ओवरईटिंग ही नहीं, ये 6 स्वास्थ्य स्थितियां भी बढ़ा सकती हैं ओबेसिटी, लक्षणों को न करें इग्नोर

कई ऐसी स्वास्थ्य स्थितियां भी हैं, जिनमें शरीर का वजन असामान्य रूप से बढ़ना शुरू हो जाता है और व्यक्ति ओबेसिटी का शिकार हो सकता है।
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मोटापा मेंटल और फिजिकल हेल्थ को भी प्रभावित करता है। चित्र : शटरस्टॉक
अंजलि कुमारी Published: 4 Mar 2024, 04:17 pm IST
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ओबेसिटी एक बहुत कॉमन प्रॉब्लम बन चुकी है, जो लगभग सभी उम्र के लोगों को अपना शिकार बना रही है। आमतौर पर इसकी वजह खान पान की गलत आदत, शारीरिक स्थिरता सहित लाइफस्टाइल की आम गलतियां होती हैं। ऐसे में ओबेसिटी की स्थिति में तमाम तरह की शारीरिक समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है और इस बारे में सभी हमेशा बात करते हैं। पर क्या आपको मालूम है कि कई ऐसी स्वास्थ्य स्थितियां भी हैं, जिनमें शरीर का वजन असामान्य रूप से बढ़ना शुरू हो जाता है और व्यक्ति ओबेसिटी का शिकार हो सकता है। तो आइए जानते हैं इन स्वास्थ्य समस्याओं को बारे में, आखिर ये किस तरह मोटापे का कारण बनते हैं (obesity causes)।

ये स्वास्थ्य स्थितियां आपको ओबेसिटी का शिकार बना सकती हैं (Health conditions that lead to obesity)

1. हाइपोथायरायडिज्म (hypothyroidism)

यदि आपकी गर्दन में स्थित तितली के आकार का छोटा ग्लैंड थायरॉयड पर्याप्त हार्मोन बनाना बंद कर दे, तो आपका वजन बढ़ना शुरू हो सकता है। यह आपके बालों को पतला कर सकता है, आपकी त्वचा को ड्राई बना देता है और आपको ठंड, थकान, कब्ज यहां तक कि डिप्रेस्ड भी महसूस करवा सकता है। एक साधारण ब्लड टेस्ट यह पुष्टि कर सकता है कि आपके हार्मोन का स्तर कम है या नहीं। आर्टिफिशियल हार्मोन आपको बेहतर महसूस करने में मदद कर सकते हैं।

2. डिप्रेशन (depression)

वजन बढ़ना, यहां तक कि ओबेसिटी भी डिप्रेशन के शारीरिक साइड इफेक्ट्स में से एक हैं। इस समस्या से पीड़ित लोगों में अक्सर “तनाव हार्मोन” कोर्टिसोल का स्तर अधिक होता है। इसके कारण आपके पेट के आसपास चर्बी जमा हो सकती है। इस स्थिति मेें आपका वज़न बढ़ सकता है, क्योंकि आप सही खान-पान या व्यायाम करने में असमर्थ महसूस करते हैं। इस स्थिति का इलाज करने के लिए उपयोग की जाने वाली कुछ दवाएं भी ऐसा कर सकती हैं, यानी की एंटीडिप्रेसेंट पिल्स से भी वेट गेन हो सकता है। इसलिए मेंटल हेल्थ को स्थापित करने पर ध्यान दें।

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पुरुषों की तुलना में महिलाओं का वजन अधिक बढ़ता है। चित्र : शटर स्टॉक

3. पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (polycystic ovarian syndrome)

ऐसा कोई परीक्षण नहीं है जो किसी महिला को बता सके कि उन्हें यह बीमारी है। इस स्थिति में पीरियड मिस होना शुरू हो जाता है, आपके चेहरे या शरीर पर अधिक बाल ग्रो कर सकते हैं, या एक्ने हो सकते हैं। इसके अलावा, ओवेरियन सिस्ट भी विकसित हो सकते हैं। इसका एक सबसे बड़ा कारण है शरीर में एण्ड्रोजन हार्मोन का बढ़ता स्तर। इस स्थिति में महिलाओं में वेट गेन हो सकता है। क्योंकि ऐसे में बॉडी इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील हो जाती है, ये हार्मोन आपके शरीर को ब्लड शुगर को ऊर्जा में बदलने में मदद करता है। ऐसे में डॉक्टर की सलाह लें, जो हार्मोंस को नियंत्रित करे, इस समस्या पर नियंत्रण पाने में आपकी मदद करेंगे।

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4. डायबिटीज (diabetes)

डाइट, एक्सरसाइज, इंसुलिन और दवा के मिश्रण से आप डायबिटीज का इलाज कर सकती हैं। इंसुलिन आपकी बॉडी को ऊर्जा का उपयोग करने में मदद करता है। वहीं आपके शरीर के लिए ऊर्जा संग्रहित करना भी आसान बना देता है, जिससे अक्सर वजन बढ़ सकता है। साथ ही, कुछ उपचार प्रक्रिया में ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए आपको अधिक खाने की इच्छा हो सकती है। अपने वजन और डायबिटीज को नियंत्रित करने के लिए डॉक्टर की सलाह लें, और अपनी डाइट, एक्सरसाइज और इंसुलिन का पूरा ध्यान रखें।

5. इनसोम्निया (insomnia)

जो लोग 6 घंटे से कम नींद लेते हैं उनमें अधिक मात्रा में बॉडी फैट पाया जाता है। वजन को नियंत्रित रखने के लिए लगभग 8 घंटे की नींद लेना जरूरी है। नींद की कमी के कारण आपके शरीर में कोर्टिसोल और इंसुलिन हार्मोन बहुत अधिक मात्रा में बनने लगते हैं, जिससे वजन बढ़ सकता है। यह उन हार्मोंस को भी गड़बड़ कर सकता है, जो भूख का संकेत देते हैं। इस स्थिति में अनचाही फूड क्रिविंग्स होती है, विशेष रूप से फैटी और शुगरी फूड्स की। ऐसे में अधिक कैलोरी इंटेक करने से बॉडी में फैट स्टोरेज बढ़ जाता है।

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यहां जानिए इनसोम्निया से किस तरह मोटापे का कारण बन सकता है। चित्र शटरस्टॉक।

6. मेटाबॉलिक सिंड्रोम (metabolic syndrome)

यह स्थितियों का एक समूह है, जो एक साथ आपको परेशान कर सकते हैं। इस स्थिति में हार्ट डिजीज, स्ट्रोक और डायबिटीज का खतरा सबसे अधिक होता है। आपका ब्लड प्रेशर, ब्लड कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर और बॉडी फैट अपने अस्वस्थ स्तर पर हो सकते हैं। ऐसे में आपकी कमर के आसपास की बढ़ती चर्बी इस समस्या का एक गंभीर संकेत है। मेटाबॉलिक साइड्रोम की स्थिति से निपटने के लिए आपका डॉक्टर डाइट और एक्सरसाइज के साथ-साथ मेडिसिंस में बदलाव की सलाह देते हैं।

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इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म ग्रेजुएट अंजलि फूड, ब्यूटी, हेल्थ और वेलनेस पर लगातार लिख रहीं हैं। ...और पढ़ें

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