अगर आप डाउन सिंड्रोम से पीड़ित बच्चे के पेरेंट्स हैं, तो ये 13 जरूरी बातें हैं आपके लिए

Updated on: 25 April 2022, 17:00 pm IST

डाउन सिंड्रोम से पीड़ित बच्चे के लिए तो उसका जीवन जटिल होता ही है, पर इससे भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण है पेरेंट्स के लिए ऐसे बच्चों को अच्छी परवरिश देना। यहां आपको बहुत सारे धैर्य और जागरुकता की जरूरत है।

down syndrome se grast bachche ki parwarish me in cheezo ka zarur dhyan rakhen
कुछ बच्चों में लर्निंग संबंधी दिक्कतें भी हो सकती हैं। चित्र : शटरस्टॉक

डाउन सिंड्रोम (Down Syndrome) आजीवन जारी रहने वाली स्वास्थ्य स्थिति है और यह जन्‍मजात होती है। डाउन सिंड्रोम से प्रभावित लोगों में एक क्रोमोसोम अतिरिक्‍त होता है। इन बच्‍चों को जीवनभर मेडिकल तथा लर्निंग से जुड़ी समस्‍याएं पेश आती हैं।

इस सिंड्रोम से पीड़‍ित बच्‍चों को नियमित रूप से हेल्‍थकेयर की जरूरत पड़ती है। ऐसे बच्‍चों को पालना किसी भी पेरेन्‍ट के लिए वाकई चुनौतीपूर्ण होता है। डाउन सिंड्रोम से प्रभावित बच्‍चों के पेरेन्‍ट्स को भली-भांति और सेहतमंद तरीके से बच्‍चों की देखभाल के लिए निम्‍न क्षेत्रों में ध्‍यान देना चाहिए:

पेरेंट्स को इन चीज़ों पर देना चाहिए धैर्यपूर्वक ध्यान 

1 विकास:

डाउन सिंड्रोम से प्रभावित बच्‍चे अन्‍य बच्‍चों की तुलना में कुछ छोटे आकार के होते हैं। उनका विकास भी धीमी गति से होता है। छोटे आकार के होने के बावजूद उनका वज़न काफी तेज़ी से बढ़ता है। पेरेन्‍ट्स को यह ध्‍यान रखना होता है कि बच्‍चों का वज़न ज्‍यादा न बढ़ने पाए। इसलिए उन्‍हें बच्‍चों को शारीरिक व्‍यायाम करने के लिए प्रोत्‍साहित करना चाहिए तथा उन्‍हें अधिक कैलोरीयुक्‍त भोजन पर नियंत्रण रखना चाहिए।

इन बच्‍चों के विकास पर नियमित रूप से 2,4, 6, 9 12, 15, 18 और 24 महीने की आयु में और फिर वयस्‍कता के दौरान साल में एक बार अवश्‍य निगरानी करनी चाहिए।

Bachcho mein iska khatra zyaada hota hhai
बच्चों में इसका खतरा अधिक रहता है। चित्र:शटरस्टॉक

2 टीकाकरण

इन बच्‍चों की इम्‍युनिटी काफी कमज़ोर होती है, इसलिए उन्‍हें कुछ ऐसे रोगों से बचाव के टीके, सलाह-मश्विरा और नियमित अंतराल से लेने चाहिए जिससे बचाव हो सके। इनमें हर साल दी जाने वाली फ्लू वैक्‍सीन भी शामिल है।

3 हृदय

अपने बच्‍चे की दिल के रोगों की जांच भी करवाएं और यदि कोई विकार सामने आए, तो नियमित इको तथा चेक अप जरूरी है। डाउन सिंड्रोम से प्रभावित करीब पचास फीसदी बच्‍चों में हृदय विकार होते हैं। लेकिन ऐसे कुछ विकारों में इलाज संभव होता है।

4 हार्मोन

डाउन सिंड्रोम से प्रभावित बच्‍चों में थायराइड हार्मोन की कमी हो सकती है। जन्‍म के समय, 6 महीने, 12 महीने और इसके बाद हर साल टीएसएच जांच करानी चाहिए। यदि जरूरी हो तो हार्मोन रिप्‍लेसमेंट थेरेपी भी शुरू की जा सकती है।

कुछ बच्‍चों को टाइप1 डायबिटीज़ भी हो सकता है। इंसुलिन थेरेपी से लक्षणों और जटिलताओं को नियंत्रित किया जा सकता है।

5 सुनना

ये बच्‍चे श्रवण विकारों से भी ग्रस्‍त हो सकते हैं। इसलिए जन्‍म पर, 6 माह के होने पर और उसके बाद हर साल कानों की जांच भी अवश्‍य करवाएं। करीब 80 प्रतिशत बच्‍चों में सुनने की किसी न किसी प्रकार की समस्‍या होती है और उन्‍हें हियरिंग एड्स की आवश्‍यकता हो सकती है।

6 नेत्र ज्‍योति

अधिकांश बच्‍चों में दृष्टि संबंधी विकार, जैसे नज़दीक या दूर की नज़र में दोष होना या एस्टिगमेटिज्‍़म हो सकता है। इसके लिए नियमित रूप से आंखों की जांच करवाना आवश्‍यक है।

7 विकास

डाउन सिंड्रोम से ग्रस्‍त लगभग सभी बच्‍चों में बौद्धिक विकास अवरुद्ध होता है, लेकिन इसकी डिग्री अलग-अलग हो सकती है। इसलिए विकास संबंधी सेवाओं की मदद लें। आरंभिक हस्‍तक्षेप के प्रोग्राम लाभकारी हो सकते हैं।

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8 गर्दन की स्थिरता

डाउन सिंड्रोम से ग्रस्‍त कुछ बच्‍चों में स्‍पाइन या नैक बोन्‍स की समस्‍या हो सकती है। हर दिन व्‍यायाम उनके लिए जरूरी होता है। यदि निम्न में से कोई समस्‍या दिखे, तो अपने बच्‍चों को डॉक्‍टर के पास ले जाएं-
1 गर्दन में कड़ापन या दर्द होना
2 मल/पेशाब के पैटर्न में बदलाव
3 चलने में बदलाव
4 बांह और पैरों के इस्‍तेमाल में बदलाव
5 सिर का झुकना
6 बांह या पैरों का सुन्‍न पड़ना

9 नींद संबंधी समस्‍या

डाउन सिंड्रोम से प्रभावित बच्‍चों को रात में सोने में परेशानी हो सकती है। खासतौर से कम मांसपेशियों वाले बच्‍चों में यह समस्‍या ज्‍यादा होती है। इसलिए 4 साल की उम्र में स्‍लीप स्‍टडी करवाएं।

Down syndrome se judi jaroori baatein janiye
डाउन सिंड्रोम से जुड़ी जरूरी बातें जानिए। चित्र:शटरस्टॉक

10 संक्रमण

कम इम्‍युनिटी की वजह से इन बच्‍चों को बार-बार संक्रमण, अक्‍सर बुखार रहने या अन्‍य लक्षणों की समस्‍या रहती है। इसलिए मेडिकल सलाह लें ताकि समय पर उपचार शुरू किया जा सके।

11 लड़कियों में फर्टिलिटी

अपनी बच्‍ची को अच्‍छे और बुरे स्‍पर्श के बारे में सिखाएं और मासिक धर्म संबंधी साफ-सफाई की जानकारी भी दें। डाउन सिंड्रोम से ग्रस्‍त लड़कियां गर्भवती हो सकती हैं। इसलिए बच्‍ची को सेक्‍स के बारे में जानकारी दें।

12 खुराक और विटामिन तथा मोटापे से बचाव

24 माह की उम्र से इन बच्‍चों के खानपान, शारीरिक गतिविधियों, कैलोरी की खपत आदि पर ध्‍यान दें। कैल्शियम तथा विटामिन सेवन पर निगरानी रखें।

13 काउंसलिंग

हालांकि अगली गर्भावस्‍था में डाउन सिंड्रोम के दोबारा होने की संभावना कम होती है, लेकिन जरूरी है कि आप आनुवांशिकी विशेषज्ञ से सलाह करें।

नियमित आधार पर स्‍वास्‍थ्‍य जांच और उचित उम्र पर हस्‍तक्षेप से, डाउन सिंड्रोम से ग्रस्‍त बच्‍चे के पेरेंट ऐसे बच्‍चों के विकास और शारीरिक तथा मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य का भरपूर ध्‍यान रख पाते हैं।

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Dr. Arvind Kumar Dr. Arvind Kumar

Dr. Arvind Kumar is Director & HOD – Paediatrics , Fortis Hospitl SHalimar Bagh

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