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Broken heart syndrome : जब आपका दिल टूटता है, आपके बच्‍चे पर भी होता है इसका असर

Published on:29 September 2020, 12:20pm IST
सैंकड़ों किलोमीटर दूर होने के बावजूद परिवार का हर सदस्‍य एक-दूसरे से भावनात्‍मक तौर पर जुड़ा होता है। ऐसे में जब आप ब्रेकअप या तलाक से गुजरती हैं, तो आपके दिल टूटने का असर आपके बच्‍चे की इमोशनल हेल्‍थ पर भी पड़ता है।
Dr. S.S. Moudgil
आपके लिए इस स्थिति को डील करना और भी मुश्किल हो सकता है। चित्र: शटरस्‍टॉक

दिल का मामला बेहद गंभीर है। जब आप किसी के प्‍यार में होते हैं, तो किसी नशे की तरह उसके आदी हो जाते हैं। वहीं जब दिल टूटता है तो शारीरिक और मानसिक तनाव आपको अवसाद से आत्‍महत्‍या तक की राह पर ले जाता है। पर क्‍या आप जानती हैं कि आपके दिल टूटने का असर आप से भी ज्‍यादा आपके बच्‍चे पर हो सकता है।

टूटा हुआ दिल सिंड्रोम – शॉक या दिल का दर्द भी जाना जाता है। तीव्र भावनात्मक तनाव या दर्द की परिस्थिति है। यह सार्वभौमिक है- संसार के लगभग हर हिस्से, हर सांस्कृतिक समूह में इसी नाम से जाना जाता है। असल में इसके और ड्रूग विद ड्राल सिंड्रोम के लक्षण इतने मिलते-जुलते हैं कि अगर हम इसे इमोशनल सपोर्ट विद ड्राल सिंड्रोम कह दें, तो कोई अतिशयोक्ति न होगी।

क्‍यों टूटता है दिल

असफल रोमांटिक प्रेम में ब्रेक अप, तलाक या किसी निकट संबंधी की मृत्यु या कभी-कभी निकट व्यक्ति यथा प्रेमी, पति, पत्नी या संतान का लाइलाज बीमारी से ग्रस्त होना इसके कारण हो सकते हैं। हालांकि अधिकतर या प्रेम संबन्ध टूटने या अचानक मृत्यु से जुड़े होते हैं।

ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम को नजरंदाज नहीं करना चाहिए। चित्र: शटरस्‍टॉक

यह स्थिति कई बार बेहद दर्दनाक हो सकती है तथा टूटे हुए दिल के पीड़ित अवसाद व चिंता का शिकार हो सकते हैं और अधिक चरम मामलों में, पोस्टट्रॉमेटिक तनाव तक हो सकता है।

दिल के दर्द की न्यूरोलॉजिकल प्रक्रिया ज्ञात नहीं है, लेकिन मस्तिष्क के एंटेरिअर सिंगुलेट कॉर्टेक्स के प्रभावित होने के कारण यह पीड़ा अनुभव होती है, ऐसा माना जाता है। दिमाग का यह हिस्सा तनाव के दौरान छाती में दर्द, मतली या मांसपेशियों में जकड़न के कारण अस्पष्ट तंत्रिका को अतिरंजित कर सकता है।

कुबलर रॉस नामक मनोरोग विशेषज्ञ के अनुसार ब्रेक अप के बाद या दौरान व्यक्ति दुख के पांच चरणों से गुजरता है – इन्‍कार, क्रोध, अवसाद, स्वीकृति, मनोरोग या आत्महत्या की यात्रा से गुजरता है।

इन्कार- शुरुआत में व्यक्ति यह स्वीकार ही नहीं कर पाता कि उसके साथ ऐसा हुआ है या ऐसा घट सकता है।
क्रोध – प्रेमी, पति या भगवान के प्रति क्रोध कि उसने मुझे इस स्थिति में क्यों डाला।
अवसाद – घोर डिप्रेशन में डूब जाना यानि अवसाद के लक्षण पैदा हो जाना।
स्वीकृति – अधिकतर कुछ दिन बाद हालात को स्वीकार कर लेना।
मनोरोग या आत्महत्या – अगर स्वीकार नहीं कर पता तो लंबे समय के लिए अवसाद या डिप्रेशन का रोगी हो सकता है। कभी-कभी ऐसे व्यक्ति आत्महत्या या आत्महत्या का प्रयास कर बैठते हैं।

इस तनाव और अवसाद भरी स्थिति का असर बच्‍चे पर भी पड़ता है। चित्र: शटरस्‍टॉक
इस तनाव और अवसाद भरी स्थिति का असर बच्‍चे पर भी पड़ता है। चित्र: शटरस्‍टॉक

फिजिकल लक्षण

  • थकावट, मांसपेशियों में जकड़न या कमजोरी, शरीर में दर्द, बेचैनी, ऊर्जा की कमी (कमजोरी)।
    अनिद्रा या बहुत ज्यादा नींद, बुरे परेशान करने वाले सपने आना।
  • भूख न लगना, अधिक भोजन करना, मतली, पेट और/अथवा कलेजे में खालीपन, अपच, आंतों के विकार जैसे दस्त, अत्यधिक वेट लॉस या वेट गेन।
  • सिर दर्द, सांस की कमी, छाती का दबाव, जकड़न या गले में भारीपन, बोलने में दिक्कत।

ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम के एक शोध के अनुसार अवसाद के एपिसोड में 24% लोग गहरे दुख या शॉक में दो महीने, 23% सात महीने में, 16% 13 महीने में और 14% 25 महीने ग्रसित रहे।
अधिक परेशान वे लोग मिले जो जीवन यापन में जाने वाले साथी पर निर्भर थे। निर्भरता आर्थिक व इमोशनल कोई भी हो सकती है।

टाक्टसूबो कार्डियोमायोपैथी या टूटा हुआ दिल सिंड्रोम आमतौर पर छाती या दिल या पेट के ऊपरी हिस्‍से (कलेजे) में एक दर्द के रूप में उभरता है। जो भावनात्मक-दर्दनाक प्रेम ब्रेकअप या किसी प्रियजन की मौत की वजह से तनाव के कारण हो सकता है।

असल में यह किसी नशे के विदड्राल लक्षणो जैसी स्थिति होती है। जिस तरह व्यक्ति नशे पर निर्भर हो जाता है उसे नशे की लत हो जाती है, उसी तरह प्रेम या संबंध में निर्भर हो जाना भी कभी-कभार लत पड़ने जैसी परिस्थिति उत्पन्‍न कर सकता है।
उपचार – काउंसिलिंग व मनोचिकित्सा जिसमें कुछ समय तक कुछ चिंता निवारक दवा दी जा सकती हैं।

आपके दिल के टूटने का बच्चे पर प्रभाव

इन स्थितियों में अनेक बार प्रेम में ब्रेक अप (लिव-इन) या तलाक होने पर अगर आपके बच्चे हैं, तो बच्चों पर भी इसका बुरा असर पड़ता हैं। तलाक या ब्रेक अप पूरे परिवार के लिए तनावपूर्ण है। बच्चे को तो उसकी दुनिया उथल-पुथल हो गई लगती है। इसलिए दोनों पार्टनर की ज़िम्मेदारी बनती है कि जिम्मेदारी से समझ बूझ के साथ बातचीत कर समस्या को बेहतर ढंग से निबटाएं।

अलग-अलग उम्र के बच्‍चे इस पर अलग तरह से रिएक्‍ट करते हैं। चित्र : शटरस्टॉक
अलग-अलग उम्र के बच्‍चे इस पर अलग तरह से रिएक्‍ट करते हैं। चित्र : शटरस्टॉक

कैसे खबर दें

अपने बच्चे के साथ दोनों पार्टनर एक साथ बैठकर समझाएं कि तुम यानि बच्चा तलाक का कारण नहीं हैं। ईमानदारी से बात करें, लेकिन बुरे विवरण छोड़ दें।
सुनिश्चित करें कि आपका बच्चा समझता है कि तलाक केवल वयस्कों के बीच है। अपने बच्चे को बताएं- कि तलाक का कारण वह नहीं है और आप दोनों अपने बच्चे से उतना ही प्यार करते हैं जितना पहले करते थे। साथ ही अपने बच्चे के टीचर, स्कूल काउंसलर और डॉक्टर को तलाक के बारे में बताएं। वे बच्चे का निरीक्षण कर सकते हैं, उसके मानसिक बदलाव को देख कर मार्गदर्शन प्रदान कर सकते हैं। आपको अग्रिम चेतावनी दे सकते हैं।

ब्रेक अप तलाक के बाद बच्चे में कुछ लक्षण देखे जा सकते हैं। ये उसकी उम्र पर निर्भर करता है

1- 2 वर्ष कि उम्र में, बच्चा रात के दौरान चिड़चिड़ा या जागने से प्रतिक्रिया दे सकता है।
2- प्री स्‍कूल के बच्चे को अतिरिक्त मदद की जरूरत होती है। समझाएं कि वह तलाक का कारण नहीं था और ऐसा कुछ भी नहीं है, जो वह करके आपको आपके पार्टनर के पास वापस ला सकता है।
3- स्कूल की उम्र के बच्चे अधिक गुस्‍सैल हो सकते हैं। उनके स्कूल ग्रेड कम हो सकते हैं, वे स्कूल में साथियों से लड़ सकते हैं।
4- किशोरों में बहुत अधिक परेशानी हो सकती है उन्हे क्रोध, डिप्रेशन के साथ-साथ नशे कि लत लग सकती है।
5- अपने बच्चे को अपनी भावनाओं को यथासंभव खुले तौर पर साझा करने के लिए प्रोत्साहित करें।

बच्चा कैसे इस आकस्मिक दुर्घटना से बाहर आए यह दोनों साथियों के रिश्ते टूटने के आपसी व्यवहार पर निर्भर करता है। बच्चे को अपने ब्रेकअप, तलाक या लड़ाई से बाहर रखें। चाहे दिखावे के लिए ही सही, आप दोनों पुराने गिले- शिकवे भूल कर बच्चे के लिए आपसी व्यवहार में मित्र बने रहने की कोशिश करें। बच्चे के सामने अपने पूर्व पति/पत्नी की बुराई न करें।

परिवार से कनैक्टिविटी आपको अवसाद और आत्‍महत्‍या से बचाए रखती है। चित्र: शटरस्‍टॉक
परिवार से कनैक्टिविटी आपको अवसाद और आत्‍महत्‍या से बचाए रखती है। चित्र: शटरस्‍टॉक

हमेशा ध्‍यान रखें

  • बच्चे को किसी एक पक्ष चुनने के लिए मजबूर न करें।
  • बच्चे के सामने किसी भी बात विशेषत: उसके बारे में बहस या चर्चा न करें।
  • बच्चे को एक-दूसरे की जासूसी के लिए प्रोत्साहित न करें और न ही अपनी लड़ाई में उसे मोहरा बनाएं।
  • बच्चे को एक-दूसरे से अधिक प्यार दिखाने की गलती न करें।
  • अपने बच्चे को अपने से पहले रखें।
  • तलाक के दौरान और तलाक के बाद भी आपस में बातचीत कर कस्टडी आदि मुद्दों को समझदारी से निबटाएं।
    याद रखें मन-मुटाव आपकी समस्या है बच्चे की नहीं और बच्चे को आप दोनों की जरूरत है।
    ब्रेकअप या तलाक के बाद काउंसलिंग आपकी मदद कर सकती है।

3 कमेंट्स

  1. बहुत ही गहन किन्तु बड़ी सहजता से प्रस्तुत किया गया वर्णन ।

  2. महत्वपूर्ण जानकारियों से भरा लेख है. भाषा सरल और बोधगम्य है. बहुत बहुत बधाई.

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Dr. S.S. Moudgil Dr. S.S. Moudgil

Dr. S.S. Moudgil is senior physician M.B;B.S. FCGP. DTD. Former president Indian Medical Association Haryana State.