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टफ जॉब हो गया है बच्चेे को खाना खिलाना, तो फॉलो करें एक्‍सपर्ट के बताए ये 10 टिप्स

Updated on: 10 December 2020, 11:59am IST
अगर आपको भी बच्चों को खाना खिलाने में परेशानी हो रही है? वैसे, इसके कई कारण हैं जिनके बारे में आपने सोचा भी नहीं होगा। पर हम आपको इससे निपटने के तरीके के बारे में बता रहे हैं।
Bacho ko different food items khilaye
बच्चों को अलग-अलग प्रकार के स्वादिष्ट भोजन कराएं। चित्र: शटरस्‍टॉक

ज्‍यादातर माता-पिता का डॉक्टर से एक ही सवाल होता है, कि वह उन्हें कुछ ऐसा बताएं जिससे वे अपने बच्चे को आसानी से खाना खिला सकें। इसका मतलब यह है कि ज्यादातर पेरेंट्स को यह गलतफहमी होती है कि अगर उनका बच्चा खाने के लिए मना करता है, तो यह कोई बीमारी है। जिसे दवा के जरिए ठीक किया जा सकता है। लेकिन ऐसा नहीं है।

बच्चों को खाना खिलाना और उसे उनकी आदत बनाना इतना आसान नहीं है, लेकिन आप कोशिश करें तो इसे आसान बना सकती हैं। हम आपके साथ 10 ऐसे टिप्स शेयर कर रहें जो आपको अपने बच्चे की खाने की आदतों में परिवर्तन लाने में मददगार साबित हो सकते हैं।

1. बच्चे को खाने के लिए बाध्य न करें

हमारी संस्कृति में हम अक्सर भोजन को प्यार की अभिव्यक्ति के रूप में इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में हमारे बच्चे जब खुद से खाने लायक भी हो जाते हैं, तो भी हम उन्हें खाना खिलाने की कोशिश करते हैं। लेकिन ऐसा करने के लिए आपको उनके साथ सख्ती से पेश आने की जरूरत नहीं है।

यह टकराव बच्चे के भीतर एक संघर्ष को पैदा करता है। सख्ती के साथ बच्चे को खाने के लिए मजबूर करने के कारण, वे भोजन करते समय चिंता, हताशा और दबाव महसूस कर सकते हैं। बच्चे की उम्र 9 साल तक होने के बाद उसे खुद खाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए और अपने प्यार को खेल और सामाजिक बातचीत के जरिए व्यक्त करना चाहिए।

बच्‍चे को खाना खाने के लिए बाध्‍य न करें। चित्र: शटरस्‍टॉक
बच्‍चे को खाना खाने के लिए बाध्‍य न करें। चित्र: शटरस्‍टॉक

पक्षियों और जानवरों के उदाहरण से इसे कोई भी समझ सकता है, जब उनके बच्चे खाने से इनकार कर देते हैं तो उन्हें इससे कोई समस्या नहीं होती।

2. भोजन समय पर करवाएं

उन्हें नियमित रूप से रोजाना निश्चित समय पर ही भोजन करवाएं। साथ ही खाने में कम से कम 4 घंटे का गैप रखें। भोजन के बाद उन्हें दूध और फल भी उसी समय दिए जा सकते हैं। लेकिन खाने के बीच में सिर्फ पानी ही दें। भोजन के दौरान पैकेट वाले फूड्स और प्रोसेस्ड फूड्स जैसे जूस और दूध न परोसें। भोजन के बीच में स्नैक्स का सेवन करने से समग्र भोजन का सेवन कम हो जाएगा।

3. नए फूड्स के लिए बच्चे को समय दें

अगर बच्चों को भोजन को निगलने के लिए उपयुक्त स्थिरता प्रदान की जाए तो 6-12 महीने की उम्र के बच्चे नए फूड्स के प्रति काफी ग्रहणशील होते हैं। उन्हें विभिन्न रंगों, आकार, सुगंध और बनावट वाले फूड्स खाने के लिए प्रोत्साहित करें।

नए फूड्स को एक्‍सेप्‍ट करने में बच्‍चों को समय लग सकता है। चित्र: शटरस्‍टॉक
नए फूड्स को एक्‍सेप्‍ट करने में बच्‍चों को समय लग सकता है। चित्र: शटरस्‍टॉक

इससे पहले कि वे उन्हें खाने की कोशिश करें, यह जान लें कि कुछ फूड्स के निश्चित ही कई जोखिम भी हो सकते हैं। उन्हें अपने पसंदीदा भोजन के साथ परोसें।

4. विशेष भोजन न पकाएं

पहले वर्ष के बाद बच्चे उन सभी मिर्च-मसाले या बनावट वाले फूड्स का सेवन कर सकते हैं, जो कि बाकी सभी लोग करते हैं। उन फूड्स का ध्यान रखें जो कि बच्चे के निगलने के लिए थोड़े कठिन हो सकते हैं जैसे- बीज, अंगूर, सेब का छिलका।

अधिकांश व्यवहारों की तरह, बच्चे घर पर माता-पिता और स्कूल में साथियों की नकल करके खाने की आदतें सीखते हैं। उन्हें परिवार के अन्य सदस्यों के साथ खाने के लिए प्रोत्साहित करें, और खाने के लिए निर्धारित समय पर मौजूद रहें, भले ही वे भोजन न कर रहे हों।

5. भोजन को मजेदार बनाएं

फूड्स को आकर्षक आकृतियों में काटने की कोशिश करें, जिसे बच्‍चा अपने हाथों से पकड़ सके। बच्चे अक्सर मुंह में डालने से पहले अपने भोजन को हाथों से तलाशते हैं। एक बड़ी प्लेट में छोटे-छोटे टुकडे परोसें। उसे खत्म होने पर फिर से परोसें।

बच्‍चों को आकर्षक अंदाज में परोसा गया भोजन पसंद आता है। चित्र: शटरस्‍टॉक
बच्‍चों को आकर्षक अंदाज में परोसा गया भोजन पसंद आता है। चित्र: शटरस्‍टॉक

दोपहर के भोजन या रात के खाने के लिए नाश्ते के व्यंजनों को दोहराएं और उनके पसंदीदा सॉस के साथ भोजन परोसें।

6. खरीददारी के दौरान बच्चे को अपने साथ रखें

सब्जियों और फलों की खरीददारी के लिए अपने बच्चे को किराने की दुकान पर अपने साथ ले जाएं। ऐसा कुछ भी न खरीदें जो आप अपने बच्चे को घर पर नहीं खिलाना चाहती हैं। अगर आपका बच्चा यह जानता है कि घर पर स्नैक्स उपलब्ध हैं, तो ऐसे में उन्हें अनहेल्दी स्नैक्स के लिए मना करना मुश्किल है। उन्हें स्नैक्स की जगह फल खाना सिखाएं।

7. एक अच्छा उदाहरण बनें

खुद भी हेल्‍दी फूड्स का सेवन करे, और अपने बच्चे को आपकी नकल करके सीखने दें। नए फूड्स को ट्राय करने के लिए अपने बच्चे की प्रशंसा करें। अगर अभी वे नए फूड्स को खाने में समय ले रहे हैं तो धैर्य रखें। वह नए फूड को खाने में 15 मिनट तक का समय ले सकते हैं, जब तक कि वह उसे स्वीकार कर के खाने की कोशिश कर रहे हैं।

पहले खुद को हेल्‍दी फूड की आदत डालें। चित्र: शटरस्‍टॉक
पहले खुद को हेल्‍दी फूड की आदत डालें। चित्र: शटरस्‍टॉक

8. रचनात्मक बनें

यदि उन्हें सब्जियां खाने में कठिनाई होती है, तो उनके पसंदीदा फूड्स में मसली हुआ या कसी हुई सब्जियां आज़माएं। आप सब्जियों के साथ सैंडविच, भरवां पराठा या चपाती रोल बनाकर भी ट्राई कर सकते हैं। मेनू को अलग करने और विभिन्न रंगों की सब्जियों को शामिल करना याद रखें।

9. भोजन और मनोरंजन को मिक्स न करें

खाने के दौरान अपने बच्चे को स्क्रीन गतिविधियों से विचलित न करें। ऐसे में आपका बच्चा बिना स्क्रीन के भोजन करने से मना कर सकता है, जो कि स्क्रीन की लत की शुरुआत है। यह आपके बच्चे के खाने पर ध्यान केंद्रित करेगा और मीडिया विज्ञापनों का आपके बच्चे के आहार विकल्पों पर गलत प्रभाव पड़ेगा। यह अंततः शर्करा और गैर-पोषक खाद्य पदार्थों पर निर्भरता का कारण बनेगा जो बचपन के मोटापे के लिए जिम्मेदार हैं।

10. खाने को रिवॉर्ड न बनाएं

अपने बच्चे को गिफ्ट या पुरस्कार के रूप में मिठाई और आइसक्रीम न दें। यह उन्हें आभास देता है कि ये खाद्य पदार्थ दूसरों की तुलना में बेहतर हैं। जब आप खरीदारी या फिल्मों के लिए बाहर जाते हैं, तो आप मिठाई या विशेष व्यवहार के लिए सप्ताह में एक या दो दिन चुन सकते हैं।

खाना खिलाने में ये टिप्‍स आपकी मदद कर सकते हैं। चित्र : शटरस्टॉक
खाना खिलाने में ये टिप्‍स आपकी मदद कर सकते हैं। चित्र : शटरस्टॉक

याद रखें कि आपके बच्चे के खाने की आदतें कुछ दिनों में नहीं बदल सकतीं। लेकिन आपके द्वारा उठाए जाने वाले हर छोटे कदम का उनके दीर्घकालिक खाने की आदतों पर अच्छा प्रभाव पड़ेगा।

अगर आपके बच्चे को कोई ओरल समस्या है जैसे कि निगलने में कठिनाई या फूड एलर्जी, और आप इसको लेकर चिंतित हैं तो ऐसे में डॉक्टर से परामर्श करें।

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Dr Sanjeeva Reddy Dr Sanjeeva Reddy

Dr Sanjeeva Reddy is an MBBS, MD (Pediatrics) and has a diploma in Pediatric Emergency Medicine. Fellowship & Membership Senior clinical fellow in International Private Patients at Great Ormond Street Hospital, London, UK Senior Clinical Fellow in Neonatal intensive care, Newcross Hospital, Wolverhampton, UK Life member of Indian Academy of Pediatrics Member of National Neonatology Forum, Karnataka Executive member of Indian Medical Association, Whitefield branch