आपकी गट हेल्थ को भी प्रभावित कर सकती है डायबिटीज, जानिए क्या है दोनों का कनेक्शन

हाई ब्लड शुगर गैस्ट्रोपैरिसिस का कारण बन सकता है, जो पाचन तंत्र को प्रभावित करता है। जानिए इस डायबिटिक कंडीशन के बारे में।

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मधुमेह पाचन तंत्र को कैसे प्रभावित करता है? चित्र: शटरस्टॉक
ऐश्‍वर्या कुलश्रेष्‍ठ Published on: 25 August 2022, 10:00 am IST
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घबराहट या सूजन के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन मधुमेह वाले लोगों को, इन सामान्य पाचन समस्याओं को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि उच्च रक्त शर्करा गैस्ट्रोपैरिसिस का कारण बन सकता है। यह एक ऐसी स्थिति है, जो आपके खाना पचाने की क्षमता को प्रभावित करती है। डायबिटीज़ गैस्ट्रोपैरिसिस (Gastroparesis) का सबसे आम कारण है।

डायबिटीज़ को प्रबंधित करने से आपको गैस्ट्रोपैरेसिस का प्रबंधन करने में मदद मिल सकती है। यह अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को रोकने में भी मदद कर सकता है।

क्या है गैस्ट्रोपेरिसिस?

इस स्थिति में आपके पेट की मांसपेशियां आपके पाचन तंत्र के माध्यम से भोजन को स्थानांतरित करने के लिए कस जाती हैं। यदि आपको गैस्ट्रोपैरिसिस है, तो उच्च रक्त शर्करा से तंत्रिका क्षति उन मांसपेशियों को स्लो कर सकती है या इनके कार्य को पूरी तरह बंद कर सकती है। जिसकी वजह से आपका पेट ठीक से खाली नहीं होगा, और आपके भोजन को पेट छोड़ने में काफी समय लग सकता है।

गैस्ट्रोपैरिसिस (Gastroparesis) प्रभावित करता है कि शरीर भोजन को कितनी तेजी से अवशोषित करता है, इसलिए इंसुलिन की खुराक को भोजन से मिलाना मुश्किल है। यह इस बात को भी प्रभावित करता है कि शरीर पोषक तत्वों को कैसे अवशोषित करता है।

यहां जानिए गैस्ट्रोपैरेसिस के लक्षण?

सेंटर फॉर प्रिवेंशन एंड डिजीज कंट्रोल (CDC) के अनुसार गैस्ट्रोपैरेसिस के लक्षण कुछ इस प्रकार हैं

बार-बार उल्टी होना
डिहाइड्रेशान
ब्लोटिंग
लक्षण
घबराहट
भूख न लगना

यदि आपको इनमें से कोई भी लक्षण है, तो आपको अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए। ताकि गैस्ट्रोपैरिसिस का इलाज किया जा सके।

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मधुमेह पाचन तंत्र को कैसे प्रभावित करता है?
चित्र: शटरस्टॉक

ये टिप्स आपकी गैस्ट्रोपैरिसिस को मैनेज करने में मदद कर सकती हैं

सेंटर फॉर प्रिवेंशन एंड डिजीज कंट्रोल के अनुसार गैस्ट्रोपेरिसिस का कोई इलाज नहीं है, लेकिन आप निम्नलिखित टिप्स से इसे कंट्रोल में रख सकती हैं –

अपने रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित रखें।

कई बार में, थोड़ा-थोड़ा भोजन खाएं जिनमें वसा और फाइबर कम हो। वसा, फाइबर और अधिक भोजन पेट को खाली करने में देरी कर सकते हैं और लक्षणों को और खराब कर सकते हैं।

खूब सारा पानी पिएं। प्रति दिन 6 से 10 गिलास।

अपने डॉक्टर और फार्मासिस्ट को उन सभी दवाओं के बारे में बताएं जो आप ले रहे हैं।

यदि आप जो दवाएं ले रहे हैं, उनसे पाचन संबंधी समस्याएं अधिक होती हैं, तो अपने डॉक्टर से बात करें।

शराब को सीमित करें या उससे बचें।

धूम्रपान न करें।

प्रत्येक सप्ताह कम से कम 150 मिनट की शारीरिक गतिविधि करें।

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ऐश्‍वर्या कुलश्रेष्‍ठ ऐश्‍वर्या कुलश्रेष्‍ठ

प्रकृति में गंभीर और ख्‍यालों में आज़ाद। किताबें पढ़ने और कविता लिखने की शौकीन हूं और जीवन के प्रति सकारात्‍मक दृष्टिकोण रखती हूं।

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