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अनलॉक 4.0 : कोविड-19 के प्रति लापरवाह होने लगी हैं, तो आपको इसे ध्‍यान से पढ़ना चाहिए

Published on:3 September 2020, 17:15pm IST
आप महीनों से घर में बंद हैं, दोस्‍तों से मिले बिना उकता गए हैं, नौकरी के लिए घर से निकलना जरूरी है, तो भी कोविड-19 आपको लापरवाही की अनुमति नहीं देर रहा।
Dr. S.S. Moudgil
अनलॉक 4.0 में युवाओं को कोरोनावायरस से ज्‍यादा सतर्क रहने की जरूरत है। चित्र: शटरस्‍टाॅॅॅक

हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा जारी सूचनाओं से पता चला है कि कोरोना संक्रमण का अनुपात अब युवाओं और बच्‍चों में पहले से काफी ज्‍यादा हो गया है। यह दावा 2020 के फरवरी माह से जुलाई तक 60 लाख लोगों पर आधरित एक अध्ययन से प्राप्‍त आंकड़ों के आधार पर किया गया है। जिसके अनुसार ढाई करोड़ कोरोना संक्रमित लोगों में अब 5 से 24 वर्ष की आयु के व्यक्तियों में संक्रमण का अनुपात बढ़ रहा है। भारत में अनलॉक 4 के मद्देनजर यह डराने वाली खबर है।

कोविड-19 पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की तकनीकी प्रमुख मारिया वान केर्खोव ने कहा कि युवा आबादी की ओर महामारी का चलन एक “चिंताजनक” संकेत है। इस बारे में संभावना जताई जा रही है कि अनेक देशों द्वारा लॉक डाउन प्रतिबंधों को कम करना या लॉकडाउन को हटा देना इसके लिए जिम्‍मेदार है।

कम दिखाई देते हैं युवाओं में लक्षण

हालांकि “युवाओं में संक्रमण के लक्षण मामूली पाए जाते हैं, लेकिन यह उनके साथ रहने वाले बुजुर्गों के लिए खतरनाक हो सकता है। बच्‍चे और युवा कासंक्रमित होते हैं, तो उनकी मोबिलिटी के कारण कोरोनावायरस के प्रसार की संभावना कई गुणा बढ़ जाती है।”

युवाओं में कोरोनावायरस का अनुपात बढ़ता जा रहा है। चित्र: शटरस्‍टॉक

इन साठ लाख मामलों के उपलब्ध आंकड़ों में एक तिहाई संयुक्त राज्य अमेरिका के हैं| उनमें, पांच से 14 वर्ष के संक्रमित लोगों का अनुपात 0.8 प्रतिशत से 4.6 प्रतिशत तक बढ़ गया, 15 से 24 वर्ष की आयु के लोगों में 4.5 से 15 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई।

युवाओं को है ज्‍यादा सतर्क रहने की जरूरत 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के चीफ टेड्रोस अधनोम घेब्रेसियस (Tedros Adhanom Ghebreyesus) युवाओं को संबोधित करते हुए कहते हैं – `कोरोना आज युवाओं के जीवन पर एक बड़ा प्रभाव डाल रहा है और भविष्य के रोजगार और शिक्षा के अवसरों के बारे में चिंता पैदा कर रहा है। इसकी प्रतिक्रिया में आपकी बड़ी भूमिका है, इसलिए इससे सुरक्षित रहें और इस महामारी को समाप्त करने में मदद करें।`

कोरोना विशेषज्ञ वान केराखोव के अनुसार तथाकथित “लॉकडाउन” के महीनों के बाद जन-जीवन को फिर से खोलना इसका कारण है। लोग अपनी सामान्य दिनचर्या पर लौट रहे हैं। यही संक्रमण में वृद्धि के लिए संभावित योगदान का कारण है।

“लॉक डाउन खुलने से, हमारे व्यवहार में एक बदलाव आया है। अब अधिक लोग बाहर जा रहे हैं, काम पर वापस जाने लगे हैं, सामाजिक आयोजनों में भाग ले रहे हैं … हमारा यह बदला हुआ व्‍यवहार युवाओं में संक्रमण को बढ़ा रहा है।“

उकताए लोग लापरवाह होने लगे हैं

एक अन्य कारण इस रोग निगरानी रणनीति में बदलाव है। शुरुआत में हम कोविड सहित नई बीमारियों के लिए प्रारंभिक निगरानी, शुरुआत में अधिक गंभीर मामलों पर केंद्रित रहे हैं, लेकिन अब देशों ने जांच दायरे बढ़ा दिए हैं और गंभीर मामलों के अलावा भी टेस्ट किये जा रहे हैं।
पिछले महीने, डब्ल्यूएचओ के प्रमुख ने कहा कि कुछ देशों में हाल के दिनों में स्पाइक यानी संक्रमण के तेजी से बढ़ने का आंशिक कारण युवाओं की गतिविधि का बढ़ते जाना है। “उत्तरी गोलार्ध में गर्मी बढ़ने के कारण लोगों ने सुरक्षा इंतजाम में ढिलाई बरतनी शुरू कर दी है।

इस तरह आप दूसरों में भी संक्रमण फैला सकते हैं। चित्र: शटरस्‍टॉक

वैश्विक हैं लापरवाही के उदाहरण 

  • दक्षिण कोरिया में, मई में दर्जनों नए मामले राजधानी सियोल के एक लोकप्रिय नाइटलाइफ़ जिले से जुड़े थे, जो बार, नाइटक्लब और रेस्तरां से भरे हुए थे।
  • जापान में नाइटस्पॉट और मनोरंजन उद्योग में इसी तरह के प्रकोपों की सूचना दी गई है।
  • अमेरिका के कुछ कॉलेजों ने छात्रों के कैंपस लौटने के बाद से उनके बीच के मामलों की भी रिपोर्ट की है।
  • कुछ दिन पहले एक व्यापक पूल पार्टी की तस्वीरें और वीडियो सामने आईं, जिसमें चीनी शहर वुहान में हजारों लोगों ने भाग लिया, जहां वायरस पहली बार पिछले दिसंबर में उभरा था, ने विवाद को जन्म दिया है। डब्ल्यूएचओ ने बताया है कि इसी तरह की छवियां कई अन्य देशों में भी देखी गई हैं।
  • भारत में यह लाखों प्रवासी श्रमिकों के अचानक घर वापसी की भीड़ और फिर उनकी काम पर वापसी एक और कारण हो सकता है संक्रमण के तेजी से फैलने का। लोग घर बैठे उकता गए थे, लॉक डाउन में ढील मिलते ही बेफिक्र हो बाहर निकल पड़े।

अमीर देशों व अमीर लोगों में जहां मौज-मस्ती इसका कारण हो सकती है, वहीँ गरीब देशों व गरीब लोग रोजगार की मजबूरी, भूखों मरने की नौबत से बाहर निकल पड़े हैं |

कोरोनो के बारे में कुछ मिथ्‍स ने भी लापरवाही बढ़ाने का काम किया है, जैसे-

  1. युवाओं और बच्चों को कोरोनावायरस से कोई खतरा नहीं है
  2. गर्मी के कारण खतरा कम हुआ है
  3. अब कोरोना वायरस खुद ब खुद कमजोर होने लगा है|

विशेषज्ञ कहते हैं कि हालांकि बड़ी उम्र के लोगों में कोरोना वायरस से गंभीर बीमारी होने का अधिक खतरा है, लेकिन नए कोरोनावायरस के कारण होने वाली बीमारी– से युवा “अजेय” नहीं हैं।

अनलॉक 4.0 में आपको ज्‍यादा सतर्क रहने की जरूरत है। चित्र: शटरस्‍टॉक

अनेक युवाओं में न केवल इस रोग के गंभीर मामले सामने आये हैं अपितु मृत्यु भी देखी गई है |
आपने देखा कि कई अमीर एक्टर व राजनेता जिनके पास अकूत धन सम्पति के अलावा सुरक्षा साधनों की कोई कमी नहीं है वे भी इसकी चपेट में आ गए हैं| भारत में ही नहीं ब्रिटेन, जर्मनी, कनाडा यहां तक कि अमेरिका के अनेक गणमान्य लोग भी इसकी चपेट में आ चुके हैं |

चलते- चलते

अब भी ध्यान रखना बहुत जरुरी है, बल्कि ज्यादा जरुरी है। जिस तरह सड़क पर कार चलाते हुए चालक को न केवल खुद अपना वाहन तरीके से संभल कर चलाना होता है, अपितु दूसरे वाहन चालक की गलती से भी बचाव करना होता है, उसी तरह अपना और अपनों का ख्याल तो रखिये ही, साथ-साथ लापरवाही करने वाले लोगों को भी चेताते रहिये |

1 याद रखिये वायरल बीमारियों की दवा नहीं होती। जो होती हैं वह केवल गंभीरता को कम कर सकती है, रोग खत्म नहीं करती |
2- अभी वैक्सीन आने में वक्त लगेगा। जल्द से जल्द अगले साल के मध्य तक यह आ सकती है। आने के बाद ही उसके द्वारा कितनी सुरक्षा मिलेगी इसका आकलन संभव होगा।

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Dr. S.S. Moudgil Dr. S.S. Moudgil

Dr. S.S. Moudgil is senior physician M.B;B.S. FCGP. DTD. Former president Indian Medical Association Haryana State.