन करना चाहिए।

निष्कर्ष

डॉ मित्तल कहते हैं “मानसून एक बेहद खतरनाक समय हो सकता है, खासकर बुजुर्गों के लिए। ऐसे में आंखों में संक्रमण होने की संभावना काफी बढ़ जाती है, मगर इसे सही स्वच्छता का पालन करके रोका जा सकता है।”

अंत में, वह निष्कर्ष निकालती है, “इसके अतिरिक्त, जब कोई लक्षणों का अनुभव करता है, तो उसे तुरंत एक नेत्र विशेषज्ञ से सहायता लेनी चाहिए और उपचार का पालन करना चाहिए। संक्रमण, हालांकि जोखिम भरा है, मगर चिकित्सकीय देखरेख में ठीक किया जा सकता है।

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